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ICRA Report: भारत में टू-व्हीलर्स की बंपर बिक्री; FY26 में बना नया रिकॉर्ड, EVs ने भी पकड़ी रफ्तार

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Tue, 21 Apr 2026 04:24 PM IST
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सार

India Two Wheeler Sales FY26: वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) भारतीय टू-व्हीलर बाजार के लिए एतिहासिक रहा, जहां कुल थोक बिक्री 2.2 करोड़ यूनिट्स के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। सस्ते लोन, GST में सुधार और ग्रामीण भारत से आई शानदार डिमांड के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों की तेज रफ्तार ने इस बंपर बिक्री में अहम भूमिका निभाई। इस लेख में जानिए कि कैसे ऑटो सेक्टर ने यह बड़ा मुकाम हासिल किया और अगले साल के लिए बाजार को लेकर क्या चुनौतियां और अनुमान हैं।

India's Two-Wheeler Sales Hit Record High in FY26; EVs See Massive Growth: ICRA
2-Wheeler Sales - फोटो : bajajauto and tvsmotor
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विस्तार

अगर आप सोच रहे हैं कि आजकल सड़कों पर नई बाइक्स और स्कूटर्स कुछ ज्यादा ही नजर आ रहे हैं तो आप बिल्कुल सही हैं। वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) में भारत के टू-व्हीलर बाजार ने बिक्री का एक नया रिकॉर्ड बना दिया है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस वर्ष देश में थोक यानी होलसेल बिक्री का आंकड़ा लगभग 2.2 करोड़ यूनिट्स तक पहुंच गया है। आइए समझते हैं कि ऑटो सेक्टर के लिए यह वर्ष कैसा रहा और आगे क्या होने वाला है।
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बिक्री के मुख्य आंकड़े 

वित्तीय वर्ष 2026 भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के लिए बेहद सफल रहा। इसकी झलक बिक्री के आंकड़ों में साफ दिखाई देती है। पूरे साल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो रिटेल बिक्री में करीब 13% की बढ़ोतरी हुई, जबकि थोक बिक्री 10.2% से 11% के बीच रही। दिलचस्प बात यह है कि साल की शुरुआत काफी धीमी थी और पहले 6 महीनों में ग्रोथ महज 1% तक सिमटी हुई थी, लेकिन जीएसटी सुधारों के बाद दूसरी छमाही में पासा पलट गया और यह आंकड़ा उछलकर 20.3% पर पहुंच गया। 
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इस शानदार तेजी का चरम मार्च 2026 में देखने को मिला, जब सालाना आधार पर थोक बिक्री में 20% और शोरूम से होने वाली खुदरा बिक्री में 28.7% का जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया।


बिक्री में इस जबरदस्त उछाल की वजह क्या रही?

बिक्री में आए इस जबरदस्त उछाल के पीछे कई बड़े आर्थिक और व्यावहारिक कारण रहे। सबसे अहम भूमिका सरकारी नीतियों और बैंकिंग सुधारों ने निभाई, जहां रेपो रेट में कटौती होने से बाइक और स्कूटर खरीदना सस्ता हो गया। वहीं इनकम टैक्स में मिली राहत ने आम आदमी की जेब में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा छोड़ा। इसके साथ ही, जीएसटी को तर्कसंगत बनाने के सरकार के फैसले ने बाजार में नई जान फूंक दी। इसका सीधा असर बिक्री की बढ़ती रफ्तार पर पड़ा।

बाजार की इस मजबूती को ग्रामीण भारत से भी भरपूर समर्थन मिला, जहां लोगों की आमदनी और कैश फ्लो सुधरने से दो-पहिया वाहनों की मांग में भारी तेजी आई। रही-सही कसर ऑटो कंपनियों ने पूरी कर दी, जिन्होंने ग्राहकों की पसंद को समझते हुए अपना प्रोडक्ट पोर्टफोलियो काफी बड़ा कर लिया। अब शोरूम्स में कम बजट वाली एंट्री-लेवल बाइक्स से लेकर युवाओं को लुभाने वाले प्रीमियम और स्पोर्टी मॉडल्स की एक लंबी रेंज मौजूद है। इसने हर वर्ग के खरीदार को शोरूम तक खींचने का काम किया।


इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की भी तेज रफ्तार

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स (ईवी) के मोर्चे पर भी भारतीय बाजार ने एक नई इबारत लिखी है, जहां ग्राहकों के बीच इलेक्ट्रिक बाइक्स और स्कूटर्स का क्रेज अब एक बड़े बदलाव का रूप ले चुका है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल मार्च 2026 के आंकड़ों में देखने को मिली, जब महज एक महीने के अंदर 1,92,023 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री हुई, जो पिछले साल के मुकाबले 47.4% की भारी उछाल को दर्शाती है।

अगर पूरे वित्तीय वर्ष की बात करें तो इस दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में 21.9% की शानदार ग्रोथ दर्ज की गई। इस बढ़ती रफ्तार का ही नतीजा है कि टू-व्हीलर मार्केट में ईवी की पकड़ मजबूत होती जा रही है। मार्च 2026 तक कुल टू-व्हीलर बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी यानी 'मार्केट पेनिट्रेशन' बढ़कर अब 9.4% के स्तर पर पहुंच गया है, जो यह साफ करता है कि भविष्य अब इलेक्ट्रिक ही है।


विदेशों में भी बज रहा है भारतीय गाड़ियों का डंका

सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी भारतीय टू-व्हीलर्स की भारी मांग है। दुनियाभर में भारतीय ब्रांड्स की पहचान मजबूत हो रही है और नए मॉडल्स के आने से निर्यात में पूरे वर्ष 23.3% की बढ़ोतरी हुई है। मार्च 2026 में विदेशी बाजारों की कुछ चुनौतियों के बावजूद निर्यात 17.5% बढ़ा।


अगले वर्ष कैसा रहेगा बाजार?

आने वाले समय को लेकर रेटिंग एजेंसी ICRA ने अपने अनुमानों में उम्मीद के साथ-साथ कुछ सावधानियों का भी जिक्र किया है। एजेंसी का मानना है कि अगले वित्तीय वर्ष (FY27) में बिक्री की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है और थोक बिक्री की ग्रोथ 3 से 5 प्रतिशत के दायरे में रहने की संभावना है। इसकी मुख्य वजह यह है कि पिछले साल की बिक्री का स्तर पहले ही बहुत ऊंचा रहा है। इससे आगे और बड़ी बढ़त हासिल करना चुनौतीपूर्ण होगा।

इसके अलावा, कुछ बाहरी कारकों ने भी चिंता बढ़ा दी है। अल नीनो के प्रभाव के कारण खराब मानसून की आशंका जताई जा रही है। इससे खेती-किसानी प्रभावित हो सकती है और नतीजतन ग्रामीण इलाकों से आने वाली डिमांड में कमी आ सकती है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भी इंडस्ट्री की चिंता बढ़ाई है। इस विवाद की वजह से सप्लाई चेन में बाधा आने और निर्यात पर असर पड़ने का जोखिम बना हुआ है। इस पर फिलहाल पूरे ऑटो जगत की पैनी नजर है।

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