EV Charging: एक चार्ज में ज्यादा चलेगा आपका इलेक्ट्रिक दोपहिया, बस अपनाएं ये स्मार्ट तरीके
भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर अब सिर्फ ट्रेंड नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बनने की दिशा में बढ़ चुके हैं। लेकिन कई राइडर्स की सबसे बड़ी शिकायत यही रहती है कि एक चार्ज में स्कूटर उतना नहीं चलता जितना दावा किया जाता है। असल में, सही राइडिंग स्टाइल, चार्जिंग आदतों और छोटी-छोटी समझदारी भरी बातों से आप अपने ई-स्कूटर की रियल-वर्ल्ड रेंज काफी हद तक बढ़ा सकते हैं। अगर आप भी हर चार्ज से ज्यादा दूरी निकालना चाहते हैं, तो ये टिप्स आपके काम आएंगे।
विस्तार
भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर अब रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल हो रहे हैं। दफ्तर, मेट्रो स्टेशन और मोहल्लों में इनकी मौजूदगी नजर आनी शुरू हो गई है। पेट्रोल स्कूटर से शिफ्ट करने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही रहता है, एक चार्ज में ज्यादा से ज्यादा दूरी कैसे तय की जाए? यहां हम आपको कुछ अहम टिप्स बता रहे हैं, जिसकी मदद से भारतीय रोड और ट्रैफिक के हालात को ध्यान में रखते आप अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर के रेंज को बेहतर बना सकते हैं।
क्या आपकी राइडिंग स्टाइल रेंज पर असर डालती है?
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इलेक्ट्रिक स्कूटर का थ्रॉटल तुरंत पावर देता है, लेकिन तेज एक्सेलेरेशन बैटरी तेजी से खत्म करता है।
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स्मूद एक्सेलेरेशन और एक समान स्पीड बनाए रखने से रियल-वर्ल्ड रेंज बढ़ती है।
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ट्रैफिक में आगे का सिग्नल देखकर पहले ही थ्रॉटल छोड़ दें।
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अचानक ब्रेक लगाने से बचें, इससे एनर्जी वेस्ट होती है।
राइडिंग मोड का सही इस्तेमाल क्यों जरूरी है?
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ज्यादातर ई-स्कूटर में इको, राइड और स्पोर्ट मोड होते हैं।
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इको मोड पावर और टॉप स्पीड सीमित करता है, जिससे बैटरी बचती है।
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दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू जैसे शहरों में डेली कम्यूट के लिए इको मोड काफी है।
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स्पोर्ट मोड का इस्तेमाल केवल खाली सड़क या ओवरटेकिंग के समय करें।
टायर प्रेशर को नजरअंदाज करना कितना नुकसानदेह है?
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कम हवा वाले टायर रोलिंग रेजिस्टेंस बढ़ाते हैं।
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मोटर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे बैटरी जल्दी खत्म होती है।
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हर 10-15 दिन में टायर प्रेशर चेक करें।
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भारतीय सड़कों और मौसम में प्रेशर जल्दी कम हो सकता है।
क्या वजन सच में रेंज कम करता है?
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अतिरिक्त बैग, सामान या लगातार पिलियन राइड से बैटरी ड्रेन तेज होता है।
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लंबी दूरी के लिए निकलते समय हल्का सामान रखें।
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कम वजन का मतलब है बेहतर एफिशिएंसी।
मौसम और पार्किंग का क्या रोल है?
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तेज धूप में लंबे समय तक खड़ा स्कूटर बैटरी एफिशिएंसी घटा सकता है।
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जहां संभव हो, स्कूटर को छांव में पार्क करें।
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मानसून में गहरे पानी से बचें- यह इलेक्ट्रिकल पार्ट्स और एफिशिएंसी दोनों के लिए खराब है।
चार्जिंग की सही आदतें कौन-सी हैं?
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बार-बार बैटरी को 0 प्रतिशत तक ड्रेन न करें।
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रोजाना इस्तेमाल के लिए बैटरी को 20 प्रतिशत – 80 प्रतिशत के बीच रखना बेहतर है।
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फास्ट चार्जिंग सुविधाजनक है, लेकिन डेली होम चार्जिंग के लिए नॉर्मल चार्ज ज्यादा सुरक्षित है।
क्या सॉफ्टवेयर अपडेट से भी फर्क पड़ता है?
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कई बार कंपनी सॉफ्टवेयर अपडेट में बैटरी मैनेजमेंट और एफिशिएंसी सुधारती है।
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समय-समय पर स्कूटर का सॉफ्टवेयर अपडेट जरूर कराएं।
छोटी आदतें कैसे बड़ा असर डालती हैं?
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गैर-जरूरी एक्सेसरी हटाएं जो वजन या ड्रैग बढ़ाती हैं।
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धीमी ट्रैफिक में ब्रेक दबाकर न चलाएं- यह अनजाने में होता है और रेंज घटाता है।
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अगर स्कूटर में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग है, तो धीरे-धीरे स्लो डाउन करें ताकि एनर्जी रिकवर हो सके।
क्या रूट प्लानिंग भी बैटरी बचाती है?
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भारी ट्रैफिक, जाम और कंस्ट्रक्शन जोन बैटरी ज्यादा खपत करते हैं।
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नेविगेशन ऐप से कम भीड़ वाला रास्ता चुनें।
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स्टॉप-एंड-गो राइडिंग, स्मूद राइडिंग से ज्यादा बैटरी खाती है।
मेंटेनेंस कितना जरूरी है?
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इलेक्ट्रिक स्कूटर पेट्रोल जितने मेंटेनेंस-हेवी नहीं हैं, लेकिन पूरी तरह मेंटेनेंस-फ्री भी नहीं।
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ब्रेक, टायर और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की नियमित जांच जरूरी है।
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बैटरी को ज्यादा गर्मी और डीप डिस्चार्ज से बचाएं।
ड्राइविंग आदत पर बहुत कुछ निर्भर
कंपनियों द्वारा बताई गई रेंज लैब कंडीशन में टेस्ट होती है। असली भारतीय सड़कों पर रेंज आपकी आदतों पर निर्भर करती है। स्मूद राइडिंग, समझदारी से चार्जिंग और सही मेंटेनेंस- यही ज्यादा रेंज का असली मंत्र है।