Bihar : अब फिल्म बनाइए बिहार में; नीतीश सरकार ने 25 साल की मुराद पूरी की, फिल्म प्रोत्साहन नीति के फायदे जानें
Bihar Film Promotion Policy : करीब 25 साल से यह मांग थी। 2005 में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री बनते ही बिहार में बदलाव के संकेत दिए तो मांग तेज हो गई। अब वह मुराद पूरी हुई, जब राजग सरकार ने बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति 2024 को हरी झंडी दी।
विस्तार
बिहार में फिल्म प्रोत्साहन नीति 2024 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी है। नई शताब्दी में प्रवेश के साथ ही बिहार से यह मांग उठ रही थी। वर्ष 2005 में जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने बिहार के बदलाव की बात की। उसके बाद से इस मांग ने लगातार तेजी पकड़ी। बिहार आने वाले तमाम अभिनेताओं और निर्माता-निर्देशकों ने बिहार में फिल्म प्रोत्साहन नीति नहीं होने की बात कही। आज 19 जुलाई 2024 बिहार के लिए एक बड़ी तारीख बन गया, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल ने फिल्म प्रोत्साहन नीति 2024 को हरी झंडी दी। इस प्रोत्साहन नीति के कारण अब बिहार में फिल्में आसानी से बनेंगी। अबतक भोजपुरी इंडस्ट्री की भी फिल्में यहां कभी-कभी ही बन पा रही थीं, लेकिन अब बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग भी हो सकेगी।
शूटिंग करने आएंगे तो रोजगार भी बढ़ेगा
देश के जाने-माने फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम ने 'अमर उजाला' से विशेष बातचीत में कहा- "देर आए, दुरुस्त आए... आ तो गए। अब बिहार में फिल्मी कलाकार आएंगे। फिल्म बनाने वाले आएंगे। फिल्में बनेंगी। बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति के एक नहीं हजार फायदे होंगे। सबसे बड़ा फायदा यह कि बिहार में रोजगार की संभावना खूब बढ़ जाएगी। फिल्मी दुनिया के लोग शूटिंग करने जहां भी जाएंगे, उस आसपास रोजगार की संभावना बनेगी। फिल्मों में अवसर मिलने की संभावना बढ़ेगी। फिल्म प्रोत्साहन नीति के कारण अब भोजपुरी के साथ ही बॉलीवुड के निर्माता-निर्देशक भी बिहार से जुड़ जाएंगे। सिंगल विंडो सिस्टम से उन्हें अनुमति और सुरक्षा मिलने लगेगी तो अन्य राज्यों की तरह वह बिहार में फिल्मों की शूटिंग करने आएंगे।"
नकारात्मक छवि से निकल जाएगा बिहार
फिल्मकार बिहार का रुख करेंगे तो बिहार छवि भी बदलेगी। उन्हें पता चलेगा कि असल बिहार वह नहीं, जो फिल्मों में दिखा रहे हैं। फिल्मों की कड़ी समीक्षा के लिए मशहूर विनोद अनुपम भी इस बात की तसदीक करते हैं। वह कहते हैं- "फिल्मकार असली बिहार देखेंगे तो फिल्मों में भी बिहार की नकारात्मक छवि दिखनी काफी हद तक बंद हो जाएगी। मुझे लगता है कि तीसरी कसम छोड़कर किसी भी फिल्म ने बिहार की छवि को अच्छा नहीं बनने दिया। अब फिल्मकारों का बिहार की ओर आना इस मायने में जरूर फायदेमंद होगा।"
फिल्मकारों को क्या होगा फायदा
- सिंगल विंडो सिस्टम से शूटिंग अनुमति
- देश में सर्वाधिक अनुदान की व्यवस्था
- दो से चार करोड़ रुपये तक अनुदान
- फिल्म और डॉक्युमेंट्री फिल्म के लिए अनुदान
- धारावाहिक, सीरीज़ के लिए भी अनुदान
- फिल्मों की शूटिंग के खर्च में सब्सिडी
- फिल्म फैसिलिटेशन सेल का गठन
- फिल्मी कलाकारों की सुरक्षा व्यवस्था
- बिहार के विषयों पर काम में सहजता
- स्थानीय कलाकारों तक पहुंच आसान