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खुलासा: ₹12.5 करोड़ में पूर्व अमेरिकी कमांडो बने भाड़े के कातिल, UAE के कहने पर यमन में मचाया कत्लेआम!
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 03 Apr 2026 06:46 PM IST
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सार
अमेरिकी सेना के पूर्व कमांडो ने यूएई से हर महीने ₹12.5 करोड़ लेकर यमन में राजनीतिक विरोधियों की हत्याएं कीं। यमन के एक सांसद ने बाल-बाल बचने के बाद अब अमेरिकी कोर्ट में इन भाड़े के हत्यारों के खिलाफ केस दर्ज कराया है। इससे पहले खुद आरोपियों ने भी अपनी संलिप्तता की बात कबूली थी।
पूर्व अमेरिकी कमांडो
- फोटो : @सोशल मीडिया
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विस्तार
पैसा क्या कुछ नहीं करा सकता, इसका एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अमेरिका के पूर्व जांबाज सैनिकों पर पैसों के लिए दूसरे देशों में 'कॉन्ट्रैक्ट किलिंग' यानी भाड़े पर हत्याएं करने का बेहद गंभीर आरोप लगा है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के इशारे पर यमन में राजनेताओं और विरोधियों की हत्याएं की गई थीं। इसके लिए अमेरिकी कमांडोज को हर महीने करीब 1.5 मिलियन डॉलर, यानी करीब 12.5 करोड़ रुपये दिए जा रहे थे। इतना ही नहीं, हर कामयाब हत्या पर अलग से मोटा बोनस भी मिलता था।
क्या है पूरा मामला?
इस मामले का खुलासा यमन के सांसद अनसफ अली मायो की तरफ से अमेरिकी कोर्ट में दायर किए गए मुकदमे के बाद हुआ है। मायो का आरोप है कि साल 2015 में उन्हें जान से मारने के लिए 'स्पीयर ऑपरेशंस ग्रुप' नाम की एक निजी सुरक्षा कंपनी को सुपारी दी गई थी। इस कंपनी को चलाने वाले कोई और नहीं बल्कि अमेरिका के पूर्व जांबाज फौजी और नेवी सील के पूर्व कमांडो थे।
मायो के मुताबिक, 29 दिसंबर 2015 को इस कंपनी के ठेकेदार ने दक्षिणी यमन के अदन शहर में स्थित उनके दफ्तर में बम लगाया था। गनीमत यह रही कि धमाके से चंद मिनट पहले ही वह वहां से निकल गए। इसके बाद जान के डर से उन्हें अपना वतन छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेनी पड़ी।
यह भी पढ़ें: Emmanuel Macron On Trump: पत्नी का मजाक उड़ाने पर बिफरे इमैनुएल मैक्रों, ट्रंप को पढ़ाया 'शालीनता का पाठ'
खुद कबूला सच
चौंकाने वाली बात यह है कि इस कत्लेआम के खेल को रचने वाले पूर्व अमेरिकी कमांडो इब्राहिम गोलन और इसाक गिल्मोर ने खुद मीडिया के सामने इस बात को कबूल किया था। गोलन ने 2018 में एक इंटरव्यू में सीना ठोक कर कहा था कि हां यमन में लक्षित हत्याएं यानी 'टारगेट किलिंग' का प्रोग्राम चल रहा था। मैं इसे चला रहा था और इसे यूएई का पूरा समर्थन हासिल था।
दरअसल, यमन के गृहयुद्ध में यूएई एक गठबंधन के तहत लड़ रहा था। यूएई ने वहां की अल-इस्लाह पार्टी को एक आतंकी संगठन घोषित कर रखा था, जबकि कई अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह महज एक राजनीतिक पार्टी थी जो यूएई के एजेंडे का विरोध कर रही थी। यूएई ने आतंकवाद से लड़ने की बात तो मानी है, लेकिन राजनीतिक हत्याओं के आरोपों को हमेशा खारिज किया है।
अमेरिका में फंसे पूर्व कमांडो
यमन के सांसद मायो भले ही अमेरिका के नागरिक नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अमेरिकी कानून 'एलियन टॉर्ट स्टेट्यूट' के तहत यह केस किया है। यह कानून विदेशियों को भी मानवाधिकारों के हनन और अंतरराष्ट्रीय अपराधों के खिलाफ अमेरिकी अदालतों में केस लड़ने का अधिकार देता है। अब पूर्व अमेरिकी कमांडो इब्राहिम गोलन और इसाक गिल्मोर कानूनी मसलों में उलझ गए हैं।
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क्या है पूरा मामला?
इस मामले का खुलासा यमन के सांसद अनसफ अली मायो की तरफ से अमेरिकी कोर्ट में दायर किए गए मुकदमे के बाद हुआ है। मायो का आरोप है कि साल 2015 में उन्हें जान से मारने के लिए 'स्पीयर ऑपरेशंस ग्रुप' नाम की एक निजी सुरक्षा कंपनी को सुपारी दी गई थी। इस कंपनी को चलाने वाले कोई और नहीं बल्कि अमेरिका के पूर्व जांबाज फौजी और नेवी सील के पूर्व कमांडो थे।
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मायो के मुताबिक, 29 दिसंबर 2015 को इस कंपनी के ठेकेदार ने दक्षिणी यमन के अदन शहर में स्थित उनके दफ्तर में बम लगाया था। गनीमत यह रही कि धमाके से चंद मिनट पहले ही वह वहां से निकल गए। इसके बाद जान के डर से उन्हें अपना वतन छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेनी पड़ी।
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खुद कबूला सच
चौंकाने वाली बात यह है कि इस कत्लेआम के खेल को रचने वाले पूर्व अमेरिकी कमांडो इब्राहिम गोलन और इसाक गिल्मोर ने खुद मीडिया के सामने इस बात को कबूल किया था। गोलन ने 2018 में एक इंटरव्यू में सीना ठोक कर कहा था कि हां यमन में लक्षित हत्याएं यानी 'टारगेट किलिंग' का प्रोग्राम चल रहा था। मैं इसे चला रहा था और इसे यूएई का पूरा समर्थन हासिल था।
दरअसल, यमन के गृहयुद्ध में यूएई एक गठबंधन के तहत लड़ रहा था। यूएई ने वहां की अल-इस्लाह पार्टी को एक आतंकी संगठन घोषित कर रखा था, जबकि कई अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह महज एक राजनीतिक पार्टी थी जो यूएई के एजेंडे का विरोध कर रही थी। यूएई ने आतंकवाद से लड़ने की बात तो मानी है, लेकिन राजनीतिक हत्याओं के आरोपों को हमेशा खारिज किया है।
अमेरिका में फंसे पूर्व कमांडो
यमन के सांसद मायो भले ही अमेरिका के नागरिक नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अमेरिकी कानून 'एलियन टॉर्ट स्टेट्यूट' के तहत यह केस किया है। यह कानून विदेशियों को भी मानवाधिकारों के हनन और अंतरराष्ट्रीय अपराधों के खिलाफ अमेरिकी अदालतों में केस लड़ने का अधिकार देता है। अब पूर्व अमेरिकी कमांडो इब्राहिम गोलन और इसाक गिल्मोर कानूनी मसलों में उलझ गए हैं।