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भविष्य के युद्ध: 50 स्वार्म ड्रोन्स का ग्रिड रखेगा दुश्मनों पर नजर, DRDO बनाएगा स्वदेशी ड्रोन; कैसी होगी ताकत?

Sun, 02 Aug 2026 09:15 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 02 Aug 2026 09:15 AM IST
सार

अत्याधुनिक तकनीक से लैस होते जा रहे सुरक्षाबल भविष्य के युद्ध की तैयारी भी कर रहे हैं। डीआरडीओ ने स्वदेशी स्वार्म ड्रोन प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। अगले 24 महीने में डोन तैयार किए जाएंगे। होगा तैयार 50 स्वार्म ड्रोन्स का ग्रिड दुश्मनों पर नजर रखेगा। जानिए क्या है खास

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Future Warfare grid of 50 swarm drones against enemy DRDO to develop indigenous drones know capabilities
डीआरडीओ बनाएगा स्वदेशी ड्रोन (सांकेतिक) - फोटो : AI Generated

विस्तार

भविष्य के युद्धों और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी की चुनौतियों से निपटने के लिए डीआरडीओ (डीआरडीओ) अब 50 ड्रोन्स के समूह का स्वदेशी बेड़ा तैयार करने जा रहा है। इस तकनीक के तहत दर्जनों ड्रोन हवा में एक मास्टर ड्रोन के इशारे पर एक साथ उड़ान भरेंगे और मुश्किल परिस्थितियों में भी अचूक निगरानी रख सकेंगे।

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डीआरडीओ ने इसके किए रिक्वेस्ट फ़ॉर प्रपोजल (सूचना अनुरोध) जारी किया है। इसके अनुसार इस स्वार्म सिस्टम में कुल 50 ड्रोन शामिल होंगे। इनमें 7×7 के ग्रिड फॉर्मेशन में 49 ड्रोन होंगे, जिन्हें एक मास्टर ड्रोन नियंत्रित और निर्देशित करेगा। मास्टर ड्रोन सीधे ग्राउंड स्टेशन से निर्देश प्राप्त करेगा और बाकी ड्रोन्स के बीच संचालन का संतुलन बनाए रखेगा। परियोजना में ड्रोन की उड़ान की सटीकता पर खास जोर दिया गया है।
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हर ड्रोन 2 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने में होगा सक्षम
प्रत्येक ड्रोन को मात्र 5 सेंटीमीटर की सटीकता बनाए रखते हुए उड़ान भरनी होगी। यह प्रणाली 72 किलोमीटर प्रति घंटा की हवा में भी अपनी उड़ान बनाए रखने में सक्षम होगी। साथ ही 5,000 मीटर तक की ऊंचाई में भी काम करने में सक्षम होगी। यह ड्रोन्स ग्राउंड स्टेशन से 15 से 25 किलोमीटर तक के दायरे में जाकर अपना मिशन पूरा करके वापस लौट सकते हैं। हर ड्रोन 500 ग्राम से 2 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने में सक्षम होगा। इनकी उड़ान अवधि कम से कम 30 मिनट होगी। इसमें 15 मिनट में रैपिड-रीचार्ज की सुविधा भी होगी। दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक हमलों से बचाव के लिए ड्रोन के बीच जैमर प्रतिरोधी संचार प्रणाली लगाई जाएगी।

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भविष्य के युद्ध में भूमिका
आधुनिक युद्धक्षेत्र में स्वार्म ड्रोन तकनीक गेमचेंजर साबित हो रही है। एक साथ दर्जनों ड्रोन्स का संचालन निगरानी, टोही और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे सैन्य अभियानों को आसान बनाता है। खासकर कठिन पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में इससे सेना की निगरानी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।



70 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग
डीआरडीओ ने इनमें कम से कम 70 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग अनिवार्य किया है। साथ ही प्रतिद्वंद्वी देशों से खरीदे गए कमर्शियल कंपोनेंट्स के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। सैन्य ड्रोन में चीनी पुर्जों के इस्तेमाल से डाटा लीक और साइबर जासूसी का बड़ा जोखिम रहता है। इसमें भारतीय एमएसएमई, स्टार्टअप्स और निजी कंपनियों को ही मौका दिया गया है। परियोजना की समयसीमा 24 महीने रखी गई है, जिसमें डिजाइन, प्रोटोटाइप और अंतिम परीक्षण शामिल होंगे।

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