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असम के मुख्यमंत्री के बयान पर भड़का बांग्लादेश: भारतीय उच्चायुक्त को किया तलब, जानें क्या है पूरा मामला
पीटीआई, ढाका
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 01 May 2026 05:00 PM IST
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सार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की ओर से घुसपैठियों के लिए इस्तेमाल की गई कठोर भाषा पर ढाका ने सख्त ऐतराज जताया है। कूटनीतिक स्तर पर हुई इस शिकायत ने भारत-बांग्लादेश के सुधरते रिश्तों के बीच एक नई असहजता पैदा कर दी है। क्या है पूरा मामला? खबर में जानिए...
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा
- फोटो : ANI
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विस्तार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को ढाका में तैनात भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बढ़े को तलब किया। बांग्लादेश ने मुख्यमंत्री के बयान पर अपनी गहरी नाराजगी जताते हुए इसे दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों के खिलाफ बताया है।
इशरत जहां ने दर्ज कराया विरोध
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय की महानिदेशक इशरत जहां ने भारतीय राजनयिक पवन बढ़े से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने औपचारिक विरोध दर्ज कराया। बांग्लादेशी अधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की बयानबाजी द्विपक्षीय संबंधों के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक टिप्पणी करते समय संयम बरतना बेहद जरूरी है।
यह भी पढ़ें: पश्चिम एशिया में तनाव बरकरार: होर्मुज में 90% से अधिक घटी जहाजों की आवाजाही; जंग का दंश झेल रही पूरी दुनिया
क्या था विवादित बयान?
पूरा विवाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के उस पोस्ट से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने 20 विदेशियों को पकड़े जाने की जानकारी दी थी। सरमा ने लिखा था, 'अभद्र लोग नरम भाषा नहीं समझते। हम असम से उन घुसपैठियों को बाहर निकालते समय इस बात को लगातार याद रखते हैं।'
रिश्तों में सुधार के बीच नई चुनौती
बांग्लादेश ने इन टिप्पणियों को अपमानजनक करार दिया है। गौरतलब है कि 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट आई थी। हालांकि, फरवरी 2026 के चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की जीत और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद रिश्ते फिर से पटरी पर लौट रहे थे। ऐसे में इस ताजा कूटनीतिक तकरार ने नई चुनौतियां पेश कर दी हैं।
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इशरत जहां ने दर्ज कराया विरोध
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय की महानिदेशक इशरत जहां ने भारतीय राजनयिक पवन बढ़े से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने औपचारिक विरोध दर्ज कराया। बांग्लादेशी अधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की बयानबाजी द्विपक्षीय संबंधों के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक टिप्पणी करते समय संयम बरतना बेहद जरूरी है।
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क्या था विवादित बयान?
पूरा विवाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के उस पोस्ट से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने 20 विदेशियों को पकड़े जाने की जानकारी दी थी। सरमा ने लिखा था, 'अभद्र लोग नरम भाषा नहीं समझते। हम असम से उन घुसपैठियों को बाहर निकालते समय इस बात को लगातार याद रखते हैं।'
रिश्तों में सुधार के बीच नई चुनौती
बांग्लादेश ने इन टिप्पणियों को अपमानजनक करार दिया है। गौरतलब है कि 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट आई थी। हालांकि, फरवरी 2026 के चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की जीत और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद रिश्ते फिर से पटरी पर लौट रहे थे। ऐसे में इस ताजा कूटनीतिक तकरार ने नई चुनौतियां पेश कर दी हैं।
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