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Bihar: 17 साल से सड़क नहीं, अब आर-पार की लड़ाई; ऊर्जा मंत्री के आवास के पास ग्रामीणों का आमरण अनशन शुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुर
Published by: भागलपुर ब्यूरो
Updated Sat, 16 May 2026 07:44 PM IST
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सार
भागलपुर के नवगछिया क्षेत्र में सड़क, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों ने ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल के आवास के पास 21 दिवसीय आमरण अनशन शुरू किया। ग्रामीणों ने गांव की बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा पर गहरा आक्रोश जताया।
ग्रामीणों का आमरण अनशन शुरू
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल के कांटीधार नवटोलिया, डीमहा और गोपालपुर इलाके के ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर उतर आया है। वर्षों से सड़क, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे ग्रामीणों ने आखिरकार बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल के आवास के पास 21 दिवसीय आमरण अनशन शुरू कर दिया है। आंदोलन कर रहे लोगों का कहना है कि 17 वर्षों से लगातार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद गांवों की हालत जस की तस बनी हुई है।
सड़क नहीं, तो जिंदगी भी मुश्किल
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2007 से सड़क निर्माण की मांग उठाई जा रही है, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। क्षेत्र से मंत्री बनने के बाद भी गांवों की तस्वीर नहीं बदली। लोगों का कहना है कि बारिश के दिनों में हालात और भयावह हो जाते हैं, जब गांव का संपर्क लगभग कट जाता है। अनशन स्थल पर लगाए गए पोस्टरों में गांव की बदहाली को मार्मिक तरीके से दर्शाया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को खेत और कीचड़ भरे रास्तों से अस्पताल ले जाना पड़ता है। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीजों की जान तक चली गई।
बच्चों की पढ़ाई भी संकट में
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के स्कूली बच्चों को पढ़ाई के लिए जान जोखिम में डालकर गंगा नदी पार करनी पड़ती है। बरसात के मौसम में यह परेशानी और बढ़ जाती है। लोगों का कहना है कि सड़क और सुरक्षित आवागमन की सुविधा नहीं होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तीनों प्रभावित हो रहे हैं।
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'आजाद भारत का गुलाम गांव' लिखकर जताया विरोध
आंदोलन स्थल पर लगे पोस्टरों में “आजाद भारत का गुलाम गांव” लिखकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ तीखा विरोध जताया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के दशकों बाद भी उनका गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है और लोगों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ये भी पढ़ें- Bihar News: महाबोधि मंदिर पहुंचीं ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग, बोलीं- ‘यह जीवन का अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव’
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
आमरण अनशन पर बैठे ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। आंदोलन स्थल पर लगातार नारेबाजी हो रही है और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक सड़क निर्माण, पेयजल और आवागमन की समुचित व्यवस्था शुरू नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि अब यह सिर्फ सड़क की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई बन चुकी है।
सड़क नहीं, तो जिंदगी भी मुश्किल
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2007 से सड़क निर्माण की मांग उठाई जा रही है, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। क्षेत्र से मंत्री बनने के बाद भी गांवों की तस्वीर नहीं बदली। लोगों का कहना है कि बारिश के दिनों में हालात और भयावह हो जाते हैं, जब गांव का संपर्क लगभग कट जाता है। अनशन स्थल पर लगाए गए पोस्टरों में गांव की बदहाली को मार्मिक तरीके से दर्शाया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को खेत और कीचड़ भरे रास्तों से अस्पताल ले जाना पड़ता है। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीजों की जान तक चली गई।
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बच्चों की पढ़ाई भी संकट में
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के स्कूली बच्चों को पढ़ाई के लिए जान जोखिम में डालकर गंगा नदी पार करनी पड़ती है। बरसात के मौसम में यह परेशानी और बढ़ जाती है। लोगों का कहना है कि सड़क और सुरक्षित आवागमन की सुविधा नहीं होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तीनों प्रभावित हो रहे हैं।
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आंदोलन तेज करने की चेतावनी
आमरण अनशन पर बैठे ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। आंदोलन स्थल पर लगातार नारेबाजी हो रही है और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक सड़क निर्माण, पेयजल और आवागमन की समुचित व्यवस्था शुरू नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि अब यह सिर्फ सड़क की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई बन चुकी है।