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Islamabad US-Iran Talks: शांतिवार्ता से पहले अमेरिका-ईरान के नेताओं से मिले PM शहबाज, जानें कहां तक पहुंची बात

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Sat, 11 Apr 2026 06:34 PM IST
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सार

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता चल रही है। इसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। शहबाज शरीफ ने दोनों पक्षों से अलग-अलग मुलाकात की। ऐसे में आइए जानते हैं कि ईरान ने इस दौरान क्या शर्ते रखीं। अमेरिका फर्स्ट बनाम इस्राइल फर्स्ट विवाद क्या है और क्यों उभरा। जब्त संपत्तियों और युद्धविराम पर भी पूरी जानकारी जानेंगे। 

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पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद शनिवार को कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन गया। यहां अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता शुरू चल रही है। इसे मेक या ब्रेक माना जा रहा है। इस वार्ता से पहले और दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों से अलग-अलग मुलाकात की। ऐसे में आइए जानते हैं कि बातचीत कब शुरू हुई और इस पर अब तक क्या अपडेट है।
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शनिवार सुबह ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में अपने ठिकाने से प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचा और औपचारिक वार्ता शुरू हुई। ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची मौजूद रहे। वहीं अमेरिकी टीम का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। वार्ता 8 अप्रैल को घोषित युद्धविराम के बाद हो रही है और इसका उद्देश्य हिंसा को रोककर स्थायी समाधान निकालना है।
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दोनों पक्षों से अलग-अलग बातचीत
शहबाज शरीफ ने पहले ईरानी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और फिर अमेरिकी टीम से अलग से बातचीत की। उनके साथ उप प्रधानमंत्री इशाक डार, सेना प्रमुख आसिम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहेगा।

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ईरान ने वार्ता से पहले क्या शर्तें रख दीं?
ईरान ने बातचीत से पहले चार बड़ी शर्तें रखीं। इनमें होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरा नियंत्रण, युद्ध का मुआवजा, जब्त संपत्तियों की रिहाई और पूरे पश्चिम एशिया में स्थायी युद्धविराम शामिल हैं। ये शर्तें वार्ता को और जटिल बना रही हैं और समझौते की राह आसान नहीं दिख रही है।

बिंदुवार तरकी से समझें वार्ता में क्या-क्या हुआ?
  • पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच 50 साल में पहली बार सीधी उच्च स्तरीय बातचीत शुरू हुई।
  • इस्लामाबाद में हुई पहली बैठक करीब 2 घंटे चली, जिसमें दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल हुए।
  • अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि ईरानी पक्ष की अगुवाई संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने की।
  • अमेरिका ने साफ किया कि वह ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देगा और होर्मुज पर साझा नियंत्रण चाहता है।
  • बातचीत के दौरान विरोधाभासी दावे सामने आए। कुछ रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका संपत्तियां छोड़ने को तैयार है, लेकिन व्हाइट हाउस ने इससे इनकार किया।
  • वार्ता के बीच भी इस्राइल ने लेबनान में हिजबुल्ला के 200 से ज्यादा ठिकानों पर हमले जारी रखे।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना होर्मुज को सुरक्षित करने में लगी है।
  • ईरान ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका “अमेरिका फर्स्ट” नीति पर काम करेगा तो समझौता संभव है, लेकिन इस्राइल फर्स्ट हुआ तो कोई डील नहीं होगी।

बातचीत में मुख्य मुद्दे रहे-
  • ईरान की जब्त संपत्तियों की रिहाई।
  • लेबनान में युद्धविराम।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना।

ईरान की ये चार बड़ी शर्तें रखीं
  • संपत्तियां वापस चाहिए।
  • युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा।
  • लेबनान पर भी समझौता हो।
  • होर्मुज पर नियंत्रण हो।

क्या जब्त संपत्तियों पर बन रही है सहमति?
एक ईरानी सूत्र ने दावा किया कि अमेरिका दबाव के बाद ईरान की फंसी संपत्तियां जारी करने पर सहमत हुआ है। हालांकि इस पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। भरोसे की कमी दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

इस्राइल फर्स्ट बनाम अमेरिका फर्स्ट विवाद क्या?
ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा आरिफ ने कहा कि अगर बातचीत अमेरिका फर्स्ट सोच से होगी तो समझौता संभव है। लेकिन इस्राइल फर्स्ट नीति हावी रही तो कोई डील नहीं होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि वार्ता विफल होने पर दुनिया को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

क्या जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण हैं?
इस बीच इस्राइल ने हिजबुल्लाह के साथ युद्धविराम वार्ता से इनकार कर दिया है, हालांकि लेबनान के साथ बातचीत पर सहमति बनी है। इससे साफ है कि जमीन पर हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं और संघर्ष का खतरा टला नहीं है।

क्या संघर्ष की शुरुआत ने बढ़ाया संकट?
फरवरी में अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद हालात बिगड़े थे, जिसके जवाब में ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की थी। इसके बाद दो हफ्ते का संघर्षविराम लागू हुआ, लेकिन लेबनान में जारी हमलों ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक अगले 48 घंटे बेहद अहम हैं। इसी दौरान तय होगा कि यह वार्ता स्थायी शांति में बदलेगी या फिर संघर्ष और बढ़ेगा। पूरी दुनिया इस बैठक के नतीजे का इंतजार कर रही है।

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