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Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा में भक्त लीन, मंदिरों में उमड़ी भीड़

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Fri, 20 Mar 2026 10:24 AM IST
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सार

Navratri Day 2: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त इस दिन सच्चे मन से मां की पूजा-अर्चना और दर्शन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

Muzaffarpur Bihar news : chaitra navratra festival devotee gather in second day worship today
चैत्र नवरात्रि दूसरा दिन
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विस्तार

चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष विधान होता है। आज भक्त स्नान-ध्यान के बाद मां की भक्ति में लीन नजर आ रहे हैं। नवरात्रि में मां के इस स्वरूप का विशेष महत्व माना जाता है और माता अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाती हैं।

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मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप तप, संयम और साधना का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में ‘ब्रह्म’ का अर्थ तपस्या से है और ‘ब्रह्मचारिणी’ का अर्थ है तप का आचरण करने वाली देवी। मां का यह स्वरूप साधकों को आत्मसंयम और धैर्य का संदेश देता है तथा भक्तों पर विशेष कृपा बरसाने वाला माना जाता है।
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चैत्र नवरात्रि दूसरा दिन


सुबह से ही भक्तों की भीड़
मुजफ्फरपुर के सुप्रसिद्ध राजराजेश्वरी देवी मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। भक्त माता के दर्शन और पूजन के लिए कतारों में लगे दिखाई दे रहे हैं और ‘जय माता दी’ के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज रहा है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में दुर्गा सप्तशती का पाठ कर रहे हैं और अपनी मनोकामनाएं मां के समक्ष व्यक्त कर रहे हैं।

 

चैत्र नवरात्रि दूसरा दिन

चैत्र नवरात्रि दूसरे दिन मंदिर में उमड़ी भीड़। 

 

'निर्जल और निराहार रहकर घोर तप किया'

मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य धर्मेंद्र तिवारी ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्व जन्म में जब देवी हिमालय के घर पुत्री के रूप में उत्पन्न हुई थीं, तब देवर्षि नारद के उपदेश पर उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने हजारों वर्षों तक फल, मूल और शाक का सेवन किया तथा अंत में सूखे बेलपत्रों पर निर्भर रहीं। बाद में उन्होंने उसका भी त्याग कर निर्जल और निराहार रहकर घोर तप किया। इसी कठिन तपस्या के कारण उन्हें ‘ब्रह्मचारिणी’ कहा जाता है। 

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