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Hindi News ›   Automobiles News ›   India’s Auto Component Sector Grows 12.7% in FY26, but Rising Imports Widen Trade Deficit: ACMA Report

Auto Components: ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री में 12.7% की शानदार ग्रोथ, लेकिन आयात बढ़ने से व्यापार घाटा भी बढ़ा

Tue, 07 Jul 2026 09:02 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Tue, 07 Jul 2026 09:02 PM IST
सार

भारत का ऑटो कंपोनेंट उद्योग वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में मजबूत वृद्धि दर्ज करने में सफल रहा। ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) की रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग में 12.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

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India’s Auto Component Sector Grows 12.7% in FY26, but Rising Imports Widen Trade Deficit: ACMA Report
Automotive Component Industry - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के साथ-साथ गाड़ी के कल-पुर्जे बनाने वाले उद्योग ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) में दमदार प्रदर्शन किया है। 'ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (ACMA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस सेक्टर ने 12.7 प्रतिशत की मजबूत विकास दर हासिल की है। हालांकि, इस चमक के पीछे एक चिंता की लकीर भी है। देश का इम्पोर्ट (आयात) हमारे एक्सपोर्ट (निर्यात) के मुकाबले तेजी से बढ़ा है। जिससे व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट) और ज्यादा गहरा गया है। आइए इस रिपोर्ट की अहम बातों को समझते हैं:

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घरेलू बाजार में इस बंपर ग्रोथ की असली वजह क्या रही?

भारत के भीतर ऑटो कंपोनेंट की मांग बढ़ने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े मोर्चे रहे। पहला, नई गाड़ियों का रिकॉर्ड उत्पादन और दूसरा, पुरानी गाड़ियों की मरम्मत का बाजार। इसके मुख्य बिंदुओं की व्याख्या नीचे दी गई है:

  • OEMs (मूल उपकरण निर्माताओं) को रिकॉर्ड सप्लाई:
    पैसेंजर व्हीकल, कमर्शियल व्हीकल और दोपहिया वाहनों के मजबूत घरेलू उत्पादन के दम पर ऑटो कंपोनेंट कंपनियों द्वारा OEMs को की जाने वाली सप्लाई में 16.3 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

  • आफ्टरमार्केट सेगमेंट में 9% का उछाल:
    सड़कों पर गाड़ियों की बढ़ती संख्या और रिपेयर व मेंटेनेंस बाजार के संगठित होने से आफ्टरमार्केट सेगमेंट 9 फीसदी बढ़ा है। इस ग्रोथ के पीछे पुरानी (सेकंडहैंड) गाड़ियों की बढ़ती मांग, बड़े और अधिक पावरफुल वाहनों की तरफ ग्राहकों का झुकाव, और मरम्मत बाजार का तेजी से फॉर्मलाइजेशन होना मुख्य वजह रहा।

  • इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती हिस्सेदारी:
    भविष्य की तकनीक की बात करें तो OEM को होने वाली कुल बिक्री में अकेले ईवी सेगमेंट की हिस्सेदारी 4.6 प्रतिशत दर्ज की गई है।

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निर्यात और आयात के मोर्चे पर भारत का प्रदर्शन कैसा रहा?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कंपोनेंट्स की मांग तो बढ़ी, लेकिन घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी पुर्जों पर निर्भरता और अधिक बढ़ गई:

  • निर्यात में 5% की बढ़ोतरी:
    यूरोप के साथ एक अनुकूल मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की उम्मीदों और यूरोपीय OEM द्वारा भारत से की जाने वाली खरीदारी में तेजी के चलते भारत का एक्सपोर्ट 5 प्रतिशत बढ़ा। भारत से बाहर भेजे जाने वाले सामानों में इंजन कंपोनेंट्स, ड्राइव ट्रांसमिशन और स्टीयरिंग सिस्टम का दबदबा रहा, जो कुल निर्यात के आधे से भी अधिक थे।

  • आयात में 13% का बड़ा उछाल:
    निर्यात के मुकाबले भारत का आयात लगभग 13 प्रतिशत की तेज रफ्तार से बढ़ा। भारत ने सबसे ज्यादा कंपोनेंट्स चीन, जापान और जर्मनी से मंगवाए। इसमें भी ड्राइव ट्रांसमिशन, स्टीयरिंग और इंजन कंपोनेंट्स का योगदान कुल आयात में 56 फीसदी रहा।

  • $1.37 अरब का व्यापार घाटा:
    आयात की रफ्तार निर्यात से तेज होने के चलते भारत को इस सेक्टर में 1.37 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट) झेलना पड़ा है।

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ऑटो कंपोनेंट सेक्टर के लिए आगे बढ़ने के अनुकूल अवसर क्या हैं?

रिपोर्ट में उन सकारात्मक पहलुओं का जिक्र किया गया है जो इस उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं:

  • सरकार का कार्बन न्यूट्रैलिटी पर फोकस:
    पर्यावरण को स्वच्छ रखने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के सरकारी प्रयासों से नए जमाने के कंपोनेंट्स की मांग बढ़ रही है।

  • FTA का विस्तार:
    नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के विस्तार से भारतीय कंपनियों के लिए दुनिया भर के नए बाजार खुल रहे हैं।

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर और घरेलू मांग:
    देश में बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास और घरेलू स्तर पर वाहनों की मजबूत मांग इस सेक्टर के लिए बूस्टर का काम कर रही है।

  • निवेश और नए प्लेयर्स की एंट्री:
    सेक्टर में लगातार बढ़ता निवेश, कंपनियों द्वारा अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार और मोबिलिटी स्पेस में नए खिलाड़ियों की एंट्री से बाजार में सकारात्मक माहौल है।

इस सेक्टर के सामने कौन सी बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं?

उज्ज्वल भविष्य के बावजूद, कुछ वैश्विक और आंतरिक चुनौतियां इस उद्योग की रफ्तार को प्रभावित कर रही हैं:

  • भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं:
    रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया में तनाव, अमेरिकी टैरिफ और चीन के व्यापारिक प्रतिबंधों के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है।

  • कच्चे माल और माल ढुलाई की बढ़ती लागत:
    कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, बीमा और माल ढुलाई के ऊंचे खर्च कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना रहे हैं।

  • संसाधनों और लेबर की कमी:
    आधुनिक वाहनों के लिए जरूरी 'रेयर अर्थ मैगनेट्स' की सीमित उपलब्धता और कुशल श्रमिकों की कमी इस सेक्टर के सामने बड़ी बाधा बनी हुई है।
     

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