Economic Survey: भारत का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार छह साल में 63% CAGR से बढ़ा, आर्थिक सर्वेक्षण में दिखी रफ्तार
पिछले छह वर्षों में भारत के इलेक्ट्रिक वाहन सेगमेंट में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इकोनॉमिक सर्वे 2026 यह संकेत देता है कि भारत का ईवी सेक्टर अब शुरुआती दौर से निकलकर तेज और टिकाऊ विकास के रास्ते पर है। मजबूत नीतियां, बढ़ता निवेश और उपभोक्ताओं का भरोसा मिलकर आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक ईवी बाजार में एक अहम खिलाड़ी बना सकते हैं।
विस्तार
भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) सेक्टर ने बीते छह वर्षों में तेज रफ्तार से विस्तार किया है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, इस अवधि में ईवी सेगमेंट ने 63 प्रतिशत की कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज की है। यह सर्वे 29 जनवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किया गया।
FY25 में EV रजिस्ट्रेशन करीब 20 लाख यूनिट
सर्वे के मुताबिक, FY25 में देशभर में कुल ईवी रजिस्ट्रेशन बढ़कर 19.7 लाख यूनिट्स तक पहुंच गए। यह FY24 के 16.8 लाख यूनिट्स के मुकाबले 16.9 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी को दर्शाता है। FY20 में यह आंकड़ा सिर्फ 1 से 2 लाख यूनिट्स के बीच था, जिससे ईवी अपनाने की तेज रफ्तार साफ झलकती है।
इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों ने पहली बार 1 लाख का आंकड़ा पार किया
FY25 में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों के रजिस्ट्रेशन पहली बार 1 लाख यूनिट के पार पहुंच गए। यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 18 प्रतिशत की वृद्धि है, जो बताती है कि निजी कार खरीदारों के बीच भी EV को लेकर भरोसा बढ़ रहा है।
EV ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बने इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर इस सेगमेंट में सबसे मजबूत स्तंभ बने हुए हैं। FY25 में इनके रजिस्ट्रेशन 21 प्रतिशत बढ़कर 11.5 लाख यूनिट्स हो गए। सर्वे के अनुसार, किफायती कीमत, शहरी उपयोग और बेहतर चार्जिंग विकल्पों के चलते टू-व्हीलर ईवी अपनाने में सबसे आगे हैं।
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PLI स्कीम से मैन्युफैक्चरिंग और निवेश को बढ़ावा
EV ग्रोथ के पीछे केंद्र सरकार की कई नीतिगत पहलों की अहम भूमिका रही है। इनमें ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स सेक्टर के लिए सितंबर 2021 में मंजूर की गई प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) (पीएलआई) स्कीम प्रमुख है। 25,938 करोड़ रुपये के इस कार्यक्रम के तहत सितंबर 2025 तक 35,657 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया जा चुका है।
ACC बैटरी PLI से लोकल बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती
एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए लागू पीएलआई स्कीम के तहत 18,100 करोड़ रुपये के निवेश से 50 GWh क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 40 GWh क्षमता आवंटित की जा चुकी है, जिससे बैटरी मैन्युफैक्चरिंग का लोकलाइजेशन और घरेलू ईवी इकोसिस्टम मजबूत हुआ है।
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PM E-Drive स्कीम से नए EV सेगमेंट को सपोर्ट
सितंबर 2024 में शुरू की गई PM E-Drive (पीएम ई-ड्राइव) योजना के तहत 10,900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह योजना इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के साथ-साथ नए सेगमेंट जैसे ई-ट्रक और ई-एंबुलेंस को भी प्रोत्साहन देती है। इसके अलावा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और वाहन परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए भी फंडिंग शामिल है।
PM e-Bus Sewa स्कीम से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का विद्युतीकरण
अक्तूबर 2024 में अधिसूचित PM e-Bus (पीएम ई-बस) सेवा-पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म (PSM) स्कीम के तहत 3,435.33 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना का लक्ष्य 38,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती को सपोर्ट करना है, ताकि ऑपरेटर्स और OEMs को भुगतान सुरक्षा मिल सके।
उद्योग संगठनों का भरोसा
ऑटो इंडस्ट्री बॉडी सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफेक्चर्रस (SIAM) पहले ही यह कह चुकी है कि सरकार की नीतिगत पहलें और निर्माताओं द्वारा लगातार नए ईवी मॉडल लॉन्च किए जाने से देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को मजबूत रफ्तार मिली है।
नतीजा
इकोनॉमिक सर्वे 2026 यह संकेत देता है कि भारत का ईवी सेक्टर अब शुरुआती दौर से निकलकर तेज और टिकाऊ विकास के रास्ते पर है। मजबूत नीतियां, बढ़ता निवेश और उपभोक्ताओं का भरोसा मिलकर आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक ईवी बाजार में एक अहम खिलाड़ी बना सकते हैं।
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