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Bihar: गन्ना किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, 20 नवंबर को पीएम मोदी रखेंगे दो नई चीनी मिलों की नींव
Wed, 29 Jul 2026 04:49 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Wed, 29 Jul 2026 04:49 PM IST
सार
बिहार सरकार ने राज्य में चीनी उद्योग को नई रफ्तार देने की दिशा में बड़ा ऐलान किया है। गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने बताया कि मधुबनी की सकरी और दरभंगा की रैयाम चीनी मिल की आधारशिला 20 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रखेंगे।
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गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार में बंद चीनी मिलों को फिर से चालू करने और नए चीनी उद्योग स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने घोषणा की कि मधुबनी के सकरी और दरभंगा की रैयाम चीनी मिल की आधारशिला 20 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रखेंगे। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 25 नई चीनी मिलें स्थापित कर किसानों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
20 नवंबर को होगी सकरी और रैयाम चीनी मिल की आधारशिला
गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने बुधवार को सूचना भवन के सभाकक्ष में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि मधुबनी जिले की सकरी और दरभंगा जिले की रैयाम चीनी मिल की आधारशिला 20 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रखेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों चीनी मिलों का संचालन सहकारिता विभाग के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
पांच साल में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य
मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार की सात निश्चय-3 योजना के तहत 'सशक्त उद्योग, सशक्त बिहार' अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत राज्य में बंद सभी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने के साथ-साथ अगले पांच वर्षों में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
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नई निवेश नीति से बढ़ रही निवेशकों की रुचि
संजय कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी दी है। इस नीति का उद्देश्य गन्ना आधारित उद्योगों की स्थापना और गन्ना क्षेत्र का विस्तार करना है। उन्होंने कहा कि नई नीति के बाद राज्य में निवेशकों की रुचि बढ़ी है और गन्ना उद्योग में निवेश के नए प्रस्ताव मिल रहे हैं।
किसानों को मिल रहे आधुनिक कृषि यंत्र
मंत्री ने कहा कि गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों को 45 प्रकार के आधुनिक कृषि यंत्र अनुदानित दर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि गन्ने की खेती आसान और अधिक लाभकारी बन सके। सरकार का उद्देश्य गन्ना उत्पादन बढ़ाकर चीनी मिलों को पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध कराना है।
गन्ना किसानों के लिए कई नई योजनाएं शुरू
गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि किसानों के हित में कई योजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें मुख्यमंत्री गन्ना बीज विकास योजना, गन्ना यंत्रीकरण योजना, गन्ना नर्सरी योजना और नई चीनी मिल क्षेत्रों में गन्ना विस्तार अभियान शामिल हैं। उन्होंने बताया कि विभाग ने राष्ट्रीय स्तर के तीन संस्थानों के साथ एमओयू भी किया है।
चीनी मिलें बनेंगी शुगर कॉम्पलेक्स
सचिव ने कहा कि राज्य में चीनी उद्योग को आधुनिक स्वरूप देने के लिए चीनी मिलों को शुगर कॉम्पलेक्स के रूप में विकसित किया जाएगा। इन कॉम्पलेक्स में चीनी के साथ-साथ इथेनॉल, बिजली और बायोगैस का भी उत्पादन किया जाएगा, जिससे उद्योग की आय बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
सासामुसा चीनी मिल के लिए 43 करोड़ की मंजूरी
धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि गोपालगंज जिले की सासामुसा चीनी मिल को दोबारा चालू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने उस क्षेत्र के गन्ना किसानों के पूर्ववर्ती पेराई सत्रों के बकाया भुगतान के लिए 43 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि मिल शुरू होने और एक पेराई सत्र पूरा होने के बाद किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाएगा।
मढ़ौरा और मोतीपुर चीनी मिलों पर भी सरकार का फोकस
सचिव ने बताया कि सारण जिले की मढ़ौरा चीनी मिल से जुड़ा विवाद जल्द सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि मिल का संचालन फिर से शुरू किया जा सके। इसके अलावा सारण जिले के अन्य क्षेत्रों में नई चीनी मिल स्थापित करने के लिए सरकारी जमीन का चयन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि मोतीपुर की बंद चीनी मिल की 266 एकड़ जमीन वापस लेने की स्वीकृति सरकार दे चुकी है।
गन्ना किसानों को मिला पूरा भुगतान
सचिव ने बताया कि पेराई सत्र 2025-26 में राज्य की चीनी मिलों ने गन्ना किसानों को 2,137.83 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य का शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है। साथ ही राज्य के गन्ना किसानों का सर्वे भी कराया जा रहा है। धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि इस वर्ष राज्य में गन्ने की रिकवरी दर 10.3 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर होने के साथ राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि विभाग की योजनाओं से आने वाले समय में गन्ना उत्पादन, उत्पादकता और खेती के रकबे में और बढ़ोतरी होगी। प्रेसवार्ता के दौरान ईख आयुक्त अनिल कुमार झा, संयुक्त ईख आयुक्त वेदव्रत सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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20 नवंबर को होगी सकरी और रैयाम चीनी मिल की आधारशिला
गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने बुधवार को सूचना भवन के सभाकक्ष में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि मधुबनी जिले की सकरी और दरभंगा जिले की रैयाम चीनी मिल की आधारशिला 20 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रखेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों चीनी मिलों का संचालन सहकारिता विभाग के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
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पांच साल में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य
मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार की सात निश्चय-3 योजना के तहत 'सशक्त उद्योग, सशक्त बिहार' अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत राज्य में बंद सभी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने के साथ-साथ अगले पांच वर्षों में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
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नई निवेश नीति से बढ़ रही निवेशकों की रुचि
संजय कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी दी है। इस नीति का उद्देश्य गन्ना आधारित उद्योगों की स्थापना और गन्ना क्षेत्र का विस्तार करना है। उन्होंने कहा कि नई नीति के बाद राज्य में निवेशकों की रुचि बढ़ी है और गन्ना उद्योग में निवेश के नए प्रस्ताव मिल रहे हैं।
किसानों को मिल रहे आधुनिक कृषि यंत्र
मंत्री ने कहा कि गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों को 45 प्रकार के आधुनिक कृषि यंत्र अनुदानित दर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि गन्ने की खेती आसान और अधिक लाभकारी बन सके। सरकार का उद्देश्य गन्ना उत्पादन बढ़ाकर चीनी मिलों को पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध कराना है।
गन्ना किसानों के लिए कई नई योजनाएं शुरू
गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि किसानों के हित में कई योजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें मुख्यमंत्री गन्ना बीज विकास योजना, गन्ना यंत्रीकरण योजना, गन्ना नर्सरी योजना और नई चीनी मिल क्षेत्रों में गन्ना विस्तार अभियान शामिल हैं। उन्होंने बताया कि विभाग ने राष्ट्रीय स्तर के तीन संस्थानों के साथ एमओयू भी किया है।
चीनी मिलें बनेंगी शुगर कॉम्पलेक्स
सचिव ने कहा कि राज्य में चीनी उद्योग को आधुनिक स्वरूप देने के लिए चीनी मिलों को शुगर कॉम्पलेक्स के रूप में विकसित किया जाएगा। इन कॉम्पलेक्स में चीनी के साथ-साथ इथेनॉल, बिजली और बायोगैस का भी उत्पादन किया जाएगा, जिससे उद्योग की आय बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
सासामुसा चीनी मिल के लिए 43 करोड़ की मंजूरी
धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि गोपालगंज जिले की सासामुसा चीनी मिल को दोबारा चालू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने उस क्षेत्र के गन्ना किसानों के पूर्ववर्ती पेराई सत्रों के बकाया भुगतान के लिए 43 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि मिल शुरू होने और एक पेराई सत्र पूरा होने के बाद किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाएगा।
मढ़ौरा और मोतीपुर चीनी मिलों पर भी सरकार का फोकस
सचिव ने बताया कि सारण जिले की मढ़ौरा चीनी मिल से जुड़ा विवाद जल्द सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि मिल का संचालन फिर से शुरू किया जा सके। इसके अलावा सारण जिले के अन्य क्षेत्रों में नई चीनी मिल स्थापित करने के लिए सरकारी जमीन का चयन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि मोतीपुर की बंद चीनी मिल की 266 एकड़ जमीन वापस लेने की स्वीकृति सरकार दे चुकी है।
गन्ना किसानों को मिला पूरा भुगतान
सचिव ने बताया कि पेराई सत्र 2025-26 में राज्य की चीनी मिलों ने गन्ना किसानों को 2,137.83 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य का शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है। साथ ही राज्य के गन्ना किसानों का सर्वे भी कराया जा रहा है। धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि इस वर्ष राज्य में गन्ने की रिकवरी दर 10.3 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर होने के साथ राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि विभाग की योजनाओं से आने वाले समय में गन्ना उत्पादन, उत्पादकता और खेती के रकबे में और बढ़ोतरी होगी। प्रेसवार्ता के दौरान ईख आयुक्त अनिल कुमार झा, संयुक्त ईख आयुक्त वेदव्रत सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।