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सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैलाने वाले को होगी पांच साल की जेल
Fri, 07 Jun 2019 06:38 AM IST
Avdhesh Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 07 Jun 2019 06:38 AM IST
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श्रीलंका में ईस्टर पर हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में फेक न्यूज की वजह से सरकार को कई बार सफाई जारी करनी पड़ी थी। जिसके सरकार ने अब एक कड़ा कदम उठाया है। दरअसल, श्रीलंका सरकार फेक न्यूज और हेट स्पीच (नफरत फैलाने वाले भाषण) रोकने के लिए नया कानून लाने जा रही है। इसके तहत सोशल मीडिया पर गलत जानकारी और नफरत फैलाने के दोषी को पांच साल जेल की सजा दी जाएगी। इसके अलावा उस पर 10 लाख श्रीलंकाई रुपये (करीब 3.92 लाख भारतीय रु.) का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
हालांकि, सरकार ने अभी इन दोनों अपराधों की परिभाषा नहीं बताई है। हालांकि जल्द ही दंड संहिता को संशोधित किया जाएगा। दरअसल, 21 अप्रैल को ईस्टर पर हुए सीरियल धमाकों के बाद पूरे श्रीलंका में सोशल मीडिया के जरिए फेक न्यूज और नफरत वाले बयान फैलाए गए। इसके कारण कई जगहों पर मुस्लिम समुदायों पर हमले हुए हैं। सरकार ने इसके लिए फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप को गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाने का दोषी ठहराया था।
श्रीलंका में फर्जी खबरों को रोकने के लिए बाद में सरकार ने खुद सोशल मीडिया पर नौ दिन का बैन लगा दिया था। इस दौरान आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने हमलों की जिम्मेदारी ली थी और हमले के आरोपियों की फोटो और वीडियो जारी किए थे। वीडियो के अलग-अलग माध्यमों से लोगों तक पहुंचने के बाद देश में यूट्यूब पर भी अस्थाई रोक लगा दी गई थी।
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हालांकि, सरकार ने अभी इन दोनों अपराधों की परिभाषा नहीं बताई है। हालांकि जल्द ही दंड संहिता को संशोधित किया जाएगा। दरअसल, 21 अप्रैल को ईस्टर पर हुए सीरियल धमाकों के बाद पूरे श्रीलंका में सोशल मीडिया के जरिए फेक न्यूज और नफरत वाले बयान फैलाए गए। इसके कारण कई जगहों पर मुस्लिम समुदायों पर हमले हुए हैं। सरकार ने इसके लिए फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप को गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाने का दोषी ठहराया था।
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श्रीलंका में फर्जी खबरों को रोकने के लिए बाद में सरकार ने खुद सोशल मीडिया पर नौ दिन का बैन लगा दिया था। इस दौरान आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने हमलों की जिम्मेदारी ली थी और हमले के आरोपियों की फोटो और वीडियो जारी किए थे। वीडियो के अलग-अलग माध्यमों से लोगों तक पहुंचने के बाद देश में यूट्यूब पर भी अस्थाई रोक लगा दी गई थी।
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