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Iran War: ओवल ऑफिस में एक गुप्त बैठक और टूट गया युद्धविराम, आखिर किस बात ने नाराज ट्रंप ने दिया हमले का आदेश?
Fri, 10 Jul 2026 12:44 PM IST
नितिन गौतम
पीटीआई, अमर उजाला
पीटीआई, अमर उजाला
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 10 Jul 2026 12:44 PM IST
सार
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम हो गया था, लेकिन अचानक ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम तोड़ते हुए ईरान पर हमले का आदेश दे दिया। ट्रंप ने ईरान पर युद्धविराम समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि ट्रंप ने सीधे ईरान पर हमले का आदेश दे दिया। एक मीडिया रिपोर्ट में इसे लेकर बड़ा खुलासा किया गया है।
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डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
अमेरिका और ईरान बीच शांति समझौता लंबे समय की बातचीत का नतीजा था और इसे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना गया था। हालांकि युद्धविराम के महज दो सप्ताह बाद ही आखिर ऐसा क्या हुआ कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ईरान पर हमले का आदेश दे दिया? वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप के नाटो सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अंकारा रवाना होने से पहले ओवल ऑफिस में एक गुप्त बैठक हुई। इस बैठक के बाद अमेरिका ने अपनी रणनीति पूरी तरह से बदलते हुए ईरान पर फिर से हमले करने का फैसला किया।
होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले से नाराज हुए ट्रंप
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान के हमलों से जुड़ी नई खुफिया जानकारी मिलने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप समझ गए कि तेहरान युद्धविराम समझौते का पालन नहीं कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के विमान एयर फोर्स वन के अंकारा पहुंचने तक व्हाइट हाउस ने समझौते से पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
ट्रंप के तुर्किए रवाना होने से पहले ही हमले को लेकर हो गया था फैसला
रिपोर्ट में कहा गया है कि सोमवार शाम ट्रंप के तुर्किए रवाना होने से ठीक पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ओवल ऑफिस पहुंचे। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने राष्ट्रपति को जानकारी दी कि ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी समुद्री मार्ग से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों पर एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया है। कुछ ही घंटों के भीतर तीन जहाजों को निशाना बनाए जाने की खबर है, जिनमें एक एलएनजी टैंकर भी शामिल था।
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बैठक में क्या हुआ?
रिपोर्ट के अनुसार, इस खुफिया ब्रीफिंग से ट्रंप बेहद नाराज हो गए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ईरान वास्तव में स्थायी समझौते को लेकर गंभीर है? राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद ट्रंप इस फैसले पर पहुंचे कि तेहरान अब ईमानदारी से समझौते का पालन नहीं कर रहा। इस फैसले को ईरान को लेकर वॉशिंगटन की रणनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसके कुछ ही घंटों के भीतर ट्रंप प्रशासन ने अंतरिम शांति समझौते के तहत ईरान को दी गई कई रियायतें वापस लेना शुरू कर दिया।
व्हाइट हाउस ने तुरंत ईरान को तेल बेचने की अनुमति रद्द कर दी, हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी ठिकानों पर लगातार सैन्य हमलों को मंजूरी दी और चेतावनी दी कि यदि तनाव जारी रहा तो नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने विशेष रूप से पानी साफ करने वाले संयंत्रों और बिजली प्रतिष्ठानों पर हमले की चेतावनी दी, हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ऐसे कदम उठाने की नौबत नहीं आएगी।
ट्रंप ने ईरानी प्रशासन को बताया धोखेबाज
अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने साफ कहा कि अब उन्हें नहीं लगता कि यह कूटनीतिक समझौता आगे टिक पाएगा। उन्होंने कहा, 'मेरे हिसाब से यह समझौता खत्म हो चुका है। मैं अब उनसे कोई बातचीत नहीं करना चाहता। वे झूठे हैं, धोखेबाज हैं और बेहद खराब लोग हैं।'
ईरान ने अमेरिका पर लगाए ये आरोप
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। एक ईरानी राजनयिक ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा कि अमेरिका ने तेहरान से समन्वय किए बिना हॉर्मुज जलडमरूमध्य में एकतरफा समुद्री मार्ग स्थापित कर समझौते का उल्लंघन किया। राजनयिक का कहना था कि यह कदम दोनों पक्षों के बीच हुए सहमति पत्र (एमओयू) का उल्लंघन था और इसी कारण उस मार्ग का उपयोग करने वाले जहाजों के खिलाफ ईरान की कार्रवाई सही थी।
आरोप है कि, अमेरिकी नौसेना पिछले कई सप्ताह से ओमान के तट के साथ दक्षिणी समुद्री मार्ग से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की गोपनीय रूप से मदद कर रही थी। अमेरिकी निगरानी में 125 से अधिक जहाज इस मार्ग से सुरक्षित गुजर चुके थे। बताया गया कि मुख्य रूप से रात के समय जहाजों को निकाला गया और इस दौरान जहाजों ने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एआईएस) बंद रखे और नौसैनिक जहाजों तथा शिपिंग ऑपरेटरों के साथ सीधे रेडियो संपर्क में रहे।
अमेरिका की धमकी- वे जहाजों पर गोली चलाएंगे तो हम करारा जवाब देंगे
अमेरिकी सेना ने दो दिनों के भीतर ईरान के 170 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी कि यदि परिस्थितियां बनी रहीं तो सैन्य अभियान का दायरा और बढ़ाया जाएगा तथा अमेरिका और अधिक तथा और गहराई तक हमले करेगा। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी मिलवॉकी में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान प्रशासन के कड़े रुख को दोहराया। उन्होंने कहा, 'संदेश बिल्कुल साफ है। अगर वे जहाजों पर गोली चलाएंगे, तो हम उन्हें करारा जवाब देंगे।'
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होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले से नाराज हुए ट्रंप
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान के हमलों से जुड़ी नई खुफिया जानकारी मिलने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप समझ गए कि तेहरान युद्धविराम समझौते का पालन नहीं कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के विमान एयर फोर्स वन के अंकारा पहुंचने तक व्हाइट हाउस ने समझौते से पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
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ट्रंप के तुर्किए रवाना होने से पहले ही हमले को लेकर हो गया था फैसला
रिपोर्ट में कहा गया है कि सोमवार शाम ट्रंप के तुर्किए रवाना होने से ठीक पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ओवल ऑफिस पहुंचे। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने राष्ट्रपति को जानकारी दी कि ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी समुद्री मार्ग से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों पर एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया है। कुछ ही घंटों के भीतर तीन जहाजों को निशाना बनाए जाने की खबर है, जिनमें एक एलएनजी टैंकर भी शामिल था।
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बैठक में क्या हुआ?
रिपोर्ट के अनुसार, इस खुफिया ब्रीफिंग से ट्रंप बेहद नाराज हो गए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ईरान वास्तव में स्थायी समझौते को लेकर गंभीर है? राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद ट्रंप इस फैसले पर पहुंचे कि तेहरान अब ईमानदारी से समझौते का पालन नहीं कर रहा। इस फैसले को ईरान को लेकर वॉशिंगटन की रणनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसके कुछ ही घंटों के भीतर ट्रंप प्रशासन ने अंतरिम शांति समझौते के तहत ईरान को दी गई कई रियायतें वापस लेना शुरू कर दिया।
व्हाइट हाउस ने तुरंत ईरान को तेल बेचने की अनुमति रद्द कर दी, हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी ठिकानों पर लगातार सैन्य हमलों को मंजूरी दी और चेतावनी दी कि यदि तनाव जारी रहा तो नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने विशेष रूप से पानी साफ करने वाले संयंत्रों और बिजली प्रतिष्ठानों पर हमले की चेतावनी दी, हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ऐसे कदम उठाने की नौबत नहीं आएगी।
ट्रंप ने ईरानी प्रशासन को बताया धोखेबाज
अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने साफ कहा कि अब उन्हें नहीं लगता कि यह कूटनीतिक समझौता आगे टिक पाएगा। उन्होंने कहा, 'मेरे हिसाब से यह समझौता खत्म हो चुका है। मैं अब उनसे कोई बातचीत नहीं करना चाहता। वे झूठे हैं, धोखेबाज हैं और बेहद खराब लोग हैं।'
ईरान ने अमेरिका पर लगाए ये आरोप
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। एक ईरानी राजनयिक ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा कि अमेरिका ने तेहरान से समन्वय किए बिना हॉर्मुज जलडमरूमध्य में एकतरफा समुद्री मार्ग स्थापित कर समझौते का उल्लंघन किया। राजनयिक का कहना था कि यह कदम दोनों पक्षों के बीच हुए सहमति पत्र (एमओयू) का उल्लंघन था और इसी कारण उस मार्ग का उपयोग करने वाले जहाजों के खिलाफ ईरान की कार्रवाई सही थी।
आरोप है कि, अमेरिकी नौसेना पिछले कई सप्ताह से ओमान के तट के साथ दक्षिणी समुद्री मार्ग से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की गोपनीय रूप से मदद कर रही थी। अमेरिकी निगरानी में 125 से अधिक जहाज इस मार्ग से सुरक्षित गुजर चुके थे। बताया गया कि मुख्य रूप से रात के समय जहाजों को निकाला गया और इस दौरान जहाजों ने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एआईएस) बंद रखे और नौसैनिक जहाजों तथा शिपिंग ऑपरेटरों के साथ सीधे रेडियो संपर्क में रहे।
अमेरिका की धमकी- वे जहाजों पर गोली चलाएंगे तो हम करारा जवाब देंगे
अमेरिकी सेना ने दो दिनों के भीतर ईरान के 170 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी कि यदि परिस्थितियां बनी रहीं तो सैन्य अभियान का दायरा और बढ़ाया जाएगा तथा अमेरिका और अधिक तथा और गहराई तक हमले करेगा। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी मिलवॉकी में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान प्रशासन के कड़े रुख को दोहराया। उन्होंने कहा, 'संदेश बिल्कुल साफ है। अगर वे जहाजों पर गोली चलाएंगे, तो हम उन्हें करारा जवाब देंगे।'