Bihar: नीतीश ने सीएम पद पर खेल दिया दांव? पिछली बार नहीं मानी थी भाजपा ने बात; किस नाम को लेकर क्या चल रहा?
Nitish Kumar: नीतीश कुमार को राज्यसभा के लिए भाजपा ने राजी कराया, ताकि पहली बार उसका कोई नेता सीएम की कुर्सी पर बैठै। अब तक भाजपा ने वह चेहरा नहीं घोषित किया। वजह भी नीतीश हैं। वैसे, इसी वजह के भरोसे नीतीश कुमार ने भाजपाई चेहरे पर भी दांव खेल दिया है।
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तारीख- 18 मार्च। जगह- जमुई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक बयान ने सियासी तूफान ला दिया। वह बयान है- "अब सब यह ही देखेंगे"। मुख्यमंत्री का इशारा बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की तरफ था। समृद्धि यात्रा के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए वह अचानक डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के पास पहुंचे। इसके बाद उनकी पीठ पर एक हाथ रखकर दूसरा हाथ हवा में लहरा दिया। साथ ही कहा कि अब सब यह देखेंगे। सीएम नीतीश कुमार ने इससे पहले पूर्णिया, बेगूसराय और भागलपुर में भी अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान ऐसा किया। सीएम नीतीश कुमार के इस मैसेज को लोग समझ रहे हैं। सियासी गलियारे में यह चर्चा है कि सीएम नीतीश कुमार का लव-कुश समीकरण पर पूरा फोकस है। इसलिए वह कुशवाहा समाज से आने वाले भारतीय जनता पार्टी के नेता सम्राट चौधरी को अपनी कुर्सी पर बैठे हुए देखना चाहते हैं।
लव-कुश समीकरण को ध्यान में रखते हुए सीएम नीतीश ऐसा कर रहे
लंबे समय तक लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के करीबी रहे वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी कहते हैं कि नीतीश कुमार का राज्यसभा जा रहे हैं। उनका उत्तराधिकारी कौन होगा? इसकी चर्चा हो रही है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि अगला मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी का ही होगा। भाजपा में कौन होगा? यह भी लगभग तय दिखाई दे रहा है। पूर्व के दो उपमुख्यमंत्रियों की जगह भाजपा ने सम्राट चौधरी के रूप में एक ही उपमुख्यमंत्री रखा है। सम्राट का गृहमंत्री होना भी इनके पक्ष में ही जाता है। कभी-कभी लगता है कि यह सब नीतीश कुमार की योजना के अनुसार ही हो रहा है। सम्राट चौधरी के प्रति नीतीश कुमार का सार्वजनिक व्यवहार भी ध्यान देने योग्य है। समृद्धि यात्रा में कई बार सीएम नीतीश कुमार ने जिस तरह सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर उन्हें आगे बढ़ाया, उससे यह संकेत मिलता है कि वे उन्हें अपने संभावित उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। यदि ऐसा होता है तो इसे इस रूप में भी देखा जा सकता है कि जिन सामाजिक समूहों विशेषकर लव-कुश के सहारे उन्होंने वर्षों तक सत्ता चलाई, सत्ता छोड़ते समय उसी सामाजिक आधार को अपने वारिस के माध्यम से आगे बढ़ाने की कोशिश तो कर ही रहे हैं। साथ-साथ लंबे समय तक साथ निभाने के लिए अपनी बागडोर सम्राट को सौंप कर नीतीश कुमार कुशवाहा समाज प्रति अपनी कृतज्ञता भी ज्ञापित कर रहे हैं।
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ऐसा जरूरी नहीं कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व सीएम नीतीश की बात मान ही ले
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि नीतीश कुमार जिसके जिसके पीठ पर हाथ रखते हैं उसका राजनीतिक अवसान हो जाता है। इससे पहले उपेंद्र कुशवाहा की पीठ पर हाथ रखे थे, उनकी स्थिति देख लीजिए। इसके बाद तेजस्वी यादव की पीठ पर हाथ रखे थे। उनके बारे में कहा था कि अब सब यही देखेंगे। लेकिन, कुछ माह बाद ही गठबंधन टूट गया। नीतीश कुमार अब ऐसी स्थिति में नहीं है कि अब वह कोई सटीक फैसला ले सकते हैं। ऐसा जरूरी नहीं कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व उनकी बात मानें। मुख्यमंत्री कौन बनेगा? यह अंतिम फैसला पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ही करेंगे। सम्राट चौधरी या कोई और यह तो आने वाल वक्त ही बताएगा। लेकिन, एक बात जरूर है कि डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी आरएसएस बैकग्राउंड से नहीं आते हैं और भाजपा का एक खास वर्ग उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में नहीं देखना चाहता है।
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सुशील मोदी को डिप्टी सीए बनाना चाहते थे नीतीश, लेकिन भाजपा ने ऐसा नहीं किया
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि 2020 में सीएम नीतीश कुमार सुशील मोदी को उपमुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। लेकिन, भाजपा ने उनकी बात नहीं मानी थी। आलाकमान ने रेणु देवी और तारकिशोर प्रसाद को बना दिया। इससे नीतीश कुमार नाराज हो गए और दो साल के अंदर ही गठबंधन तोड़कर तेजस्वी यादव के साथ मिलकर सरकार बना ली। सीएम नीतीश कुमार वापस जब एनडीए में लौटे तो उनसे समन्वय बेहतर बनाने के लिए सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को डिप्टी सीएम बनाया। 2025 में भी सरकार बनी तो मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद पर जो पहले थे, उन्हें ही रिपीट किया गया। भाजपा हमेशा से चौंकाने वाल फैसला लेते रही है।