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Road Safety: नई दिल्ली रोड सेफ्टी डिक्लेरेशन, 2030 तक सड़क हादसों में मौतें 50 प्रतिशत घटाने का लक्ष्य

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुयश पांडेय Updated Fri, 20 Feb 2026 01:07 PM IST
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सार

Road Safety Declaration: आईआईटी दिल्ली में आयोजित नेशनल रोड सेफ्टी कॉन्फ्लुएंस के दौरान 'नई दिल्ली रोड सेफ्टी डिक्लेरेशन' जारी किया गया। इसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को 50 प्रतिशत तक कम करना है। यह लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र के 'डिकेड ऑफ एक्शन' के अनुरूप रखा गया है।

New Delhi Road Safety Declaration Aims to Cut Road Accident Deaths by 50% in India by 2030
आईआईटी दिल्ली में आयोजित नेशनल रोड सेफ्टी कॉन्फ्लुएंस के दौरान 'नई दिल्ली रोड सेफ्टी डिक्लेरेशन' जारी किया (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एआई
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विस्तार

भारत में सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में आयोजित नेशनल रोड सेफ्टी कॉन्फ्लुएंस के दौरान 'नई दिल्ली रोड सेफ्टी डिक्लेरेशन' जारी किया गया। इस घोषणा का मुख्य लक्ष्य वर्ष 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम से कम 50 प्रतिशत तक घटाना है। यह लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के 'डिकेड ऑफ एक्शन' के अनुरूप रखा गया है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत में पहली बार राष्ट्रीय राजमार्गों पर घातक सड़क दुर्घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। अप्रैल से जनवरी के बीच घातक दुर्घटनाओं में 3 प्रतिशत और मौतों में 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। ये एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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भारत में सड़क हादसों की गंभीर स्थिति

भारत दुनिया में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों की संख्या के मामले में सबसे ऊपर है। वर्ष 2024 में देश में 1.73 लाख से अधिक लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि ठोस और संगठित कार्यान्वयन की जरूरत है। रोड ट्रांसपोर्ट और हाईवे मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर ने कहा कि यह गिरावट एक सकारात्मक पहलू हो सकता है लेकिन अभी भी नियमों के पालन में बड़ी कमी है। उन्होंने कहा कि केवल जागरूकता से बदलाव नहीं आता बल्कि नियमों का सख्ती से पालन और उनका प्रभावी लागू होना जरूरी है।

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चालान नियमों में सख्ती, अनुपालन बढ़ाने पर जोर

सरकार ने ट्रैफिक नियमों के पालन को मजबूत बनाने के लिए नए कदम भी उठाए हैं। वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक चालानों में से केवल 38 प्रतिशत का ही भुगतान होता है। इससे अदालतों पर दबाव बढ़ता है और नियमों का डर कम होता है। अब नए नियमों के तहत तय समय सीमा के बाद बिना भुगतान वाले चालान स्वतः स्वीकार माने जाएंगे। इसके साथ ही वाहन पंजीकरण निलंबित करने जैसी अतिरिक्त सजा भी दी जा सकती है। इसका उद्देश्य नियमों का पालन सुनिश्चित करना और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाना है।

पांच प्रमुख स्तंभों पर आधारित है रोड सेफ्टी डिक्लेरेशन

नई दिल्ली रोड सेफ्टी डिक्लेरेशन में सड़क सुरक्षा सुधार के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस किया गया है:

  • बेहतर रोड सेफ्टी मैनेजमेंट
  • सुरक्षित वाहन
  • जिम्मेदार और सुरक्षित सड़क उपयोगकर्ता
  • दुर्घटना के बाद तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया
  • सुरक्षित सड़क और ड्राइविंग वातावरण

इन सभी क्षेत्रों में समन्वित प्रयासों से दुर्घटनाओं को कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

सुरक्षित सिस्टम और बेहतर डेटा की जरूरत

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के ग्लोबल रोड सेफ्टी प्रोग्राम से जुड़े विशेषज्ञ मैट्स-आके बेलिन ने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए 'सेफ सिस्टम' दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। इसका मतलब है कि सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया जाए कि मानव गलती के बावजूद जान का नुकसान न हो। वहीं मारुति सुजुकी के पूर्व सीटीओ सीवी रमन ने कहा कि जिला स्तर पर दुर्घटनाओं के डेटा की पारदर्शिता जरूरी है। इससे दुर्घटनाओं के कारणों को समझने और ब्लैक स्पॉट या इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को पहचानने में मदद मिलेगी।

बंगलूरू-मैसूर मॉडल बना उदाहरण

वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (डब्लूआरआई) इंडिया के विशेषज्ञ श्रीनिवास अलाविल्ली ने बेंगलुरु-मैसूर मार्ग का उदाहरण देते हुए बताया कि सही डिजाइन और छोटे-छोटे सुधारों से सड़क दुर्घटनाओं में शून्य मौतों तक कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं को पूरी तरह रोकना मुश्किल हो सकता है लेकिन सही सिस्टम से मौतों को रोका जा सकता है।

भारत के लिए बड़ा अवसर

नई दिल्ली रोड सेफ्टी डिक्लेरेशन भारत के लिए सड़क सुरक्षा में बड़ा बदलाव लाने का अवसर है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सही तरीके से नियम लागू किए जाएं, बेहतर सड़क डिजाइन अपनाई जाए और डेटा आधारित निर्णय लिए जाएं तो आने वाले वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों में बड़ी कमी लाई जा सकती है। यह पहल भारत को एक सुरक्षित और जिम्मेदार परिवहन प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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