Economic Survey 2026: वैश्विक बाजार में बढ़ा भरोसा, भारतीय ऑटो उद्योग ने छुआ रिकॉर्ड निर्यात स्तर
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने गुरुवार को कहा कि भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर ग्लोबल मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। 53 लाख यूनिट का निर्यात आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि भारत के ऑटो उद्योग की बदलती वैश्विक पहचान का संकेत है। सर्वे यह साफ करता है कि भारत अब केवल घरेलू जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के लिए वाहन बनाने वाला एक प्रमुख देश बन चुका है।
विस्तार
भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग अब सिर्फ सस्ती मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र नहीं रह गया है। कारों, दोपहिया वाहनों, बसों और ट्रकों के निर्यात के जरिए भारत तेजी से एक भरोसेमंद वैश्विक ऑटो एक्सपोर्ट हब के रूप में उभर रहा है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26, जिसे 29 जनवरी 2026 को संसद में पेश किया गया, यह दिखाता है कि महामारी के बाद भारतीय ऑटो उद्योग ने स्थिर और मजबूत रफ्तार पकड़ी है। उत्पादन बढ़ा है, फैक्ट्रियां पहले से ज्यादा क्षमता पर चल रही हैं और भारतीय वाहनों की मांग अब देश की सीमाओं से बाहर भी तेजी से बढ़ रही है।
FY25 में ऑटो निर्यात 53 लाख यूनिट के पार
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत से 53 लाख से ज्यादा वाहन निर्यात किए गए। इसमें पैसेंजर व्हीकल, कमर्शियल व्हीकल, टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सभी शामिल हैं।
सिर्फ इतना ही नहीं, FY26 की पहली छमाही में भी ऑटो एक्सपोर्ट में डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई है। सर्वे के अनुसार, इसका बड़ा कारण यह है कि वैश्विक बाजारों में भारत में बने वाहनों को लेकर भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
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10 साल में उत्पादन में करीब 33% की बढ़ोतरी
सर्वे बताता है कि FY15 से FY25 के बीच भारत का कुल वाहन उत्पादन लगभग 33 प्रतिशत बढ़ा है।
कोविड के बाद मांग में आई तेज रिकवरी ने इस ग्रोथ को मजबूती दी। जैसे-जैसे लोग फिर से ऑफिस, यात्रा और रोजमर्रा की आवाजाही में लौटे, वाहनों की बिक्री बढ़ी और उसके साथ उत्पादन भी।
आज भारत की स्थिति इस तरह है-
- दुनिया का सबसे बड़ा टू-व्हीलर बाजार
- दुनिया का सबसे बड़ा थ्री-व्हीलर बाजार
- पैसेंजर और कमर्शियल व्हीकल्स में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार
यह पैमाना ऑटो कंपनियों को नए प्लेटफॉर्म, इंजन और इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजी में निवेश का भरोसा देता है।
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3 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रहा ऑटो सेक्टर
- इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, ऑटोमोबाइल सेक्टर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है।
- इसके अलावा, यह सेक्टर देश के कुल जीएसटी कलेक्शन में करीब 15 प्रतिशत का योगदान करता है।
यानी फैक्ट्री से लेकर डीलरशिप, सर्विस सेंटर और ऑटो पार्ट्स सप्लायर तक, यह उद्योग एक बड़े आर्थिक तंत्र को सहारा देता है।
सरकारी योजनाओं से EV को मिला बड़ा सहारा
सर्वे में उन सरकारी योजनाओं का भी जिक्र किया गया है, जिनसे इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा मिला है। इनमें शामिल हैं-
- ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए PLI स्कीम
- एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए PLI स्कीम
- पीएम ई-ड्राइव योजना
- पीएम ई-बस सेवा पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म
- मार्च 2024 में अधिसूचित इलेक्ट्रिक पैसेंजर कार मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम
इन योजनाओं ने कंपनियों को ईवी और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को देश में ही लोकलाइज करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
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सड़कों पर दिख रहा EV ग्रोथ का असर
नीतियों का असर अब सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। इलेक्ट्रिक स्कूटर, कारें और बसें तेजी से शहरी ट्रैफिक का हिस्सा बन रही हैं। इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, आने वाले वर्षों में भारत का ऑटो सेक्टर निर्यात, रोजगार और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, तीनों मोर्चों पर और मजबूत होने की स्थिति में है।
क्या बताती है तस्वीर
53 लाख यूनिट का निर्यात आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि भारत के ऑटो उद्योग की बदलती वैश्विक पहचान का संकेत है। इकोनॉमिक सर्वे यह साफ करता है कि भारत अब केवल घरेलू जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के लिए वाहन बनाने वाला एक प्रमुख देश बन चुका है।