{"_id":"69e5f66663564b8f670f2c7b","slug":"us-iran-war-president-donald-trump-fear-f-15e-fighter-jet-crash-white-house-tense-situation-room-pilots-rescue-2026-04-20","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"ईरान में अमेरिकी पायलटों के फंसने से बौखला गए थे ट्रंप: सहयोगियों पर चीखे, फिर टीम ने वॉर रूम से बाहर रखा","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
ईरान में अमेरिकी पायलटों के फंसने से बौखला गए थे ट्रंप: सहयोगियों पर चीखे, फिर टीम ने वॉर रूम से बाहर रखा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: Kirtivardhan Mishra
Updated Mon, 20 Apr 2026 03:18 PM IST
विज्ञापन
सार
अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुआ युद्ध बीते दो हफ्तों से रुका है। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से संघर्ष को स्थायी तौर पर रोकने के लिए भी बात हुई है। हालांकि, इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रवैया कई बार बदला है। इस पूरे संघर्ष के दौरान एक घटनाक्रम ऐसा भी आया, जब ट्रंप को डर का अहसास हुआ था।
अमेरिका-ईरान युद्ध।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन
विस्तार
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्ध विराम की मियाद 21 अप्रैल को पूरी होने वाली है। इस बीच अमेरिका का एक प्रतिनिधिमंडल ईरान से बातचीत के लिए सोमवार देर रात तक पाकिस्तान पहुंच सकता है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस युद्ध को खत्म करने और ईरान से अपनी मांगों को मनवाने की कोशिशों के तहत एक बार फिर बातचीत पर ही जोर देना चाहते हैं। ट्रंप के इस रवैये की यूरोप से लेकर खाड़ी देशों तक ने तारीफ की है। हालांकि, ईरान को लेकर ट्रंप का रुख लगातार ऐसा नहीं रहा है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान एक मौका तो ऐसा आ गया था, जब ट्रंप अचानक हुए कुछ घटनाक्रमों के चलते बुरी तरह बौखला गए थे। आलम यह था कि राष्ट्रपति लगातार अपने सहयोगियों पर चिल्लाते जा रहे थे। नतीजतन उनके सहयोगियों ने उन्हें एक बहुत अहम बैठक वाले कमरे से बाहर तक करने से गुरेज नहीं किया।
इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ा खुलासा किया है अमेरिकी अखबार- द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने। अमेरिकी अधिकारियों और व्हाइट हाउस से जुड़े सूत्रों के हवाले से छपी इस रिपोर्ट में ट्रंप के लगातार बदलते रवैये का उदाहरण देने के लिए जिस घटनाक्रम की बात की गई है, वह था- ईरान में एक अमेरिकी एफ-15ई लड़ाकू विमान के क्रैश होने और इसके पायलट-एयरमैन के ईरानी धरती पर फंसने की। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कैसे ट्रंप का अनियंत्रित-बेलगाम व्यवहार उनके प्रशासन, रिपब्लिकन पार्टी और उनके समर्थकों के लिए भी चिंता का विषय बनता चला गया।
Trending Videos
इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ा खुलासा किया है अमेरिकी अखबार- द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने। अमेरिकी अधिकारियों और व्हाइट हाउस से जुड़े सूत्रों के हवाले से छपी इस रिपोर्ट में ट्रंप के लगातार बदलते रवैये का उदाहरण देने के लिए जिस घटनाक्रम की बात की गई है, वह था- ईरान में एक अमेरिकी एफ-15ई लड़ाकू विमान के क्रैश होने और इसके पायलट-एयरमैन के ईरानी धरती पर फंसने की। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कैसे ट्रंप का अनियंत्रित-बेलगाम व्यवहार उनके प्रशासन, रिपब्लिकन पार्टी और उनके समर्थकों के लिए भी चिंता का विषय बनता चला गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
आइये जानते हैं कि जब एफ-15ई लड़ाकू विमान ईरान की धरती पर क्रैश हुआ था, तब अमेरिका के राष्ट्रपति भवन- व्हाइट हाउस में क्या माहौल था? इस घटनाक्रम को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का रवैया कैसा था? ईरान से युद्ध के दौरान कैसे अमेरिकी राष्ट्रपति के विवादित पोस्ट्स चिंता विषय बन चुके हैं?
ईरान युद्ध के दौरान अब तक कैसा रहा है डोनाल्ड ट्रंप का रवैया?
ईरान युद्ध के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रवैया सार्वजनिक रूप से बेहद आक्रामक रहा है। हालांकि, अखबार ने कुछ घटनाक्रमों के जरिए दावा किया है कि ट्रंप अंदरूनी बैठकों और मुलाकातों में अपने डर भी जाहिर करते रहे हैं। इतना ही नहीं एक मौके पर तो उनका व्यवहार अचानक से अस्थिर हो गया।1. जब दिखा ट्रंप का दिखावटी आक्रामकता और धमकियों वाला रुख
ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों और व्हाइट हाउस के सूत्रों के मुताबिक, यूं तो अमेरिकी राष्ट्रपति युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करने और एक समझौते पर पहुंचने के लिए बेताब हैं, लेकिन इसके लिए वे एक अजीब रणनीति अपना रहे हैं। ईरान को डराकर बातचीत की मेज पर लाने के लिए वे जानबूझकर खुद को अस्थिर और खतरनाक दिखा रहे हैं। इसी के चलते उन्होंने सोशल मीडिया पर बिना किसी सलाह के अचानक ईरान की पूरी सभ्यता को नष्ट करने की धमकी दे डाली। इसके अलावा, उन्होंने ईस्टर के दिन अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए अल्लाह की तारीफ जैसे पोस्ट किए, ताकि ईरानियों को उन्हीं की भाषा में डराया जा सके।सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप कुछ मौकों पर अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने को लेकर भी बेहद चिंतित दिखाई दिए हैं। इसी कारण उन्होंने खार्ग द्वीप पर कब्जा करने के सैन्य सुझाव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अमेरिकी सैनिक वहां ईरान के आगे आसान निशाना बन जाएंगे। हालांकि, ईरान को लेकर वे लगातार आक्रामक और भड़काऊ भाषण देते रहे।
2. लगातार युद्ध से भटकता रहा है ट्रंप का ध्यान
अधिकारियों का कहना है कि गंभीर सैन्य संघर्ष के बीच भी राष्ट्रपति का ध्यान अक्सर भटक जाता है। महत्वपूर्ण क्षणों में वे व्हाइट हाउस में एक नए बॉलरूम के निर्माण, मध्यावधि चुनावों के लिए फंड जुटाने, इंडियाना के राज्य चुनाव, और क्रिप्टोकरेंसी तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी चीजों पर समय बिताते हैं। एक स्वागत समारोह में उन्होंने अपने सलाहकारों के सामने मजाक में खुद को ही देश का सर्वोच्च सैन्य सम्मान मेडल ऑफ ऑनर देने की बात भी कही।रिपोर्ट के मुताबिक, जनता को यह दर्शाने के लिए कि ट्रंप का ध्यान लगातार ईरान युद्ध की ओर ही है, व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स और अन्य सलाहकारों ने महसूस किया कि ट्रंप को राष्ट्र के नाम संबोधन देना चाहिए। ट्रंप शुरुआत में भाषण देने के लिए तैयार नहीं थे, क्योंकि वे नहीं जानते थे कि युद्ध का अंत कैसे होगा और वे जीत का एलान भी नहीं कर सकते थे। इसके बावजूद, अधिकारियों और सलाहकारों ने मिलकर उन्हें 1 अप्रैल को राष्ट्र को संबोधित करने के लिए मना लिया।
3. आर्थिक चिंताएं और सहयोगियों के खिलाफ तेवर भी दिखा चुके
ईरान की तरफ से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को ड्रोन की मदद से इतनी आसानी से बंद किए जाने पर ट्रंप हैरान और चिड़चिड़े हैं। गैस की बढ़ती कीमतों और तेल उद्योग के अधिकारियों की चिंताओं को लेकर वे काफी दबाव महसूस कर रहे हैं। साथ ही, वे ब्रिटेन और फ्रांस जैसे यूरोपीय सहयोगियों से भी नाराज हैं, क्योंकि नाटो, यूरोपीय सहयोगी और एशियाई सहयोगी भी इस संघर्ष में अमेरिका की कोई मदद नहीं कर रहे हैं।ये भी पढ़ें: Iran Israel War: ईरान का दूसरे दौर की वार्ता में शामिल होने से इनकार, ट्रंप ने दी तबाही की धमकी
4. कभी ईरान की तबाही से खुश, कभी मीडिया से निराश
व्हाइट हाउस के अफसरों ने अखबार को बताया कि ट्रंप युद्ध की सफलता को नष्ट किए गए ईरानी ठिकानों की गिनती से माप रहे हैं और सुबह-सुबह ईरान में होने वाले भयानक बम धमाकों के वीडियो देखकर सेना की ताकत से बहुत प्रभावित होते हैं। दूसरी ओर, वे इस बात से निराश रहे कि उन्हें मीडिया में इस युद्ध के लिए जरूरी तारीफ नहीं मिल रही है। अखबार के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन को लग रहा था कि राष्ट्रपति युद्ध के बीच लगातार मीडिया को बिना सोचे-समझे इंटरव्यू दे रहे थे, जिससे जनता के बीच विरोधाभासी संदेश जा रहे थे। इस नुकसान को रोकने के लिए उनके शीर्ष सलाहकारों ने बारी-बारी से उन्हें मीडिया साक्षात्कारों को सीमित करने की सलाह दी। ट्रंप कुछ समय के लिए इस बात पर राजी भी हुए, लेकिन जल्द ही फिर से अपनी पुरानी आदत पर लौट आए।
युद्ध के बीच किस घटना के बाद बेचैनी और डर से घिर गए थे ट्रंप?
ईरान में तीन अप्रैल (गुड फ्राइडे) को अमेरिकी एफ-15ई फाइटर जेट को ईरान ने मार गिराया था। इस हमले के बाद एफ-15ई में सवार दोनों पायलट ईरान की धरती पर ही फंस गए थे। जब इस घटना की जानकारी व्हाइट हाउस को मिली तो यहां जबरदस्त तनाव और उथल-पुथल की स्थिति पैदा हो गई।1. ट्रंप के गुस्से और बेचैनी से दो-चार हुए उनके मंत्री-अधिकारी
अखबार के मुताबिक, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जेट क्रैश और पायलटों के लापता होने की जानकारी मिली, तो वे बहुत घबरा गए और कई घंटों तक अपने सहयोगियों पर चिल्लाते रहे। उन्होंने सेना से कहा कि वे तुरंत ईरान जाकर फंसे हुए पायलटों को वापस लाएं। कुछ अफसरों ने बताया कि ट्रंप को 1979 के राष्ट्रपति जिमी कार्टर के ईरानी बंधक संकट की याद सता रही थी और उन्हें डर लग रहा था कि यह युद्ध उनके लिए एक बहुत बड़ी विफलता साबित हो सकता है। ट्रंप का मानना था कि कार्टर की राष्ट्रपति कुर्सी जाने की एक बड़ी वजह 1979 की ईरानी क्रांति और इसके चलते ईरान में बंधक बनाए गए अमेरिकी नागरिकों को निकाल पाने की विफलता ही था।हालांकि, अमेरिकी सेना के लिए स्थितियां काफी गंभीर हो चुकी थीं और उसके सैनिक 1970 के दशक के बाद से कभी भी ईरानी धरती पर नहीं उतरे थे। ऐसे में ट्रंप के भड़काऊ और तनावपूर्ण रवैये के बावजूद अमेरिकी सैन्य अफसरों ने शांतिपूर्ण तरीके से स्थिति को संभालने की कोशिश की।
2. राष्ट्रपति को सिचुएशन रूम से भी बाहर रखा गया
बचाव अभियान के दौरान, ट्रंप के सहयोगियों ने उन्हें 'सिचुएशन रूम' से जानबूझकर दूर रखा। अधिकारियों का मानना था कि ट्रंप की बेसब्री और आवेग वाला स्वभाव इस नाजुक मौके पर मददगार साबित नहीं होगा। ऐसे में जब अमेरिकी सेना ईरान में फंसे अपने पायलटों को सुरक्षित निकालने का अभियान चला रही थी, तो ट्रंप को सिर्फ अहम मौकों पर ही फोन के जरिए अपडेट दिए गए।बताया गया है कि ईस्टर वाले पूरे वीकेंड में 24 घंटों के दौरान, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स समेत अन्य शीर्ष अधिकारी सिचुएशन रूम में जुड़े रहे और रेस्क्यू ऑपरेशन की हर मिनट की रिपोर्ट लेते रहे। वहीं, सैन्य अधिकारी सिचुएशन रूम से हर एक घटनाक्रम और जमीनी अभियान का संचालन कर रहे थे।
3. सीआईए का भ्रामक अभियान और रेस्क्यू
एफ-15ई क्रैश होने के कुछ समय बाद ही एक पायलट को करीब छह घंटे में बचा लिया गया, लेकिन दूसरे पायलट की तलाश में लंबा समय लगा। अमेरिका की कोशिश रही कि ईरानियों से पहले दूसरे पायलट तक पहुंचा जाए। इस अभियान में सीआईए ने अहम भूमिका निभाई; इस खुफिया एजेंसी ने न केवल पहाड़ों की एक दरार में छिपे दूसरे पायलट का पता लगाया, बल्कि एक भ्रामक अभियान भी चलाया जिसमें झूठी जानकारी फैलाई गई कि पायलट को पहले ही खोज लिया गया है।इधर पायलट रेस्क्यू हुआ और उधर फिर पुराने रुख पर उतरे ट्रंप
जब शनिवार देर रात दूसरे पायलट के सुरक्षित रेस्क्यू की खबर ट्रंप तक पहुंची, तो उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- ट्रूथ सोशल पर इस मिशन की सफलता का प्रचार किया और फिर रात दो बजे जाकर सोए। इसके ठीक कुछ घंटों बाद, ईस्टर रविवार की सुबह, उन्होंने सोशल मीडिया पर ईरान को गालियां देते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की धमकी दी और जानबूझकर अल्लाह की तारीफ लिखकर पोस्ट किया, ताकि ईरानियों को डराया जा सके।
इस घटना के बाद रिपब्लिकन सांसदों (सीनेटर्स) और ईसाई धर्म के प्रमुख नेताओं ने तुरंत व्हाइट हाउस में फोन करना शुरू कर दिया। इन नेताओं ने अधिकारियों से ट्रंप की ओर से इस्तेमाल की गई भाषा और उनकी मानसिक स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।
संबंधित वीडियो
