Taxi Drivers Protest: दिल्ली में टैक्सी चालकों का प्रदर्शन, बाइक टैक्सी पर रोक की मांग
एप-बेस्ड कैब ड्राइवरों और पारंपरिक कैब ड्राइवरों ने शनिवार को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। जिसमें उन्होंने इस सेक्टर को विनियमित करने और बाइक टैक्सियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।
विस्तार
दिल्ली में टैक्सी चालकों ने शनिवार को जंतर-मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में एप-बेस्ड कैब ड्राइवरों के साथ-साथ पारंपरिक टैक्सी चालकों ने हिस्सा लिया और सेक्टर के लिए स्पष्ट नियम बनाने और बाइक टैक्सी पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।
दिल्ली में टैक्सी ड्राइवरों का प्रदर्शन क्यों?
टैक्सी चालकों का कहना है कि एप-बेस्ड सेवाओं के आने के बाद सेक्टर में कीमतों, नीतियों और रोजगार को लेकर असंतुलन पैदा हो गया है। उनका आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में ड्राइवरों को न तो उचित सुरक्षा मिलती है और न ही उनकी आय स्थिर रह पाती है।
प्रदर्शन में किन संगठनों ने हिस्सा लिया?
यह प्रदर्शन राष्ट्रीय चालक संयुक्त मोर्चा समिति और ऑल दिल्ली ऑटो टैक्सी कांग्रेस यूनियन के बैनर तले किया गया। अलग-अलग टैक्सी यूनियनों से जुड़े ड्राइवरों ने एकजुट होकर अपनी मांगें सामने रखीं।
ड्राइवरों की मुख्य मांगें क्या हैं?
ड्राइवर यूनियनों ने केंद्र सरकार के सामने कई अहम मांगें रखीं, जिनमें शामिल हैं:
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ड्राइवरों के कल्याण के लिए राष्ट्रीय चालक आयोग का गठन
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पूरे देश में निजी बाइक टैक्सी पर तत्काल प्रतिबंध
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एप-बेस्ड प्लेटफॉर्म पर लागू सर्ज प्राइसिंग की समीक्षा
यूनियन नेताओं का कहना है कि सर्ज प्राइसिंग का फायदा ड्राइवरों को नहीं मिलता। लेकिन आम लोगों को लगता है कि ड्राइवर ज्यादा कमाई कर रहे हैं।
बाइक टैक्सी पर प्रतिबंध की मांग क्यों उठी?
ड्राइवरों का आरोप है कि निजी वाहनों को टैक्सी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे लाइसेंस प्राप्त टैक्सी और ऑटो चालकों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है।
उनका कहना है कि बाइक टैक्सी और निजी कारों के जरिए टैक्सी सेवा देना नियमों के खिलाफ है और इससे असमान प्रतिस्पर्धा पैदा हो रही है।
ऑल दिल्ली ऑटो टैक्सी कांग्रेस यूनियन के अध्यक्ष किशन वर्मा ने कहा कि उनकी मांगों की सूची नितिन गडकरी को सौंपी जाएगी।
ड्राइवरों को उम्मीद है कि सरकार इस सेक्टर को नियंत्रित और पारदर्शी बनाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।
दिल्ली में टैक्सी चालकों का यह प्रदर्शन साफ संकेत देता है कि परिवहन सेक्टर में तेजी से बदलती तकनीक और नीतियों के बीच ड्राइवर खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब निगाहें सरकार पर टिकी हैं कि वह नियमन, रोजगार सुरक्षा और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को लेकर क्या फैसला करती है।