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Flying Taxi: क्या भारत की पहली फ्लाइंग टैक्सी हकीकत बनने जा रही है? चेन्नई स्टार्टअप की बड़ी पहल
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 20 Feb 2026 07:12 PM IST
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सार
चेन्नई की स्टार्टअप कंपनी द ईप्लेन कंपनी भारत की पहली इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी, e200x पर काम कर रही है। यह कार्य को तेज करने और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए एडवांस्ड सिमुलेशन और कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है।
The ePlane Company Air Taxi
- फोटो : ePlane
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विस्तार
भारत की पहली फ्लाइंग टैक्सी अब आकार ले रही है। चेन्नई स्थित स्टार्टअप The ePlane Company (द ईप्लेन कंपनी) देश की पहली इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी e200x पर काम कर रहा है। इस प्रोजेक्ट में एडवांस्ड सिमुलेशन और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ताकि विकास की रफ्तार तेज हो और सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाया जा सके।
डिजिटल ट्विन तकनीक का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है?
स्टार्टअप ने एयर टैक्सी का एक बेहद सटीक डिजिटल ट्विन तैयार किया है, जिसे NVIDIA (एनवीडिया) के ओम्नीवर्स प्लेटफॉर्म पर विकसित किया गया है। यह वर्चुअल मॉडल इंजीनियरों को वास्तविक उड़ान से पहले फ्लाइट डायनामिक्स, सेंसर सिस्टम और आपातकालीन स्थितियों की डिजिटल वातावरण में जांच करने की सुविधा देता है।
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डिजिटल ट्विन तकनीक का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है?
स्टार्टअप ने एयर टैक्सी का एक बेहद सटीक डिजिटल ट्विन तैयार किया है, जिसे NVIDIA (एनवीडिया) के ओम्नीवर्स प्लेटफॉर्म पर विकसित किया गया है। यह वर्चुअल मॉडल इंजीनियरों को वास्तविक उड़ान से पहले फ्लाइट डायनामिक्स, सेंसर सिस्टम और आपातकालीन स्थितियों की डिजिटल वातावरण में जांच करने की सुविधा देता है।
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असली उड़ान से पहले क्या-क्या टेस्ट किए जाएंगे?
इस डिजिटल मॉडल की मदद से इंजीनियर लाखों किलोमीटर की वर्चुअल उड़ानों का डेटा इकट्ठा करेंगे। इससे शहरी हवाई परिवहन को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और कुशल बनाने में मदद मिलेगी। और वास्तविक उड़ान के दौरान जोखिम को न्यूनतम किया जा सकेगा।
ऑनबोर्ड कंप्यूटिंग सिस्टम कैसे बढ़ाएगा सुरक्षा?
एयर टैक्सी में एनवीडिया के ऑनबोर्ड कंप्यूटिंग सिस्टम लगाए जाएंगे, जो कैमरों और रडार से आने वाले डेटा को रियल-टाइम में प्रोसेस करेंगे। इससे उड़ान के दौरान तुरंत और सटीक फैसले लिए जा सकेंगे, जिससे ऑपरेशनल सेफ्टी और बेहतर होगी।
इस डिजिटल मॉडल की मदद से इंजीनियर लाखों किलोमीटर की वर्चुअल उड़ानों का डेटा इकट्ठा करेंगे। इससे शहरी हवाई परिवहन को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और कुशल बनाने में मदद मिलेगी। और वास्तविक उड़ान के दौरान जोखिम को न्यूनतम किया जा सकेगा।
ऑनबोर्ड कंप्यूटिंग सिस्टम कैसे बढ़ाएगा सुरक्षा?
एयर टैक्सी में एनवीडिया के ऑनबोर्ड कंप्यूटिंग सिस्टम लगाए जाएंगे, जो कैमरों और रडार से आने वाले डेटा को रियल-टाइम में प्रोसेस करेंगे। इससे उड़ान के दौरान तुरंत और सटीक फैसले लिए जा सकेंगे, जिससे ऑपरेशनल सेफ्टी और बेहतर होगी।
एविएशन और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग का यह मेल क्यों अहम है?
यह साझेदारी इस बात को दर्शाती है कि आधुनिक एविएशन अब हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग पर तेजी से निर्भर हो रहा है। जटिल सिमुलेशन को रियल-टाइम में वास्तविक दुनिया जैसी परिस्थितियों में दोहराने के लिए पावरफुल जीपीयू आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है।
क्या डिजिटल ट्विन मेंटेनेंस में भी मदद करेगा?
परीक्षण के अलावा, डिजिटल ट्विन को प्रीडिक्टिव मेंटेनेंस टूल के रूप में भी इस्तेमाल किया जाएगा। यह विमान के अलग-अलग कंपोनेंट्स की नकल करके संभावित तकनीकी खामियों का पहले ही पता लगाने में मदद करेगा, जिससे ऑपरेशनल जोखिम कम होंगे।
यह साझेदारी इस बात को दर्शाती है कि आधुनिक एविएशन अब हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग पर तेजी से निर्भर हो रहा है। जटिल सिमुलेशन को रियल-टाइम में वास्तविक दुनिया जैसी परिस्थितियों में दोहराने के लिए पावरफुल जीपीयू आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है।
क्या डिजिटल ट्विन मेंटेनेंस में भी मदद करेगा?
परीक्षण के अलावा, डिजिटल ट्विन को प्रीडिक्टिव मेंटेनेंस टूल के रूप में भी इस्तेमाल किया जाएगा। यह विमान के अलग-अलग कंपोनेंट्स की नकल करके संभावित तकनीकी खामियों का पहले ही पता लगाने में मदद करेगा, जिससे ऑपरेशनल जोखिम कम होंगे।
इंजीनियरिंग टीम इस तकनीक को कैसे देखती है?
द ईप्लेन कंपनी में एवियोनिक्स सिस्टम्स और ऑटोनॉमी के प्रिंसिपल इंजीनियर बकथकोलाहलन श्यामसुंदर के अनुसार, वर्चुअल टेस्टिंग वातावरण विमान को वास्तविक तैनाती से पहले गहन सीखने का मौका देता है। इससे इंजीनियर दुर्लभ परिस्थितियों का विश्लेषण कर सकते हैं, एल्गोरिद्म को बेहतर बना सकते हैं और फैसलों को डिजिटल स्तर पर वैलिडेट कर सकते हैं। ताकि असली उड़ानों में सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
द ईप्लेन कंपनी में एवियोनिक्स सिस्टम्स और ऑटोनॉमी के प्रिंसिपल इंजीनियर बकथकोलाहलन श्यामसुंदर के अनुसार, वर्चुअल टेस्टिंग वातावरण विमान को वास्तविक तैनाती से पहले गहन सीखने का मौका देता है। इससे इंजीनियर दुर्लभ परिस्थितियों का विश्लेषण कर सकते हैं, एल्गोरिद्म को बेहतर बना सकते हैं और फैसलों को डिजिटल स्तर पर वैलिडेट कर सकते हैं। ताकि असली उड़ानों में सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
भारत के लिए इस प्रोजेक्ट का क्या मतलब है?
यह प्रोजेक्ट भारत के उभरते अर्बन एयर मोबिलिटी सेक्टर के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है। साथ ही, यह संकेत देता है कि भारत भविष्य की एविएशन टेक्नोलॉजी को देश में ही विकसित करने की दिशा में बड़े और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय कर रहा है।
यह प्रोजेक्ट भारत के उभरते अर्बन एयर मोबिलिटी सेक्टर के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है। साथ ही, यह संकेत देता है कि भारत भविष्य की एविएशन टेक्नोलॉजी को देश में ही विकसित करने की दिशा में बड़े और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय कर रहा है।

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