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इस्राइल में भी खुफिया जानकारी लीक?: प्रधानमंत्री के करीबी पर शिकंजा, जानें कौन से दस्तावेज लीक करने का आरोप

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 28 May 2026 07:13 PM IST
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सार

इस्राइल की सियासत में नया तूफान क्यों उठ गया है? पीएम नेतन्याहू के करीबी पर गुप्त जानकारी लीक करने का गंभीर आरोप लगा है, जिससे देश की सुरक्षा और सत्ता दोनों सवालों के घेरे में आ गए हैं।

Israeli PM Netanyahu Aide to Be Charged Over Alleged Leak of Classified Information Endangering State Security
नेतन्याहू के करीबी पर गिरी गाज - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार

इस्राइल की राजनीति एक बार फिर बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है, जहां प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के करीबी सलाहकार पर गंभीर आरोप लगे हैं। अटॉर्नी जनरल ने आरोप लगाया है कि सलाहकार ने गुप्त सैन्य दस्तावेज एक विदेशी मीडिया को लीक किए, जिससे देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। इस मामले ने न केवल सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विपक्ष को भी हमलावर होने का मौका दे दिया है। जांच एजेंसियां अब इस हाई-प्रोफाइल केस में आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही हैं। इस फैसले ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि आने वाले चुनावों से पहले नेतन्याहू सरकार की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं।



गुप्त जानकारी लीक करने का आरोप
अटॉर्नी जनरल कार्यालय के अनुसार, सलाहकार जोनाथन उरिच पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2024 में एक जर्मन अखबार को अत्यंत संवेदनशील और वर्गीकृत दस्तावेज उपलब्ध कराए। आरोप यह भी है कि इस जानकारी का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ हासिल करने और गाजा युद्ध के दौरान हमास के साथ विफल बातचीत को लेकर प्रधानमंत्री नेतन्याहू की छवि को बचाने के प्रयास में किया गया। इसके अलावा उरिच पर गोपनीय दस्तावेज रखने और सबूत नष्ट करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए जाने की तैयारी है।
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सरकार और आरोपों पर विवाद
इस मामले पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, उरिच के वकीलों ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि यह निर्णय तथ्यों से परे और गलत व्याख्या पर आधारित है। वहीं, उरिच ने सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि यह आश्चर्य की बात है कि अटॉर्नी जनरल ने इस मामले में मौत की सजा की मांग नहीं की।
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प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनके करीबी सहयोगियों का लगातार यह कहना रहा है कि वे एक राजनीतिक साजिश का शिकार हैं। उनका आरोप है कि न्यायिक तंत्र और मीडिया मिलकर उनके खिलाफ एक विच हंट चला रहे हैं। हालांकि, अटॉर्नी जनरल कार्यालय ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि औपचारिक अभियोजन कब दर्ज किया जाएगा, लेकिन यह कदम कानूनी प्रक्रिया के तहत सामान्य माना जाता है।

पहले से ही घिरे हैं विवादों में
यह मामला नेतन्याहू सरकार के लिए एक और राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि प्रधानमंत्री पहले से ही भ्रष्टाचार के कई मामलों का सामना कर रहे हैं और उनकी सरकार में भी अस्थिरता बनी हुई है। उरिच के एक पूर्व सहयोगी एली फेल्डस्टीन पहले से ही कतरगेट मामले में जांच और मुकदमे का सामना कर रहे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने 7 अक्तूबर 2023 को हुए हमास हमले के बाद कतर जैसे देश से वित्तीय संबंधों के जरिए इस्राइल में उसकी छवि सुधारने का प्रयास किया था। यह मामला भी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी प्रभाव से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

इस्राइल में विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर बताया है। उनका कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्ता के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। वहीं सरकार के आलोचकों का दावा है कि नेतन्याहू के करीबी घेरे में लंबे समय से चल रहे विवाद अब खुलकर सामने आ रहे हैं।

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