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Bangladesh: अवामी लीग के नेताओं की जमानत पर अदालत में वकीलों ने की बदसलूकी, मानवाधिकार संगठन ने की कड़ी निंदा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: अमन तिवारी Updated Wed, 25 Feb 2026 03:47 PM IST
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सार

बांग्लादेश के बारिशाल में अवामी लीग नेताओं को जमानत मिलने पर वकीलों ने कोर्ट में हंगामा और जज से बदसलूकी की। मानवाधिकार संगठन जेएमबीएफ ने इसे न्यायपालिका की आजादी पर हमला बताया है। संगठन ने हाई कोर्ट के जज से मामले की न्यायिक जांच कराने और दोषियों को सजा देने की मांग की है।

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बांग्लादेश का झंडा - फोटो : एएनआई
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विस्तार

बांग्लादेश के बारिशाल जिले की एक अदालत में अवामी लीग के कई नेताओं को जमानत दी गई। इसके बाद कोर्ट परिसर में कुछ वकीलों ने जमकर बदसलूकी की। पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन 'जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस' (जेएमबीएफ) ने इस घटना की कड़ी आलोचना की है। संगठन ने इसे लोकतंत्र, कानून के शासन और न्यायपालिका की आजादी पर सीधा हमला बताया है।
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जेएमबीएफ का आरोप है कि विपक्षी पार्टी बीएनपी से जुड़े वकीलों का व्यवहार बेहद निंदनीय था। ये वकील जबरदस्ती कोर्टरूम में घुस गए और बेंच के साथ धक्का-मुक्की की। उन्होंने जज के साथ भी बुरा बर्ताव किया। वकील उन पर चिल्ला रहे थे और उनकी तरफ उंगली दिखाकर दबाव बना रहे थे। यह घटना मंगलवार को अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एस. एम. शरियत उल्लाह की अदालत में हुई।
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संगठन के संस्थापक अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम ने कहा कि यह घटना न्यायपालिका की गरिमा और सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि फैसले से असहमति होने पर ऊपरी अदालत में अपील करनी चाहिए। कोर्ट को युद्ध का मैदान बनाना गलत है। और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। ये वकील बिना अपील या किसी सही प्रक्रिया को अपनाए जज पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे। कुल मिलाकर ये न्याय को प्रभावित करने की कोशिश थी।

मानवाधिकार संगठन ने मांग की है कि इस मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए। इसके लिए हाई कोर्ट के जज की अगुवाई में एक आयोग बनाया जाए। दोषियों की पहचान कर उन्हें पारदर्शी तरीके से सजा मिलनी चाहिए।  जेएमबीएफ ने कहा कि "कोर्टरूम में गैर-कानूनी तरीके से घुसना, बेंच पर मारपीट करना, जज पर उंगली उठाना और चिल्लाना, और न्यायिक कार्रवाई में रुकावट डालना" साफ तौर पर "कोर्ट की अवमानना" है और ये सजा के लायक अपराध हैं जिनसे उसी हिसाब से निपटना चाहिए।संगठन ने जोर दिया कि न्यायपालिका को बिना किसी बाहरी प्रभाव या दबाव के काम करने देना चाहिए।

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