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India-Estonia Ties: अलार करिस की भारत यात्रा, भारत-एस्टोनिया की डिजिटल सभ्यताएं बनेंगी शासन का वैश्विक मॉडल

Rajkishor राजकिशोर
Updated Fri, 02 Jan 2026 05:19 AM IST
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सार

India-Estonia Ties: एस्टोनिया और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी की नई परतें खुल रही हैं, तो इसके केंद्र में केवल रक्षा सौदे नहीं, बल्कि शासन की एक नई सोच है। इस सोच में बड़ा-छोटा नहीं, बल्कि प्रभावी और उपयोगी होना अहम है।

Prez Alar Karis India visit, India-Estonia's digital civilizations will become a global model of governance
पीएम मोदी और अलार करिस (फाइल फोटो) - फोटो : X @narendramodi
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विस्तार

भारत और एस्टोनिया के बीच का संवाद केवल दो देशों की मुलाकात नहीं, बल्कि दो डिजिटल सभ्यताओं का संगम है। एस्टोनिया की कहानी उसका हासिल भर नहीं है बल्कि यह है कि उसने राज्य को दुरूह शासन प्रणाली देने के बजाय सहज-निर्णायक व्यवस्था देने का साहस दिखाया। आज जब भारत स्केल यानी विस्तार की चुनौतियों से जूझ रहा है और एस्टोनिया प्रिसिजन मतलब सटीकता का वैश्विक मानक बन चुका है, तब राष्ट्रपति अलार करिस की भारत यात्रा शासन और सुरक्षा के उस नए व्याकरण को जन्म दे रही है, जहां डेटा ही नई सीमा है और एआई नया रक्षक। यूरोप के मानचित्र पर एक छोटा सा देश होने के बावजूद एस्टोनिया ने वह कर दिखाया है, जिसके लिए दुनिया के बड़े देश आज भी संघर्ष कर रहे हैं।
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तकनीक ही राज्य का ढांचा
यूरोप के कई देशों ने डिजिटल गवर्नेंस को अपनाया तो सही, लेकिन उसे कानूनी जटिलताओं और नौकरशाही की असुरक्षा में उलझा दिया। वहां तकनीकी शासन के ऊपर एक अतिरिक्त परत बनकर रह गई। इसके विपरीत, एस्टोनिया ने तकनीक को सुधार नहीं, बल्कि राज्य का बुनियादी ढांचा बना दिया। एस्टोनिया ने एक ऐसी डिजिटल संस्कृति विकसित की जहां नागरिक और राज्य के बीच अविश्वास की दीवार को गिरा दिया गया। यहां डिजिटल पहचान और डेटा-साझाकरण का मतलब नागरिकों पर निगरानी रखना नहीं, बल्कि उन्हें प्रशासनिक बोझ से मुक्त करना है। 

शिक्षा और नागरिक बोध, भविष्य की नींव
एस्टोनिया का सबसे दूरदर्शी फैसला स्कूलों में कोडिंग और डिजिटल साक्षरता को अनिवार्य बनाना था। उन्होंने बच्चों को कोडिंग इसलिए नहीं सिखाई कि वे केवल सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनें, बल्कि इसलिए ताकि वे एक सक्षम नागरिक बन सकें जो सिस्टम की बारीकियों को समझते हों। नतीजा, आज की पीढ़ी तकनीक से डरती नहीं, बल्कि उसे संचालित करती है।

सुरक्षित होगा डिजिटल विश्व
इस वैचारिक पृष्ठभूमि के बीच, एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार करिस की भारत में ग्लोबल एआई समिट के लिए उपस्थिति एक बड़ा रणनीतिक संदेश है। राष्ट्रपति करिस की यात्रा यह रेखांकित करेगी कि कैसे दो डिजिटल शक्तियां, एक जिसके पास दुनिया का सबसे बड़ा डेटा और ‘स्केल’ है और दूसरी जिसके पास सटीकता है, वे मिलकर रक्षा और शासन का नया वैश्विक पावर कॉरिडोर बना सकते हैं। यह मुलाकात केवल द्विपक्षीय वार्ता नहीं, बल्कि दो ऐसी संस्कृतियों का मिलन है जो भविष्य के डिजिटल विश्व को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने का संकल्प रखती हैं।

'एस्टोनिया की ‘डिजिटल राष्ट्र’ के रूप में पहचान और भारत का विशाल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एक-दूसरे के लिए स्वाभाविक पूरक हैं। यह साझेदारी केवल तकनीक का आदान-प्रदान नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लोकतांत्रिक शासन के लिए एक सुरक्षित और पारदर्शी ढांचा तैयार करने की साझा प्रतिबद्धता है।' - आशीष सिन्हा, एस्टोनिया में भारत के राजदूत

'हम भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक ‘प्रमुख रणनीतिक साझेदार’ के रूप में देखते हैं। एआई और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में हमारा सहयोग वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए ‘ट्रस्टेड कनेक्टिविटी’ के विचार को और अधिक मजबूत करेगा।' - मार्गुस साहक्ना, एस्टोनियाई विदेश मंत्री

मोदी फैक्टर: तकनीक ही है हमारी क्षमता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने टेक्नोलॉजी को केवल एक राजनीतिक नारे की तरह नहीं, बल्कि स्टेट कैपेसिटी यानी राज्य की क्षमता बढ़ाने के साधन के रूप में देखा है। भारत और एस्टोनिया के बीच बढ़ता संवाद इसी साझा दर्शन पर टिका है। यहां एआई और डिजिटल को नवाचार नहीं, बल्कि गवर्नेंस इंफ्रास्ट्रक्चर माना जा रहा है। यह साझेदारी केवल स्टार्टअप्स या ऐप्स तक सीमित नहीं है, यह इस बुनियादी सवाल पर टिकी है कि एक आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य अपने नागरिकों के भरोसे पर तकनीक के जरिए कैसे खरा उतरे।

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एस्टोनियाई मॉडल और भारत के लिए संभावनाएं
  • वन्स-ओनली सिद्धांत - एस्टोनिया में नागरिक को अपनी जानकारी सरकार को केवल एक बार देनी पड़ती है। भारत में इसे लागू करने से विभिन्न मंत्रालयों के बीच फाइलों का चक्कर खत्म हो सकता है।
  • डेटा एम्बेसी - एस्टोनिया ने युद्ध जैसी स्थिति के लिए दूसरे देशों में डिजिटल बैकअप बनाए हैं। भारत अपनी डिजिटल संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए इस ‘डिजिटल संदूक’ की अवधारणा को अपना सकता है।
  • प्रशासनिक एआई - एस्टोनियाई मॉडल से भारत यह सीख सकता है कि कैसे एआई का उपयोग भ्रष्टाचार मिटाने और नौकरशाही की देरी को पहचानने के लिए एक ‘बैकएंड वॉचडॉग’ के रूप में किया जाए।

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