पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
फ्री ई-पेपर
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Bihar Government Faces Criticism Over Lease of Modern Crematorium to Isha Foundation

Bihar: सदगुरु के कारण क्यों हो रही सम्राट सरकार की किरकिरी? एक रुपए में 15 एकड़ जमीन और 3500 श्मशान चार्ज!

Fri, 26 Jun 2026 05:25 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Fri, 26 Jun 2026 05:25 PM IST
सार

विपक्ष एनडीए सरकार से यह सवाल पूछ रहा है कि जनता के पैसे से बना शवदाह गृह इतना महंगा क्यों? यहां अंतिम संस्कार के लिए केवल 3500 रुपये तक के रसीद कटाने होंगे। जबकि राजधानी के अन्य शवदाह गृह (दीघा और गुलबी) में महज 300 रुपये की रसीद कटती है।

विज्ञापन
Bihar Government Faces Criticism Over Lease of Modern Crematorium to Isha Foundation
चर्चा में बांस घाट स्थित शवदाह गृह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार का सबसे हाईटेक शवदाह गृह आज सुर्खियों में है। इसके पीछे की वजह है कि एक चर्चित शख्स, उनकी संस्था और सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार। विपक्ष ही नहीं बल्कि आम लोग भी कह रहे हैं कि सरकार ने अब श्मशान घाट को निजी हाथों में देकर उसका निजीकरण करने की तैयारी में है। दरअसल, पटना स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बांसघाट स्थित आधुनिक शवदाह गृह का निर्माण करवाया गया है। इसे बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉपरपोरेशन ने 89 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से बनाया गया है। इसके बाद इसे सरकार ने सदगुरु जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन (एनडीए) को एक रुपये में 10 साल की लीज पर दे दिया। इसी पर विवाद हो रहा है। 

विज्ञापन

 

वरिष्ठ पत्रकार पुष्यमित्र ने बताया कि राजधानी पटना में गंगा के किनारे बांसघाट पर वीआईपी श्मशान घाट तैयार किया है और इसे एक रुपये की लीज पर जग्गी वासुदेव की संस्था ईशा फाउंडेशन को चलाने के लिए दे दिया है। अगर आप वहां अपने किसी मित्र या परिजन के अंतिम संस्कार के लिए जाते हैं तो आपको न्यूनतम 3500 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। इसके अलावा आप अगर लकड़ी या गैस का इस्तेमाल करते हैं तो उसका खर्च अलग। डोम राजा, नाई और पंडित के चार्ज भी अलग से देने होंगे। जबकि इसके ठीक बगल में सरकारी विद्युत शवदाह गृह का चार्ज सिर्फ 300 रुपये है। कुल मिलाकर सरकारी पैसे से बने इसे वीआईपी श्मशान गृह का संचालन ईशा फाउंडेशन करेगा और बिहार के लोगों से मोटी रकम वसूल करेगा. मुमकिन है कि कुछ वीआईपी वहां भीड़भाड़ से बचने जायें भी. चार जून, 2026 को शुरू हुए इस श्मशान घाट में अब तक 20 शवों का अंतिम संस्कार हो चुका है. ईशा फाउंडेशन पटना में दीघा में एक और ऐसा शवदाह गृह सरकार से लेने जा रहा है

विज्ञापन

 

शवदाह गृह के मेंटेनेंस का खर्च बहुत अधिक

वहीं ईशा फाउंडेशन की ओर से बताया गया है कि इस शवदाह गृह में अत्याधुनिक सुविधाएं हैं। एसी वेटिंग रूम लोगों के लिए बनाया गया है। यहां काफी स्टाफ हैं और शवदाह गृह के मेंटेनेंस का खर्च बहुत अधिक है। इसलिए एक शुल्क तय किए गए हैं। अन्य शवदाह गृहों में इतनी हाईटेक और पर्यावरण के अनुकूल सुविधाएं नहीं रहती हैं। ईशा फाउंडेशन की तरफ से पूरी तरह से प्रशिक्षित स्वयं सेवकों की तैनाती भी की गई है, जो मृतकों के शोक-संतप्त परिजनों को सांत्वना देकर फिर से जीवन के प्रति आस पैदा कराने से लेकर अन्य सभी स्तर पर मदद प्रदान करेंगे। ये स्वयं सेवक मूल रूप तमिलनाडु के रहने वाले हैं। कई लोग तो इंजीनियर की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर ईशा फाउंडेशन से जुड़कर यहां लोगों की सेवा कर रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

 

15 दिनों में गैस से चलने वाले फर्नेंस होगा शुरू

बांस घाट में शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए लकड़ी आधारित 6, बिजली से चलने वाले 4 फर्नेंस और 8 खुले स्थल मौजूद हैं। आगामी 15 दिनों में अंतिम संस्कार के लिए गैस से चलने वाले खास तरह के फर्नेंस तैयार हो जाएंगे, जहां आसानी से शवदाह किया जा सकता है। यह दूसरे अन्य सभी माध्यमों से कम लागत वाला है और इससे प्रदूषण भी कम होता है। वर्तमान में यहां शवदाह में आने वाला खर्च 3500 रुपये के अलावा 500 रुपये डोम राजा का, 500 रुपये पंडितजी और 250 रुपये नाई का शुल्क लगता है। वहीं, लकड़ी से अंतिम संस्कार कराने की स्थिति में लड़की की कीमत अलग से शामिल होती है।  

 

ईशा फाउंडेशन की ओर से तमिलनाडु में 33 शवदाह गृहों का संचालन 

ईशा फाउंडेशन की शमशान घाटों के केयरटेकर का काम पिछले 15 वर्षों से कर रहा है। अकेले तमिलनाडु में 33 से अधिक शवदाह गृहों का संचालन संस्थान कर रही है। इस समयावधि में सवा लाख से अधिक मृत शरीर का अंतिम संस्कार इन आधुनिक तरीके से संचालित शवदाह गृहों में किया जा चुका है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले लोगों के लिए अंतिम संस्कार की सेवा पूरी तरह से मुफ्त रखी गई है। फाउंडेशन के पदाधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में बिहार में भी यह सुविधा गरीबों को मुफ्त मिलेगी।

 

जानिए राजद ने क्या सवाल उठाया?

राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्त चितरंजन गगन ने कहा कि सरकार अब लाशों से समझौता कर रही है। जनता की पैसे से बना श्मशान घाट को अब तमिलनाडु के एनजीओ को दे दिया गया। वह भी एक रुपये में। वह एनजीओ सेवा के नाम पर मनमाने ढंग से पैसे वसूल रही है। बेईमानों और अपराधियों की लुटेरी चंदा चोर पार्टी भाजपा की एनडीए सरकार बिहारियों के जिंदा रहने पर ही नहीं बल्कि मरने पर भी आपके परिजनों की जेब काटेगी। श्मशान घाट को जग्गी वासुदेव की संस्था ईशा फाउंडेशन को मात्र एक रुपये की लीज पर दे दिया गया है। बिहार में तमिलनाडु की इस प्राइवेट संस्था को ऐसे घाट सौंपे जायेंगे। यहां अंतिम संस्कार के लिए अब न्यूनतम 3500 रुपये देने पड़ते है जबकि पास के सरकारी श्मशान घाट में सिर्फ 300 रुपये देने पड़ते हैं। चंदा चोर भाजपा ने आपके पैसे से बनी सुविधाओं को निजी हाथों में सौंपना शुरू कर दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed