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आयरन बीम, ब्रह्मोस से तेज मिसाइल और ट्रेड डील: इस्राइल से क्या हासिल कर सकता है भारत, PM का दौरा कितना अहम?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 25 Feb 2026 03:49 PM IST
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सार

पीएम मोदी के इस्राइल दौरे का शेड्यूल क्या है? रक्षा खरीद से लेकर तकनीक के क्षेत्र में भारत के एजेंडे में क्या-क्या है? इस्राइल को भारत से क्या-क्या हासिल होने की उम्मीद है? आइये जानते हैं...

India PM Modi Israel Visit From Defence to Technology AI Trade Deal know importance Yad Vashem Knesset IMEC
भारतीय पीएम का इस्राइल दौरा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (25 फरवरी) को इस्राइल का दौरा शुरू कर रहे हैं। 2017 के बाद यह इस देश का उनका दूसरा दौरा है। माना जा रहा है कि बीते एक दशक में भारत-इस्राइल के संबंध जिस तेजी से बढ़े हैं, अब पीएम मोदी के दौरे से यह रिश्ते नए पड़ाव में पहुंच जाएंगे। 
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पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब पश्चिम एशिया में तनाव जारी है। एक तरफ ईरान पर अमेरिकी हमले का खतरा बरकरार है तो दूसरी तरफ इस्राइल भी लंबे समय से फलस्तीन में हमास से संघर्ष में जुटा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की इस्राइल यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी मुलाकात के दौरान रक्षा से लेकर व्यापार और तकनीक से लेकर कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के मुद्दे पर समझौता कर सकते हैं। आइये जानते हैं पीएम मोदी के इस्राइल दौरे का पूरा एजेंडा...
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पीएम मोदी के इस्राइल दौरे का क्या एजेंडा?

1. रक्षा और सुरक्षा
प्रधानमंत्री मोदी के इस्राइल दौरे के सबसे अहम बिंदु रक्षा और सुरक्षा पर होने वाले समझौते होंगे। भारत इस क्षेत्र में हथियार खरीद से लेकर उन्नत तकनीक हासिल करने पर जोर दे सकता है। 

मौजूदा समय में भारत इस्राइल का सबसे बड़ा रक्षा खरीदार है। इस दौरे पर 2026 के लिए 8.6 अरब डॉलर के हथियार सौदों को मंजूरी मिल सकती है, जिसमें सटीक निशाना लगाने वाले युद्धक हथियार, मिसाइलें और बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियां शामिल हैं।

उन्नत तकनीक की खरीद: इस समझौते के तहत भारत को इस्राइल के उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों तक पहुंच मिल सकती है, जिसमें अत्याधुनिक लेजर-आधारित आयरन बीम शामिल है। साथ ही गोल्डन होराइजन एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल पर भी चर्चा हो सकती है। इस मिसाइल को ब्रह्मोस से भी तेज बताया जाता है।

संयुक्त परियोजनाएं: एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली, निर्देशित-ऊर्जा लेजर हथियारों, लंबी दूरी की मिसाइलों और नेक्स्ट-जेनरेशन ड्रोन के संयुक्त विकास पर विचार-विमर्श होने की संभावना है। 

ये भी पढ़ें: क्या है हेक्सागॉन अलायंस: भारत को इसका हिस्सा बनाना चाहते हैं नेतन्याहू; इस्राइल क्यों दे रहा जोर, मकसद क्या?

2. प्रौद्योगिकी और नवाचार

  • दोनों नेताओं के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर अहम चर्चा होगी। पीएम मोदी यरूशलम में एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का भी दौरा करेंगे।
  • इस्राइली सरकार ने भारत के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए चार करोड़ डॉलर की योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत भारत में 10 नए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा टेलीमेडिसिन और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी संयुक्त कार्यक्रम शुरू होंगे।

3. व्यापार और अर्थव्यवस्था

मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए): दोनों देश वर्तमान में मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं और इस वर्ष इसके पूरा होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी और उनके इस्राइली समकक्ष इसकी आधारभूत शर्तें तय करेंगे।

निवेश और बुनियादी ढांचा: इस्राइल भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को अपने देश में निर्माण और निवेश करने के लिए न्योता दे रहा है। पिछले साल सितंबर में दोनों देशों ने निवेशकों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक नई द्विपक्षीय निवेश संधि पर भी हस्ताक्षर किए थे।

आर्थिक गलियारा: भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) को आगे बढ़ाने को लेकर भी मोदी-नेतन्याहू के बीच चर्चा होने की संभावना है। इसमें इस्राइल भी एक अहम हिस्सेदार है।

4. रणनीतिक और भू-राजनीतिक सहयोग

इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू कट्टरपंथी विरोधियों का सामना करने के लिए 'हेक्सागॉन गठबंधन' नाम का एक क्षेत्रीय गुट बनाने की योजना पर चर्चा कर सकते हैं। इसमें इस्राइल, भारत, ग्रीस, साइप्रस और कुछ अरब-अफ्रीकी देश शामिल होंगे। हालांकि, माना जा रहा है कि ईरान के साथ अपने अच्छे संबंधों को देखते हुए भारत इस प्रस्ताव पर सावधानी से कदम बढ़ाएगा। पीएम मोदी के इस्राइल दौरे पर कृषि, जल प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा में सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होगी। 

पीएम मोदी का इस्राइल दौरा क्यों अहम?

  • 7 अक्तूबर 2023 को हमास के हमले के बाद से दुनिया के काफी कम नेताओं ने इस्राइल का दौरा किया है। ऐसे में मोदी की यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
  • यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब कुछ ही दिन पहले भारत ने 100 से अधिक देशों के साथ मिलकर फलस्तीन के वेस्ट बैंक में इस्राइल के विस्तार की निंदा की थी।
  • माना जा रहा है कि पीएम मोदी की यात्रा में जो समझौते होंगे, वह दोनों देशों के रिश्तों को विशेष रणनीतिक संबंधों में बदल देंगे। 
  • पीएम मोदी इस्राइली संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, जो दर्शाता है कि 1992 के बाद से दोनों देशों के रिश्ते और गहरे हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे को इस्राइली नीतियों के समर्थन के रूप में देखा जाएगा।

नेतन्याहू इस दौरे को लेकर उत्साहित क्यों?

इस्राइल और हमास के बीच संघर्ष के बाद से इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को वैश्विक स्तर पर काफी आलोचनाएं झेलनी पड़ी हैं। उनके नाम पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) का वारंट भी है। ऐसे में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता का दौरा नेतन्याहू के लिए एक बड़ा समर्थन होगा।

दूसरी तरफ पीएम मोदी और नेतन्याहू के नेतृत्व में ही भारत और इस्राइल सबसे करीब आए हैं। भारत बीते वर्षों में इस्राइल के सबसे मजबूत गैर-पश्चिमी सहयोगी के रूप में उभरा है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक और वैचारिक समानताएं इस साझेदारी को और मजबूत बना रही हैं।

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