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Pakistan: सिंधु जल संधि पर भारत की कार्रवाई से PAK परेशान; गिड़गिड़ाते हुए शहबाज बोले- आजीविका के लिए खतरा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 02 Feb 2026 08:20 PM IST
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सार
पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के एक दिन बाद, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक कदम उठाए, इसमें 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया गया था। अब पाकिस्तान को इसके परिणाम की चिंता हो रही है और पाकिस्तान के पीएम ने इसे लेकर चिंता जताई है।
शहबाज शरीफ, पाकिस्तानी पीएम
- फोटो : X @CMShehbaz
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विस्तार
सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को निलंबित करने के भारत के फैसले से पाकिस्तान की तिलमिलाहट खत्म नहीं हो रही है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के निर्णय पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जल सुरक्षा जिम्मेदार और कानूनी सीमा पार सहयोग पर निर्भर करती है।
आतंकवादी हमले के बाद भारत ने उठाया था सख्त कदम
पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ था। इसके एक दिन बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए थे। उनमें एक कदम 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित करना भी शामिल था। इस संधि को विश्व बैंक की मध्यस्थता में बनाया गया था। यह संधि 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती है।
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शहबाज शरीफ ने क्या कहा?
विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर शहबाज शरीफ ने कहा, हमारे क्षेत्र में जल सुरक्षा जिम्मेदार और कानूनी सीमा पार सहयोग पर निर्भर करती है। पाकिस्तान 1960 की सिंधु जल संधि को प्रभावित करने वाले भारत के एकतरफा कदमों को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा, संधि के तहत के तहत आंकड़ों को साझा करने और अन्य व्यवस्थाओं को रोकने से भरोसे और भविष्य की योजना पर असर पड़ता है, जबकि जलवायु संकट के समय अधिक सहयोग की जरूरत होती है।
लाखों लोगों की आजीविका को होगा खतरा: शहबाज शरीफ
शहबाज ने कहा, जल का कभी दबाव या युद्ध के हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। पानी के प्रवाह में बाधा आने से लाखों लोगों के जीवन, आजीविका और और खाद्य व्यवस्था के लिए खतरा हो सकता है, क्योंकि पाकिस्तान की आबादी सिंधु बेसिन पर निर्भर है।
ये भी पढ़ें: ईरान ने यूरोपीय संघ के राजदूतों को किया तलब, रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकी घोषित करने पर जताया विरोध
उन्होंने कहा कि आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) किफायती जलवायु समाधान हैं। ये बाढ़ को अच्छी तरह से रोकते हैं, कार्बन को संग्रहित करते हैं, तटों की प्राकृतिक सुरक्षा करते हैं और महंगे आपदा सुधार की जरूरत को कम करते हैं।
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पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ था। इसके एक दिन बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए थे। उनमें एक कदम 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित करना भी शामिल था। इस संधि को विश्व बैंक की मध्यस्थता में बनाया गया था। यह संधि 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती है।
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लाखों लोगों की आजीविका को होगा खतरा: शहबाज शरीफ
शहबाज ने कहा, जल का कभी दबाव या युद्ध के हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। पानी के प्रवाह में बाधा आने से लाखों लोगों के जीवन, आजीविका और और खाद्य व्यवस्था के लिए खतरा हो सकता है, क्योंकि पाकिस्तान की आबादी सिंधु बेसिन पर निर्भर है।
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उन्होंने कहा कि आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) किफायती जलवायु समाधान हैं। ये बाढ़ को अच्छी तरह से रोकते हैं, कार्बन को संग्रहित करते हैं, तटों की प्राकृतिक सुरक्षा करते हैं और महंगे आपदा सुधार की जरूरत को कम करते हैं।
