Bihar: भागलपुर में मिला लाखों साल पुराना वृक्ष जीवाश्म, वैज्ञानिक जांच के लिए लखनऊ भेजा गया नमूना
भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड से मिले दो प्राचीन वृक्ष जीवाश्मों के नमूने वैज्ञानिक जांच के लिए लखनऊ भेजे गए हैं। विशेषज्ञ उनकी आयु, प्रजाति और भूवैज्ञानिक महत्व का अध्ययन करेंगे। प्रारंभिक अनुमान है कि ये जीवाश्म लाखों वर्ष पुराने हो सकते हैं।
भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड से मिले दो प्राचीन वृक्ष जीवाश्मों के नमूने वैज्ञानिक जांच के लिए लखनऊ भेजे गए हैं। विशेषज्ञ उनकी आयु, प्रजाति और भूवैज्ञानिक महत्व का अध्ययन करेंगे। प्रारंभिक अनुमान है कि ये जीवाश्म लाखों वर्ष पुराने हो सकते हैं।
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भागलपुर से एक बड़ी और रोचक खबर सामने आई है। शहर के सैंडिस कंपाउंड क्षेत्र से मिले दो प्राचीन वृक्ष जीवाश्मों (ट्री फॉसिल) की अब वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी। इन जीवाश्मों की वास्तविक आयु, प्रजाति और भूवैज्ञानिक महत्व का पता लगाने के लिए जिला प्रशासन ने लखनऊ स्थित बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज से संपर्क किया है।
जिला प्रशासन के निर्देश पर दोनों जीवाश्मों को सुरक्षित रूप से भागलपुर संग्रहालय में संरक्षित किया गया है। वैज्ञानिक परीक्षण के लिए इनके नमूने लखनऊ भेजे गए हैं। वहां विशेषज्ञ जीवाश्मों की आयु, प्रजाति, संरक्षण की स्थिति और उस समय की पर्यावरणीय परिस्थितियों का विस्तृत अध्ययन करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन जीवाश्मों के अध्ययन से भागलपुर और आसपास के क्षेत्र के प्राचीन प्राकृतिक इतिहास, वनस्पतियों तथा भूवैज्ञानिक संरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
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गौरतलब है कि इन जीवाश्मों की पहचान सबसे पहले सैंडिस कंपाउंड में मॉर्निंग वॉक के दौरान हुई थी। प्रारंभिक तौर पर तस्वीरें विशेषज्ञों को भेजी गईं, जिसके बाद इन्हें संभावित वृक्ष जीवाश्म माना गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी।
जिला कला एवं सांख्यिकी पदाधिकारी अंकित रंजन ने बताया कि प्रारंभिक निरीक्षण में यह किसी वृक्ष का जीवाश्म प्रतीत होता है। देखने से अनुमान लगाया जा रहा है कि यह लाखों वर्ष पुराना हो सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक आयु और वैज्ञानिक महत्व का पता विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल सभी की नजर विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर टिकी है।