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'ढह चुका है पाकिस्तान का सिस्टम': गृह मंत्री मोहसिन नकवी का कबूलनामा; क्यों कही यह बात?

Fri, 31 Jul 2026 08:57 AM IST
राकेश कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला। Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 31 Jul 2026 08:57 AM IST
सार

पाकिस्तान के गृह मंत्री ने सार्वजनिक मंच से देश की शासन-व्यवस्था के पूरी तरह ढहने का सच स्वीकार किया है और नए प्रांत बनाने की मांग की है। उन्होंने और क्या-क्या कहा है? जानिए
 

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Pakistan Political Crisis governance collapse mohsin naqvi statement
मोहसिन नकवी, गृह मंत्री, पाकिस्तान - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने देश की बदहाल स्थिति पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि पाकिस्तान की मौजूदा शासन-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और अब यह देश की चुनौतियों से निपटने में सक्षम नहीं है। इस्लामाबाद में आयोजित पहले 'पाकिस्तान इकोनॉमिक समिट' को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि जिस व्यवस्था में हम रह रहे हैं, वह ढह चुकी है। मानो या न मानो आप इस व्यवस्था को 70 साल से घसीट रहे हैं, और जबकि हम सब लोकतंत्र चाहते हैं, लोकतंत्र के अंदर कई रूप होते हैं। मौजूदा व्यवस्था के जरिए समस्याएं हल नहीं हो सकतीं। ”
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क्या प्रशासनिक सुधारों से बदलेगी पाकिस्तान की तस्वीर?
गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने देश में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक सुधारों की वकालत की है। उन्होंने नए प्रशासनिक निकायों और नई इकाइयों के गठन पर जोर दिया। नकवी की यह मांग पाकिस्तान के कई प्रमुख राजनीतिक दलों की उस पुरानी मांग से मेल खाती है, जिसमें बेहतर शासन संचालन के लिए देश में अधिक प्रांत बनाने की बात कही जाती रही है। नकवी के इस बयान से साफ है कि पाकिस्तान का शीर्ष नेतृत्व भी अब यह मानने लगा है कि मौजूदा ढर्रे पर देश को आगे चलाना नामुमकिन है।
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रिकॉर्ड कर्ज का बोझ और विदेशी मुद्रा भंडार का संकट
पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण आर्थिक दौर से गुजर रहा है। देश का कुल विदेशी कर्ज लगभग 137 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है, जिसमें आईएमएफ का ही 8.8 अरब डॉलर है। यह कुल सरकारी कर्ज जीडीपी का करीब 70% से 80% तक पहुंच गया है। हालत यह है कि पाकिस्तान सरकार के बजट का एक बड़ा हिस्सा (लगभग दो-तिहाई) केवल पुराने कर्जों का ब्याज चुकाने में ही चला जाता है। देश के पास विदेशी मुद्रा भंडार इतना कम बचा है कि वह बिना किसी बाहरी वित्तीय मदद के कुछ महीनों का आयात भी नहीं संभाल सकता। 
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IMF और मित्र देशों पर पूरी निर्भरता
पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को वेंटिलेटर से बाहर निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की शरण में जाने के लिए मजबूर है। आजादी से लेकर अब तक पाकिस्तान 25 बार आईएमएफ से बेलआउट पैकेज (कर्ज) ले चुका है। आईएमएफ की सख्त शर्तों (जैसे टैक्स बढ़ाना, बिजली-ईंधन के दाम बढ़ाना और सब्सिडी खत्म करना) के कारण देश में आम जनता भारी महंगाई झेल रही है। इसके अलावा, सऊदी अरब, चीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे मित्र देशों से बार-बार रोलोवर (पुराने कर्ज की मियाद बढ़ाना) और नकद जमा मांगकर देश का कामकाज चलाया जा रहा है।

प्रशासनिक नाकामी और ढांचागत बदहाली
गृह मंत्री नकवी के बयान का दूसरा पहलू प्रशासनिक नाकामी से जुड़ा है। 70 साल पुराना केंद्रीय ढांचा न तो सही तरीके से टैक्स वसूल पा रहा है और ना ही सुरक्षा व बुनियादी सुविधाएं दे पा रहा है। देश का कर-से-जीडीपी अनुपात मात्र 10-11% के आसपास अटका हुआ है। भ्रष्टाचार, लालफीताशाही, और संसाधनों के अनुचित वितरण के कारण शासन व्यवस्था चरमरा गई है। इसी वजह से राजनीतिक स्तर पर छोटे प्रशासनिक ब्लॉक और नए प्रांत बनाने की मांग उठ रही है ताकि शासन को सही तरीके से चलाया जा सके।
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