Taxi:महाराष्ट्र में Ola, Uber और Rapido के लिए नए नियम लागू! इन राइड्स को कैंसिल करने पर लगेगा 5 गुना जुर्माना
सरकार ने इन सभी ट्रांसपोर्ट एग्रीगेटर्स को 1 सितंबर तक नई नियामकीय प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। तय समय तक नियमों का पालन नहीं करने पर कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ओला (Ola), उबर (Uber) और रैपिडो (Rapido) जैसे ऐप-आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म्स को महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की नई एग्रीगेटर नीति का पालन करने का कड़ा निर्देश दिया है। राज्य सरकार ने सभी ट्रांसपोर्ट एग्रीगेटर्स से कहा है कि वे:
-
महाराष्ट्र एग्रीगेटर पॉलिसी, 2025 और महाराष्ट्र मोटर व्हीकल एग्रीगेटर नियम, 2026 के तहत परिवहन विभाग में अपना पंजीकरण पूरा करें।
-
स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी द्वारा जारी किया गया आधिकारिक लाइसेंस हासिल करें।
सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि बिना वैध रजिस्ट्रेशन के काम करने वाली या नए नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
एग्रीगेटर कंपनियों के लिए 1 सितंबर की समय-सीमा क्यों बेहद अहम है?
परिवहन विभाग के निर्देशानुसार, राइड-हेलिंग कंपनियों को नई नीति के तहत सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने और पंजीकरण की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए एक महीने की मोहलत दी गई है।
-
1 सितंबर की समय-सीमा:
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 1 सितंबर तक नियमों का पालन न करने वाले एग्रीगेटर्स के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। -
कानूनी दायरे में लाना:
राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य लाखों यात्रियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली परिवहन सेवाओं को एक उचित कानूनी ढांचे के तहत लाना है। -
सुरक्षा से कोई समझौता नहीं:
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट किया, "नागरिकों को तकनीक के माध्यम से सुविधाएं अवश्य मिलनी चाहिए। हालांकि, सुविधा के नाम पर किसी को भी कानून का उल्लंघन करने और यात्रियों की सुरक्षा से समझौता करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।"
नए नियमों के लागू होने से Ola, Uber और Rapido के काम-काज में क्या-क्या अनिवार्य बदलाव आएंगे?
महाराष्ट्र में काम करने वाली राइड-हेलिंग कंपनियों के लिए नए नियमों के तहत ये शर्तें अनिवार्य कर दी गई हैं:
-
अधिकारी पंजीकरण और लाइसेंसिंग:
-
परिवहन विभाग में पंजीकरण: सभी एग्रीगेटर्स के लिए महाराष्ट्र परिवहन विभाग में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।
-
लाइसेंस की अनिवार्यता: कंपनियों को स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी से लाइसेंस हासिल करना होगा।
-
हर 3 साल में लाइसेंस का नवीनीकरण: एग्रीगेटर लाइसेंस का हर तीन साल में नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा। बिना इन स्वीकृतियों के कंपनियां राज्य में कानूनी रूप से काम नहीं कर सकेंगी।
-
-
केवल कमर्शियल वाहनों को संचालन की अनुमति:
-
व्यावसायिक पंजीकरण अनिवार्य: केवल उन्हीं वाहनों को एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म पर चलाने की अनुमति होगी जो कमर्शियल पैसेंजर ट्रांसपोर्ट व्हीकल के रूप में पंजीकृत हैं।
-
सभी वैध दस्तावेज आवश्यक: प्रत्येक वाहन के पास वैध कमर्शियल परमिट, वैध बीमा और अन्य सभी आवश्यक परिवहन दस्तावेज होने चाहिए।
-
निजी वाहनों पर पूरी तरह रोक: बिना वैध परमिट वाले निजी या गैर-व्यावसायिक वाहनों को राइड-हेलिंग सेवाएं देने की अनुमति नहीं होगी।
-
खास स्थानों की राइड कैंसल करने पर ड्राइवरों पर क्या कार्रवाई होगी?
महाराष्ट्र मोटर व्हीकल एग्रीगेटर नियम, 2026 के तहत ड्राइवरों द्वारा मनमाने ढंग से राइड रद्द करने की समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है:
-
5 गुना भारी जुर्माना:
यदि कोई ड्राइवर हवाई अड्डे, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे महत्वपूर्ण स्थानों की राइड स्वीकार करने के बाद उसे रद्द करता है, तो उस पर पांच गुना जुर्माना लगाया जाएगा। -
अंतिम समय की असुविधा से बचाव:
इस प्रावधान का मकसद अंतिम समय में होने वाले कैंसिलेशन को रोकना है, जिससे विशेष रूप से आपातकालीन स्थिति या समय-संवेदनशील यात्रा पर निकले यात्रियों को परेशानी न उठानी पड़े।
ड्राइवरों के लिए कौन-सी ट्रेनिंग अनिवार्य कर दी गई है?
-
5-दिवसीय इंडक्शन ट्रेनिंग:
एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स से जुड़े सभी चालकों को सेवा शुरू करने से पहले 5 दिनों का अनिवार्य इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम पूरा करना होगा। -
ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य:
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा में सुधार करना, सेवा की गुणवत्ता बढ़ाना और चालकों को सरकारी व नियामक नियमों के प्रति जागरूक बनाना है।
इस नीति में यात्रियों की सुविधा और एग्रीगेटर्स के लिए और कौन-से प्रमुख नियम शामिल किए गए हैं?
नई नियमावली में यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और जवाबदेही तय करने के लिए कई अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं:
-
शिकायत निवारण प्रणाली:
यात्रियों की समस्याओं और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक प्रभावी तंत्र बनाना अनिवार्य होगा। -
राइड पूलिंग के नियम:
राइड शेयरिंग या पूलिंग सेवाओं के संचालन के लिए स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। -
इलेक्ट्रिक वाहन बेड़े के मानक:
इलेक्ट्रिक वाहनों के बेड़े के रखरखाव और संचालन के लिए अलग मानदंड निर्धारित किए गए हैं। -
जवाबदेही और अनुशासन:
एग्रीगेटर्स के बीच परिचालन अनुशासन बढ़ाने और यात्रियों के प्रति जवाबदेही तय करने के लिए सख्त उपाय लागू किए गए हैं।
महाराष्ट्र सरकार को ये कड़े नियम लागू करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस नए ढांचे को पेश करने के पीछे ये प्रमुख वजहें हैं:
-
सरकारी निगरानी मजबूत करना:
ऐप-आधारित टैक्सी सेवाओं पर सरकारी देखरेख को बेहतर और सख्त बनाना। -
यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करना:
कैब में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना। -
जवाबदेही तय करना:
एग्रीगेटर कंपनियों और ड्राइवरों में अधिक जवाबदेही लाना। -
समान मानक लागू करना:
तेजी से बढ़ रहे राइड-हेलिंग क्षेत्र को विनियमित करना ताकि सभी ऑपरेटर समान सुरक्षा और परिचालन मानकों का सख्ती से पालन करें।
1 सितंबर की समय-सीमा नजदीक आने के साथ ही, ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियों को महाराष्ट्र में अपना संचालन कानूनी रूप से जारी रखने के लिए जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग प्रक्रिया पूरी करनी होगी।