AI-क्लाउड में बड़ा दांव: अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट के 15 नए डेटा सेंटर को मंजूरी; भारत समेत दुनिया पर पड़ेगा असर
माइक्रोसॉफ्ट ने अमेरिका में 15 नए डेटा सेंटरों को मंजूरी दी। परियोजनाओं का मूल्य 13 अरब डॉलर से अधिक है। भारत समेत दुनिया भर में क्लाउड और एआई सेवाओं पर इसका असर पड़ेगा।
विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच माइक्रोसॉफ्ट ने अमेरिका में अपने डाटा सेंटर नेटवर्क के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। विस्कॉन्सिन राज्य के माउंट प्लेजेंट गांव में पूर्व फॉक्सकॉन औद्योगिक स्थल के पास 15 नए डाटा सेंटरों की योजना को स्थानीय प्रशासन से सर्वसम्मत मंजूरी मिल गई है। यह फैसला केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर भारत सहित उन सभी देशों पर पड़ेगा जहां माइक्रोसॉफ्ट के क्लाउड, एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का व्यापक उपयोग होता है।
माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, गूगल व ओरेकल जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियां इस समय एआई आधारित सेवाओं के लिए विशाल डाटा सेंटर तैयार करने की होड़ में हैं। इन केंद्रों में एनवीडिया चिप्स का इस्तेमाल कर बड़े जनरेटिव एआई मॉडल को प्रशिक्षित व संचालित किया जाता है। माउंट प्लेजेंट में अतिरिक्त डाटा सेंटर क्षमता माइक्रोसॉफ्ट को ओपनएआई व अन्य वैश्विक ग्राहकों से पहले से बुक किए गए राजस्व को औपचारिक रूप से मान्यता देने में मदद करेगी।
भारत में एआई स्टार्टअप्स, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल गवर्नेंस से जुड़े उपयोगकर्ताओं के लिए यह विस्तार अप्रत्यक्ष रूप से सेवाओं की स्थिरता और स्केल को मजबूत करेगा। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक प्रस्तावित डाटा सेंटर विकास परियोजनाओं का कुल करयोग्य मूल्य 13 अरब डॉलर से अधिक है। यह आंकड़ा संकेत देता है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर अब सिर्फ तकनीकी जरूरत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति बन चुका है।
फॉक्सकॉन के अनुभव से सीखा सबक
माउंट प्लेजेंट का यह इलाका पहले भी वैश्विक सुर्खियों में रह चुका है। साल 2017 में फॉक्सकॉन ने यहां 10 अरब डॉलर की फैक्ट्री और 13,000 नौकरियों का वादा किया था, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी समर्थन दिया था। इसके लिए गांव ने जमीन खरीदी और राज्य के करदाताओं के पैसे से बुनियादी ढांचा तैयार किया गया। लेकिन योजना पूरी तरह साकार नहीं हो सकी। 2023 तक फॉक्सकॉन ने पूरे विस्कॉन्सिन में केवल 1,000 लोगों को रोजगार दिया और गांव पर 250 मिलियन डॉलर से अधिक का वित्तीय बोझ आ गया। इसी पृष्ठभूमि में माइक्रोसॉफ्ट की परियोजना को अधिक यथार्थवादी और स्थायी निवेश के रूप में देखा जा रहा है।
परियोजना का स्वरूप और तकनीकी महत्व
माइक्रोसॉफ्ट का नया विस्तार उसके मौजूदा डेटा सेंटर परिसर के उत्तर-पश्चिम में स्थित दो भूखंडों पर प्रस्तावित है। बड़े भूखंड के लिए कंपनी ने 2023 और 2024 में गांव और निजी भूमि मालिकों से जमीन खरीदी। दोनों योजनाओं में लगभग 9 मिलियन वर्ग फुट का निर्माण क्षेत्र और तीन सबस्टेशन शामिल हैं, जो उच्च क्षमता वाली बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।
भारत के लिए क्यों अहम है यह खबर
- भारत में माइक्रोसॉफ्ट की क्लाउड सेवाएं, एआई टूल्स और एंटरप्राइज सॉल्यूशंस तेजी से अपनाए जा रहे हैं। अमेरिका में डेटा सेंटर क्षमता का विस्तार वैश्विक नेटवर्क को मजबूत करता है, जिससे भारतीय कंपनियों, सरकारी परियोजनाओं और स्टार्टअप्स को अधिक भरोसेमंद और स्केलेबल डिजिटल सेवाएं मिल सकती हैं। यही वजह है कि माइक्रोसॉफ्ट की हर बड़ी गतिविधि पर भारत सहित दुनिया भर की नजर रहती है।
- भारत जैसे उभरते डिजिटल बाजारों में भी इसी तरह के निवेश मॉडल पर नजर रखी जा रही है। दुनिया भर में डाटा सेंटरों के लिए उपयुक्त स्थान खोजना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। भारी ऊर्जा जरूरतों के कारण कई बार यूटिलिटी कंपनियां आवश्यक सप्लाई देने में असमर्थ होती हैं। साथ ही, स्थानीय समुदायों में पर्यावरण और संसाधनों को लेकर विरोध भी बढ़ रहा है।
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