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CES 2026: जब कार बनेगी समझदार मशीन, हॉर्सपावर से ब्रेनपावर की ओर बदलाव, जानें आपके लिए क्या हैं इसके मायने
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 02 Jan 2026 02:15 PM IST
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सार
2026 में, दुनिया का सबसे बड़ा कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो लास वेगास में वापस आ रहा है और उम्मीद है कि इसमें रोबोट और "AI के साथ रहने" पर ज्यादा जोर दिया जाएगा।
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विस्तार
लास वेगास में होने वाला CES 2026 (सीईएस 2026) इस बार कुछ अलग संकेत दे रहा है। दुनिया का सबसे बड़ा टेक शो अब सिर्फ चमकदार गैजेट्स या भविष्य जैसी दिखने वाली कॉन्सेप्ट कारों तक सीमित नहीं रहा। 2026 में फोकस इस बात पर है कि कारें कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर और रियल-टाइम डेटा के दम पर स्मार्ट मशीनों में बदल रही हैं। CES 2025 में जिसकी झलक दिखी थी, वह अब पूरी तरह केंद्र में आ चुका है।
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सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स का दौर
CES 2026 में सबसे बड़ा बदलाव सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स यानी SDV को लेकर दिखेगा। अब कारों को सिर्फ हार्डवेयर नहीं, बल्कि चलते-फिरते कंप्यूटर के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाली कारें स्मार्टफोन की तरह ओवर-द-एयर अपडेट्स के जरिए समय के साथ नई सुविधाएं हासिल कर सकेंगी। यानी कार खरीदने के बाद भी उसका अनुभव लगातार बेहतर होता रहेगा। वाहन निर्माता अब नई कार दिखाने से ज्यादा यह साबित करने में जुटे हैं कि उनकी गाड़ियां फैक्ट्री से निकलने के बाद भी विकसित होती रहेंगी।
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एजेंटिक AI: आपकी कार बनेगी फैसला लेने वाली साथी
इस बदलाव की सबसे अहम कड़ी है एजेंटिक AI (एआई)। इसका मतलब है कि कार सिर्फ आपके आदेश का इंतजार नहीं करेगी, बल्कि खुद हालात समझकर फैसले लेगी। रास्ता चुनना, ट्रैफिक और एनर्जी मैनेजमेंट, चार्जिंग या रुकने की योजना, ये सब काम AI खुद करेगा। ड्राइवर को बस सामान्य भाषा में जरूरत बतानी होगी। यह तकनीक निजी कारों के साथ-साथ डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स वाहनों के लिए भी गेमचेंजर साबित हो सकती है।
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नेविगेशन और ड्राइविंग होगी कम तनाव वाली
सीईएस 2026 में नेविगेशन ऑन ऑटोपायलट जैसी तकनीकों पर भी जोर रहेगा। इसमें कार तय रूट पर खुद लेन बदलने, स्पीड एडजस्ट करने और इंटरचेंज संभालने में मदद करेगी, जबकि ड्राइवर सतर्क रहकर नियंत्रण अपने हाथ में रखेगा। यह पूरी तरह सेल्फ-ड्राइविंग नहीं है, लेकिन ड्राइविंग को कहीं ज्यादा आसान और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
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लोकेशन इंटेलिजेंस बनेगी असली ताकत
इन सभी स्मार्ट फीचर्स के पीछे असली ताकत लोकेशन इंटेलिजेंस की है। यह अब सिर्फ मैप्स तक सीमित नहीं रही। हर मूवमेंट को डेटा में बदलकर रियल-टाइम फैसले लिए जा रहे हैं। आम ड्राइवर के लिए इसका मतलब है कम देरी, बेहतर रूट और आसान प्लानिंग। जबकि इंडस्ट्री के लिए ज्यादा सटीक और कुशल ऑपरेशंस में मददगार साबित होगा।
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Sony-Honda और सॉफ्टवेयर पर जोर
सीईएस 2026 में Sony-Honda Mobility Group (सोनी-होंडा मोबिलिटी ग्रुप) एक बार फिर चर्चा में रहेगा। कंपनी अपने ईवी AFEELA 1 (अफीला 1) का प्री-प्रोडक्शन वर्जन और एक नया कॉन्सेप्ट दिखाने की तैयारी में है। हालांकि शो में असली नई कारों से ज्यादा ध्यान सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म, ऑपरेटिंग सिस्टम और एआई क्षमताओं पर रहेगा। यह साफ संकेत है कि आने वाले समय में कारों की पहचान उनके इंजन से ज्यादा उनके सॉफ्टवेयर से होगी।
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ईवी इंडस्ट्री का यथार्थवादी दौर
सीईएस 2026 का माहौल पहले की तुलना में ज्यादा शांत और यथार्थवादी हो सकता है। 2025 में ईवी सेक्टर में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जिसके बाद कई कंपनियां आक्रामक योजनाओं से पीछे हटीं और हाइब्रिड, एसयूवी और ट्रक जैसे सेगमेंट पर फिर से ध्यान देने लगीं। अब इंडस्ट्री एक ऐसे दौर में है जहां इलेक्ट्रिफिकेशन लक्ष्य तो बना हुआ है, लेकिन उसकी रफ्तार और रास्ता ज्यादा व्यावहारिक हो गया है।
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कम शोर, ज्यादा असर
इस साल सीईएस में बड़े वादों और शो-ऑफ से ज्यादा सप्लायर टेक्नोलॉजी, जैसे चिप्स, सेंसर, AI सिस्टम और मैन्युफैक्चरिंग टेक पर फोकस रहने की उम्मीद है। भले ही यह कम सुर्खियां बनाए, लेकिन यही तकनीकें आने वाले वर्षों में कारों को ज्यादा स्मार्ट, सुरक्षित और उपयोगी बनाएंगी।
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इस साल सीईएस में बड़े वादों और शो-ऑफ से ज्यादा सप्लायर टेक्नोलॉजी, जैसे चिप्स, सेंसर, AI सिस्टम और मैन्युफैक्चरिंग टेक पर फोकस रहने की उम्मीद है। भले ही यह कम सुर्खियां बनाए, लेकिन यही तकनीकें आने वाले वर्षों में कारों को ज्यादा स्मार्ट, सुरक्षित और उपयोगी बनाएंगी।
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कारों का भविष्य: हॉर्सपावर से ब्रेनपावर तक
सीईएस 2026 यह साफ कर देगा कि कारों का भविष्य अब सिर्फ हॉर्सपावर का नहीं, बल्कि ब्रेनपावर का है। एआई, सॉफ्टवेयर और डेटा से लैस गाड़ियां न सिर्फ ड्राइविंग का तरीका बदलेंगी, बल्कि यह भी तय करेंगी कि आने वाले दशक में हम कारों से क्या उम्मीद करते हैं।
सीईएस 2026 यह साफ कर देगा कि कारों का भविष्य अब सिर्फ हॉर्सपावर का नहीं, बल्कि ब्रेनपावर का है। एआई, सॉफ्टवेयर और डेटा से लैस गाड़ियां न सिर्फ ड्राइविंग का तरीका बदलेंगी, बल्कि यह भी तय करेंगी कि आने वाले दशक में हम कारों से क्या उम्मीद करते हैं।