शोध के नतीजों ने चौंकाया: घंटों रील्स देखने की आदत सोचने-समझने की क्षमता छीन रही, शार्ट वीडियो से भी तनाव
सोशल मीडिया के बढ़ते निरंकुश प्रयोग को लेकर एक शोध हुआ। शोध के चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। घंटों रील्स देखने की आदत सोचने-समझने की क्षमता छीन रही है। शार्ट वीडियो से भी तनाव हो रहा है। अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण भी खत्म हो जाता है।
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काम करते-करते थक गए हों या लंबा रास्ता काटना बोझिल लगने लगे तब एक-आधे मिनट की बेसिर-पैर की मजेदार रील्स देखकर आप नई ऊर्जा से भर जाते हैं। लेकिन यही रील्स या शॉर्ट वीडियो देखना लत बन जाए तो आपकी सोचने-समझने की क्षमता को कुंद कर सकती है।
क्या ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कमजोर?
अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन में प्रकाशित एक वैश्विक मेटा-विश्लेषण से पता चलता है कि शॉर्ट-फॉर्म वीडियो का अत्यधिक उपयोग दिमाग की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को कमजोर कर रहा है और लोगों में तनाव और चिंता बढ़ने का कारण बन रहा है।
सोशल मीडिया इस्तेमाल के हालात कितने डरावने?
- 90% से 95% इंटरनेट यूजर किसी ने किसी एप पर देखते हैं रील्स।
- विभिन्न सर्वे के मुताबिक, 120 से 168 मिनट तक औसतन हर दिन शॉर्ट वीडियो स्क्रॉल करने में बिता देते हैं लोग।
- 13.25 वर्ष के युवाओं को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है।
फोन दूर करने पर घबराहट होने लगती है
रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादा देर रील्स और शॉर्ट वीडियो देखने वाले अन्य चीजों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। यह नहीं, अपने व्यवहार और इच्छाओं पर नियंत्रण भी खो देते हैं। कई बार तो हालत ऐसी होती है, अगर फोन दूर कर दिया जाए तो उन्हें घबराहट होने लगती है।