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अमेरिका-ईरान तनाव: युद्ध की वजह से ऑटो सेक्टर पर ब्रेक, भारत समेत एशियाई देशों से कारों का एक्सपोर्ट खतरे में

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Sat, 07 Mar 2026 12:28 PM IST
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सार

Middle East Conflict Auto Industry Impact: अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब ऑटो सेक्टर पर भी पड़ने लगा है। समुद्री रास्तों पर मंडराते खतरे के कारण भारत समेत एशियाई देशों से मिडिल-ईस्ट जाने वाली कारों की डिलीवरी रुकने का डर है। अगर तनाव ऐसा ही रहा तो दुनिया भर में कारों की सप्लाई चेन और कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

Middle East Conflict Disrupts Global Auto Supply Chain, Car Exports from Asia at Risk
कार एक्सपोर्ट (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एक्स
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विस्तार

अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा है। ग्लोबल ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी इसका सीधा असर दिखने लगा है। इस युद्ध से एशिया से मिडिल-ईस्ट को भेजी जाने वाली कारों की डिलीवरी पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

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आखिर कारों की डिलीवरी क्यों रुक रही है?

दरअसल भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की ऑटो कंपनियां अरबों डॉलर की कारें समंदर के रास्ते मिडिल-ईस्ट भेजती हैं। ये शिपमेंट मुख्य रूप से 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज) नाम के समुद्री रास्ते से होती है। लेकिन युद्ध और संभावित हमलों के डर से इस रूट पर कमर्शियल जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। इसी वजह से कारों से लदे जहाज आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

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भारत पर असर: 25% एक्सपोर्ट जाता है मिडिल-ईस्ट

भारत के लिए खाड़ी देश, खासकर सऊदी अरब कारों का एक बहुत बड़ा बाजार हैं। साल 2025 में भारत से कुल 8.8 अरब डॉलर की कारें एक्सपोर्ट हुईं। इनमें से लगभग 25% हिस्सा मिडिल-ईस्ट को गया था। भारत से एक्सपोर्ट करने वाली प्रमुख कंपनियों का हाल:

  • ह्यूंदै मोटर: भारत से होने वाले इसके कुल एक्सपोर्ट का लगभग आधा हिस्सा मिडिल-ईस्ट को जाता है।
  • टोयोटा: भारत से हुए 470 मिलियन डॉलर के कुल एक्सपोर्ट में से 300 मिलियन डॉलर से ज्यादा की कारें खाड़ी देशों में गईं।
  • निसान मोटर: भारत से इसके कुल एक्सपोर्ट का करीब 38% मिडिल-ईस्ट के बाजारों में जाता है।
  • मारुति सुजुकी: 2025 में कंपनी ने करीब 457 मिलियन डॉलर की कारें मिडिल-ईस्ट में भेजीं।

चीन, दक्षिण कोरिया और जापान का क्या हाल है?

भारत के अलावा बाकी एशियाई देशों के लिए भी मिडिल-ईस्ट एक अहम बाजार है। अगर सप्लाई चेन रुकती है तो इन देशों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा:

  • चीन: मिडिल-ईस्ट चीन का दूसरा सबसे बड़ा विदेशी बाजार है। 2025 में चीन ने करीब 1.39 मिलियन कारें खाड़ी देशों को बेचीं। इनमें शेरी, बीवाईडी, साइक और जीली जैसी कंपनियां सबसे आगे हैं।
  • दक्षिण कोरिया: 2025 में दक्षिण कोरिया ने 5.3 अरब डॉलर की कारें मिडिल-ईस्ट भेजीं। ह्यूंदै और किया जैसी दिग्गज कंपनियां अपने कुल एक्सपोर्ट का लगभग 8% हिस्सा इसी क्षेत्र में भेजती हैं।
  • जापान (टोयोटा): टोयोटा ने 2025 में जापान से 3 लाख से ज्यादा कारें (कुल एक्सपोर्ट का 15%) मिडिल-ईस्ट भेजी थीं। लेकिन मौजूदा संकट के कारण टोयोटा को मिडिल-ईस्ट के लिए अपनी कारों का प्रोडक्शन करीब 40,000 यूनिट तक घटाना पड़ सकता है।

आगे क्या होगा?

ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ये तनाव लंबा खिंचता है तो पूरी दुनिया की ऑटो सप्लाई चेन बुरी तरह चरमरा सकती है। इससे न सिर्फ कार कंपनियों को करोड़ों का नुकसान होगा बल्कि ग्राहकों तक नई कारों की डिलीवरी में भी काफी देरी हो सकती है। क्या आप जानना चाहेंगे कि इस ग्लोबल संकट का असर आने वाले समय में भारत में कारों की कीमतों या वेटिंग पीरियड पर कैसे पड़ सकता है?

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