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हांगकांग में प्रदर्शनकारियों पर छोड़े गए आंसू गैस के गोले, दागी गई की गोलियां
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Sun, 28 Jul 2019 08:25 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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हांगकांग में दंगा रोधी पुलिस ने रविवार को बीजिंग कार्यालय के पास लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियां दागी। शहर में आज लगातार दूसरे दिन भी हिंसा हुई, जहां कई सप्ताह से सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। यह झड़प उस लायजन ऑफिस के पास आवासीय इलाके के नजदीक हुई जो कि यहां बीजिंग का प्रतिनिधित्व करता है। इस कार्यालय पर पिछले सप्ताह अंडे और पेंट फेंके गए थे। शहर में हजारों प्रदर्शनकारियों द्वारा मार्च किए जाने के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई घंटे गतिरोध रहा।
करीब 200 प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने शेउंग वान जिला स्थित लायजन ऑफिस की ओर मार्च किया, जहां उनका सामना दंगा रोधी पुलिस से हुआ। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से अवैध सभा समाप्त करने की लाउडस्पीकर से अपील की।
बाद में प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और रबर की गोलियां दागी गईं। प्रदर्शनकारियों ने इसका जवाब में ईंटें फेंकी और पथराव किया। वहीं दंगा रोधी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को लाठीचार्ज के जरिए पीछे धकेला। जनता के बीच अभूतपूर्व गुस्से के बावजूद शहर का चीन समर्थित नेतृत्व इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए कदम नहीं उठा पा रहा है, या फिर वह ऐसा करने के प्रति अनिच्छुक है।
पिछले सात सप्ताह से हो रहे इन प्रदर्शनों की शुरुआत एक विवादास्पद विधेयक को लेकर हुई थी, जिसका उद्देश्य चीन को प्रत्यर्पण की अनुमति देना था। हालांकि, यह विरोध प्रदर्शन अब व्यापक लोकतांत्रिक सुधारों की मांग में तब्दील हो गया है।
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करीब 200 प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने शेउंग वान जिला स्थित लायजन ऑफिस की ओर मार्च किया, जहां उनका सामना दंगा रोधी पुलिस से हुआ। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से अवैध सभा समाप्त करने की लाउडस्पीकर से अपील की।
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बाद में प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और रबर की गोलियां दागी गईं। प्रदर्शनकारियों ने इसका जवाब में ईंटें फेंकी और पथराव किया। वहीं दंगा रोधी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को लाठीचार्ज के जरिए पीछे धकेला। जनता के बीच अभूतपूर्व गुस्से के बावजूद शहर का चीन समर्थित नेतृत्व इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए कदम नहीं उठा पा रहा है, या फिर वह ऐसा करने के प्रति अनिच्छुक है।
पिछले सात सप्ताह से हो रहे इन प्रदर्शनों की शुरुआत एक विवादास्पद विधेयक को लेकर हुई थी, जिसका उद्देश्य चीन को प्रत्यर्पण की अनुमति देना था। हालांकि, यह विरोध प्रदर्शन अब व्यापक लोकतांत्रिक सुधारों की मांग में तब्दील हो गया है।