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गाड़ियों का भी बनेगा डिजिटल पासपोर्ट: SIAM सस्टेनेबिलिटी वीक में बड़ा खुलासा, बदल जाएंगे रिसाइक्लिंग के नियम

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Fri, 20 Feb 2026 10:30 AM IST
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सार

SIAM Sustainability Week 2026: सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने सस्टेनेबिलिटी वीक 2026 का समापन अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस (एएमसीएस) के साथ किया। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को ऑटोमोटिव रिसाइक्लिंग और एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल (ईएलवी) नियमों के मामले में ग्लोबल बेंचमार्क बनाना रहा। 
 

SIAM Sustainability Week 2026: What happen old vehicles? major update circular economy new ELV rules India
सस्टेनेबिलिटी वीक 2026 का समापन - फोटो : siam.in
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विस्तार

दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के रूप में भारत अब मटेरियल स्टीवर्डशिप और डीकार्बोनाइजेशन के ग्लोबल मानकों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स ने अपनी सस्टेनेबिलिटी वीक 2026 वीक का समापन बृहस्पतिवार को किया। इस दौरान एएमसीएस पर पहली अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित कर उद्योग को संदेश देते हुए कहा कि भविष्य सर्कुलर और डिजिटल होगा।

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क्या हैं नए ईएलवी रूल्स 2025?
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रशांत के बनर्जी के अनुसार, एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल्स (ELV) रूल्स, 2025 गेम चेंजर साबित होंगे:
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व्यवस्थित स्क्रैपेज: अब पुरानी गाड़ियों को कबाड़ में फेंकने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से स्क्रैप किया जा सकेगा।
रिसोर्स रिकवरी: गाड़ियों के पुर्जों से कीमती मेटल और मटेरियल निकालकर उन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा।
डीकार्बोनाइजेशन: पूरी वैल्यू चेन में कार्बन उत्सर्जन को कम करने पर जोर दिया जाएगा।

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मापनीय सस्टेनेबिलिटी टूल्स की मांग
इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (ICAT) के सीनियर एडवाइजर जयवंत हरडीकर ने कहा कि व्हीकल एंड-ऑफ-लाइफ प्रोसेस को रीयूज और रिसाइक्लिंग से सीधे जोड़ा जाना चाहिए। इसपर उन्होंने दो प्रमुख डिजिटल टूल्स पर जोर दिया। पहला डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट और दूसरा सस्टेनबल इंडक्स। 
डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट: इससे हर वाहन के मटेरियल और कार्बन डाटा का ट्रैक होगा।
सस्टेनबल इंडक्स: इससे कार्बन फुटप्रिंट और मटेरियल कॉम्प्लायंस का मापन होगा।
इन टूल्स से ईएसजी रिपोर्टिंग अधिक पारदर्शी और मापनीय बन सकेगी।

ग्रीन मोबिलिटी के लिए पॉलिसी पुश
होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया के डायरेक्टर-परचेज संजीव जैन के अनुसार, भारत में ग्रीन मोबिलिटी की ओर बदलाव अब बाजार की मांग से ज्यादा सरकारी नीतियों की ओर संचालित हो रहा है। सरकार ने एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) के तहत कंपनियों को अपने उत्पादों के पूरे लाइफ-साइकिल उत्पादन से लेकर डिस्पोजल तक की जिम्मेदारी लेने को कहा है। इसके साथ ही स्क्रैपेज नॉर्म्स पुराने और प्रदूषणकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने को बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि सीएएफई (कॉर्पोरेट औसत ईंधन अर्थव्यवस्था) स्टैंडर्ड्स वाहन निर्माताओं पर औसत ईंधन दक्षता बढ़ाने का दबाव बना रहे हैं। इन नीतिगत कदमों से उद्योग को साफ और ऊर्जा-कुशल तकनीकों की ओर तेजी से बढ़ना पड़ रहा है।

उन्होंने यह भी साफ किया कि ऑटो सेक्टर का अगला विकास चरण इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs), फ्लेक्स फ्यूल तकनीक, ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी और सस्टेनेबल लॉजिस्टिक्स जैसे स्वच्छ विकल्पों पर आधारित होगा। यानी भविष्य का ऑटोमोबाइल इकोसिस्टम कम कार्बन उत्सर्जन, बेहतर ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय जवाबदेही के सिद्धांतों पर खड़ा होगा।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ी सप्लाई चेन ट्रांसपेरेंसी
इस बार डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन कॉन्फ्रेंस का प्रमुख एजेंडा रहा। डीएक्ससी टेक्नोलॉजी के फ्रैंक नॉटेबॉम ने बताया कि इंटरनेशनल मटेरियल डाटा सिस्टम में भारतीय यूजर्स तेजी से बढ़े हैं। कैटेना-एक्स के हन्नो फोकेन ने ओपन, इंडस्ट्री-गवर्न्ड डिजिटल इकोसिस्टम्स की जरूरत बताई, ताकि जटिल ग्लोबल वैल्यू चेन को प्रभावी ढंग से मैनेज किया जा सके। इसका मतलब है कि भारत अब केवल मैन्युफैक्चरिंग हब नहीं, बल्कि डेटा-ड्रिवन सस्टेनेबल इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है।
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