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ट्रंप को बड़ा झटका: ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं चाहती सीनेट, पहली बार 'वॉर पावर्स' प्रस्ताव पारित

पीटीआई, वॉशिंगटन Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 24 Jun 2026 02:13 PM IST
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सार

अमेरिकी राष्ट्रपति की ईरान युद्ध को लेकर मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब अमेरिकी सीनेट ने युद्ध प्रस्ताव पारित कर ट्रंप के ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान पर आपत्ति जताई है। यह ट्रंप के लिए झटका माना जा रहा है और यह उनके घटते समर्थन का भी सबूत है। 

US Senate for first time approves war powers resolution in rebuke to Trump over Iran War
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

अमेरिकी सीनेट ने पहली बार एक 'वॉर पावर्स' (युद्ध अधिकार) प्रस्ताव पारित करते हुए ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को सीमित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह प्रस्ताव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा झटका है। एक तरह से सीनेट ने ट्रंप की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की कोशिशों पर आपत्ति जताई है। मंगलवार को हुए मतदान में प्रस्ताव 50-48 मतों से पारित हुआ। हालांकि यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है और इसका पूर्ण कानूनी प्रभाव नहीं होगा, फिर भी इसे ट्रंप प्रशासन की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक आपत्ति माना जा रहा है।


ट्रंप ने प्रस्ताव की तीखी आलोचना की
सीनेट द्वारा इस तरह का प्रस्ताव पारित किया जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले नौ बार ऐसे प्रयास विफल हो चुके थे। यह सीनेट में ट्रंप के गिरते समर्थन का भी प्रतीक है। इसी महीने प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है। प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे गलत समय पर लाया गया और बेकार प्रस्ताव करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मतदान से ईरान को मदद मिलेगी और उनका मनोबल भी बढ़ेगा। 
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डेमोक्रेट सांसद ने ईरान युद्ध को बताया अमेरिकी इतिहास की सबसे खराब नीति
सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने कहा, 'बार-बार सीनेट में अधिकांश रिपब्लिकन सांसद ट्रंप और उनके युद्ध के साथ खड़े रहे, न कि अमेरिकी जनता के साथ।' उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी जनता को ईरान में ट्रंप की ऐतिहासिक भूल की कीमत चुकानी पड़ रही है और यह अमेरिकी विदेश नीति की सबसे खराब गलतियों में से एक के रूप में इतिहास में दर्ज होगी। 
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चार रिपब्लिकन सीनेटर्स ने भी किया प्रस्ताव का समर्थन
मतदान के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के चार सीनेटर लिसा मर्कोव्स्की, सुसान कॉलिन्स, रैंड पॉल और बिल कैसिडी ने डेमोक्रेट्स का साथ देते हुए प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। वहीं डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन ने प्रस्ताव का विरोध किया। ट्रंप ने इन चारों रिपब्लिकन सांसदों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने उनका काम और मुश्किल बना दिया है। दो रिपब्लिकन सीनेटरों की अनुपस्थिति ने भी मतदान के नतीजे को प्रभावित किया। इनमें केंटकी से सीनेटर मिच मैककोनेल भी शामिल थे, जिन्हें हाल ही में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

यह मतदान ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी रक्षा विभाग ईरान युद्ध के बाद हथियारों और सैन्य भंडार की भरपाई के लिए कांग्रेस से लगभग 80 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि की मांग कर रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को कैपिटल हिल पहुंचकर रिपब्लिकन सीनेटरों से मुलाकात करने वाले हैं। ट्रंप प्रशासन ने पिछले सप्ताह ईरान के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत दोनों पक्षों को ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक समझौते के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है।

शांति समझौतों के प्रस्तावों पर कई सांसद असहमत
हालांकि, कई रिपब्लिकन सांसद इस समझौते से भी असहमत हैं। विशेष रूप से ईरान के पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित 300 अरब डॉलर के फंड को लेकर आपत्तियां जताई जा रही हैं। यह राशि 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा ईरान को दी गई 1.7 अरब डॉलर की राशि से कहीं अधिक है। रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज ने हाल ही में कहा था, 'मेरा मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के मामले में बेहद खराब सलाह दी जा रही है।' डेमोक्रेट सांसद फरवरी में अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर मिसाइल हमले शुरू किए जाने के बाद से लगातार युद्ध अधिकार संबंधी प्रस्ताव ला रहे थे, लेकिन अब तक उन्हें जरूरी समर्थन नहीं मिल पाया था। पेंटागन के शुरुआती अनुमान के अनुसार, युद्ध के पहले सप्ताह में ही लगभग 11.3 अरब डॉलर खर्च हुए थे। वहीं कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' की कुल लागत 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
 
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