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अंतरिक्ष से आया भारत-रूस दोस्ती का संदेश: हाथ में थामा तिरंगा, ISS से रूसी दल ने दी स्वतंत्रता दिवस की बधाई
Mon, 10 Aug 2026 04:56 PM IST
Devesh Tripathi
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 10 Aug 2026 04:56 PM IST
सार
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने भारतीयों के लिए विशेष संदेश जारी किया। तिरंगा हाथ में लेकर उन्होंने दोनों देशों के पुराने अंतरिक्ष सहयोग और साझा उपलब्धियों को याद किया। संदेश में यूरी गागरिन की भारत यात्रा, आर्यभट्ट उपग्रह के प्रक्षेपण और राकेश शर्मा की अंतरिक्ष यात्रा का जिक्र किया गया।
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रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने याद किया गागरिन से गगनयान तक का सफर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के बीच अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर मौजूद रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने भारतीयों को खास शुभकामनाएं दीं। उन्होंने हाथ में तिरंगा लेकर भारत और रूस के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को रेखांकित किया।
एक वीडियो संदेश में रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने भारत को बधाई दी। इसमें मॉस्को तथा नई दिल्ली के बीच दशकों से चले आ रहे सहयोग को याद किया गया। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र को दोनों देशों के संबंधों का अहम आधार बताया।
रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने दिया क्या संदेश?
अंतरिक्ष यात्री प्योत्र दुब्रोव ने कहा, "प्रिय दोस्तों, आज भारत गणराज्य अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है।" उन्होंने भारतीय लोगों के लिए शांति और समृद्धि की कामना की। रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने स्वतंत्रता दिवस को मानव अंतरिक्ष उड़ान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि इस साल सोवियत अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिन के अंतरिक्ष में जाने के 65 साल भी पूरे हो रहे हैं। गागरिन अंतरिक्ष में जाने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति थे।
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गागरिन नवंबर 1961 में भारत आए थे। वह भारत और सोवियत संघ के बीच मजबूत होते संबंधों के शुरुआती प्रतीकों में शामिल रहे। रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने भारत के बारे में उनकी चर्चित टिप्पणी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा था कि भारत अंतरिक्ष से खूबसूरत दिखाई देता है, लेकिन धरती पर यह "सच्चे दोस्तों" का घर होने के कारण और भी खूबसूरत है।
भारत-रूस साझेदारी और अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा का किया जिक्र
रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने भारत-रूस के अंतरिक्ष सहयोग के लंबे इतिहास का भी जिक्र किया। यह सहयोग 1975 में सोवियत संघ द्वारा आर्यभट्ट, भारत के पहले उपग्रह, के प्रक्षेपण के साथ शुरू हुआ था। इसके करीब एक दशक बाद 1984 में राकेश शर्मा सोवियत अंतरिक्ष यान सोयुज टी-11 से अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने। इस उपलब्धि ने दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत किया।
अंतरिक्ष यात्री अन्ना किकिना ने कहा कि भारत और रूस की साझेदारी अब भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के साथ एक नए चरण में पहुंच गई है। गगनयात्री के नाम से जाने जाने वाले भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों ने देश के पहले मानवयुक्त मिशन की तैयारी के लिए रूस के यूरी गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण लिया है।
रूसी दल बोला- भारत-रूस की दोस्ती जिंदाबाद
संदेश में अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ावा देने के लिए रोसकॉसमॉस, भारत में उसके कार्यालय और इसरो की ओर से आयोजित संयुक्त प्रतियोगिता का भी जिक्र किया गया। प्रतियोगिता में विजेता प्रविष्टियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं के साथ प्रदर्शित किया गया। अंतरिक्ष स्टेशन पर भारतीय तिरंगा लहराते हुए अंतरिक्ष यात्री आंद्रे फेद्यायेव ने कहा, "भारत-रूस की दोस्ती जिंदाबाद।"
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एक वीडियो संदेश में रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने भारत को बधाई दी। इसमें मॉस्को तथा नई दिल्ली के बीच दशकों से चले आ रहे सहयोग को याद किया गया। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र को दोनों देशों के संबंधों का अहम आधार बताया।
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रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने दिया क्या संदेश?
अंतरिक्ष यात्री प्योत्र दुब्रोव ने कहा, "प्रिय दोस्तों, आज भारत गणराज्य अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है।" उन्होंने भारतीय लोगों के लिए शांति और समृद्धि की कामना की। रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने स्वतंत्रता दिवस को मानव अंतरिक्ष उड़ान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि इस साल सोवियत अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिन के अंतरिक्ष में जाने के 65 साल भी पूरे हो रहे हैं। गागरिन अंतरिक्ष में जाने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति थे।
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गागरिन नवंबर 1961 में भारत आए थे। वह भारत और सोवियत संघ के बीच मजबूत होते संबंधों के शुरुआती प्रतीकों में शामिल रहे। रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने भारत के बारे में उनकी चर्चित टिप्पणी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा था कि भारत अंतरिक्ष से खूबसूरत दिखाई देता है, लेकिन धरती पर यह "सच्चे दोस्तों" का घर होने के कारण और भी खूबसूरत है।
भारत-रूस साझेदारी और अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा का किया जिक्र
रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने भारत-रूस के अंतरिक्ष सहयोग के लंबे इतिहास का भी जिक्र किया। यह सहयोग 1975 में सोवियत संघ द्वारा आर्यभट्ट, भारत के पहले उपग्रह, के प्रक्षेपण के साथ शुरू हुआ था। इसके करीब एक दशक बाद 1984 में राकेश शर्मा सोवियत अंतरिक्ष यान सोयुज टी-11 से अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने। इस उपलब्धि ने दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत किया।
अंतरिक्ष यात्री अन्ना किकिना ने कहा कि भारत और रूस की साझेदारी अब भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के साथ एक नए चरण में पहुंच गई है। गगनयात्री के नाम से जाने जाने वाले भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों ने देश के पहले मानवयुक्त मिशन की तैयारी के लिए रूस के यूरी गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण लिया है।
रूसी दल बोला- भारत-रूस की दोस्ती जिंदाबाद
संदेश में अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ावा देने के लिए रोसकॉसमॉस, भारत में उसके कार्यालय और इसरो की ओर से आयोजित संयुक्त प्रतियोगिता का भी जिक्र किया गया। प्रतियोगिता में विजेता प्रविष्टियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं के साथ प्रदर्शित किया गया। अंतरिक्ष स्टेशन पर भारतीय तिरंगा लहराते हुए अंतरिक्ष यात्री आंद्रे फेद्यायेव ने कहा, "भारत-रूस की दोस्ती जिंदाबाद।"