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यूरोप में बढ़ा Made in India गाड़ियों का वर्चस्व: एक्सपोर्ट 18000+ करोड़ के पार, क्या FTA से मिलेगी और रफ्तार?
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति
Updated Fri, 20 Feb 2026 12:45 PM IST
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सार
Automobile Export Data 2025-26: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बढ़ते व्यापारिक रिश्तों का असर अब आंकड़ों में दिखने लगा है। ऑटोमोबाइल से लेकर अनाज तक, भारतीय उत्पादों ने यूरोपीय बाजारों में अपनी धाक जमा ली है। जानिए क्या हैं सरकार के ताजा आंकड़ें ...
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : adobe stock
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विस्तार
वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों (अप्रैल-दिसंबर) में भारत का ऑटोमोटिव निर्यात यूरोपीय संघ को 2.2 बिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा के अनुसार करीब 18 हजार करोड़ से भी अधिक तक पहुंच गया है। पिछले साल ये आंकड़ा 1.6 बिलियन डॉलर था। अब भारत के कुल वैश्विक ऑटो निर्यात में यूरोप की हिस्सेदारी अब बढ़कर 11.6% हो गई है।
यूरोप में भारतीय गाड़ियों का जलवा
भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए यूरोप एक प्रीमियम और कड़े नियमों वाला बाजार माना जाता है।
एक्सपोर्ट में वृद्धि: पिछले साल के मुकाबले इस साल ऑटो एक्सपोर्ट में जबरदस्त तेजी आई है।
वैश्विक दबदबा: भारत का कुल वैश्विक ऑटोमोटिव निर्यात 19.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल 16.8 बिलियन डॉलर था।
बढ़ती हिस्सेदारी: वैश्विक स्तर पर भारत जो भी ऑटो उत्पाद बेच रहा है, उसका एक बड़ा हिस्सा अब अकेले यूरोपीय देश खरीद रहे हैं।
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ऑटोमोबाइल गैजेट सेगमेंट के लिए क्या मायने?
EU में बढ़ती हिस्सेदारी का मतलब है कि भारतीय ऑटो कंपनियां यूरोपीय सेफ्टी और एमिशन स्टैंडर्ड्स के अनुरूप प्रोडक्ट बना रही हैं। ईवी, हाइब्रिड और एडवांस ऑटो कंपोनेंट्स की मांग बढ़ रही है और ग्लोबल वैल्यू चेन में भारत की स्थिति मजबूत हो रही है। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, स्मार्ट ऑटो टेक्नोलॉजी और प्रीमियम कंपोनेंट्स निर्यात ग्रोथ के प्रमुख ड्राइवर बन सकते हैं।
सिर्फ कारें ही नहीं, खेती में भी तेजी
यूरोपीय संघ को होने वाले कृषि निर्यात में भी कमाल की तेजी देखी गई है:
अनाज का जादू: अनाज का निर्यात लगभग दोगुना होकर 339 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
इन उत्पादों की मांग: मछली, कॉफी, चाय, मसाले और रेजिन के निर्यात में भी स्वस्थ सुधार दर्ज किया गया है।
ये भी पढ़े: Road Safety: दिल्ली हादसे ने दिखाई भारत में सड़क सुरक्षा की हकीकत, सबसे ज्यादा खतरे में दोपहिया सवार
क्या एफटीए से और तेज होगी रफ्तार?
अधिकारियों के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में संपन्न हुए व्यापार समझौते से भविष्य और भी सुनहरा नजर आ रहा है। हाल ही में समाप्त हुए भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से निर्यात में और तेजी आने की उम्मीद है। जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलने से भारतीय ऑटो और कृषि उत्पाद यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। इससे टैरिफ बाधाएं कम या खत्म होने की उम्मीद है।टैक्स कम होने से भारतीय गाड़ियां और कृषि उत्पाद यूरोपीय बाजार में चीन या अन्य देशों के मुकाबले सस्ते और बेहतर विकल्प बनकर उभरेंगे। साथ ही एमएसएमई निर्यातकों को नया बाजार मिलेगा और सप्लाई चेन इंटीग्रेशन मजबूत होगा।
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भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए यूरोप एक प्रीमियम और कड़े नियमों वाला बाजार माना जाता है।
एक्सपोर्ट में वृद्धि: पिछले साल के मुकाबले इस साल ऑटो एक्सपोर्ट में जबरदस्त तेजी आई है।
वैश्विक दबदबा: भारत का कुल वैश्विक ऑटोमोटिव निर्यात 19.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल 16.8 बिलियन डॉलर था।
बढ़ती हिस्सेदारी: वैश्विक स्तर पर भारत जो भी ऑटो उत्पाद बेच रहा है, उसका एक बड़ा हिस्सा अब अकेले यूरोपीय देश खरीद रहे हैं।
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EU में बढ़ती हिस्सेदारी का मतलब है कि भारतीय ऑटो कंपनियां यूरोपीय सेफ्टी और एमिशन स्टैंडर्ड्स के अनुरूप प्रोडक्ट बना रही हैं। ईवी, हाइब्रिड और एडवांस ऑटो कंपोनेंट्स की मांग बढ़ रही है और ग्लोबल वैल्यू चेन में भारत की स्थिति मजबूत हो रही है। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, स्मार्ट ऑटो टेक्नोलॉजी और प्रीमियम कंपोनेंट्स निर्यात ग्रोथ के प्रमुख ड्राइवर बन सकते हैं।
सिर्फ कारें ही नहीं, खेती में भी तेजी
यूरोपीय संघ को होने वाले कृषि निर्यात में भी कमाल की तेजी देखी गई है:
अनाज का जादू: अनाज का निर्यात लगभग दोगुना होकर 339 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
इन उत्पादों की मांग: मछली, कॉफी, चाय, मसाले और रेजिन के निर्यात में भी स्वस्थ सुधार दर्ज किया गया है।
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क्या एफटीए से और तेज होगी रफ्तार?
अधिकारियों के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में संपन्न हुए व्यापार समझौते से भविष्य और भी सुनहरा नजर आ रहा है। हाल ही में समाप्त हुए भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से निर्यात में और तेजी आने की उम्मीद है। जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलने से भारतीय ऑटो और कृषि उत्पाद यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। इससे टैरिफ बाधाएं कम या खत्म होने की उम्मीद है।टैक्स कम होने से भारतीय गाड़ियां और कृषि उत्पाद यूरोपीय बाजार में चीन या अन्य देशों के मुकाबले सस्ते और बेहतर विकल्प बनकर उभरेंगे। साथ ही एमएसएमई निर्यातकों को नया बाजार मिलेगा और सप्लाई चेन इंटीग्रेशन मजबूत होगा।
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