एक्सप्रेसवे के अलाइनमेंट पर संग्राम: बिहार में एक्सप्रेसवे चाहिए, लेकिन घर-कॉलेज उजाड़कर नहीं; जोरदार प्रदर्शन
पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित रूट में बदलाव की मांग को लेकर गुरुवार को जारी धरना-प्रदर्शन के दौरान समस्तीपुर जिले के मुसरीघरारी चौराहे पर एनएच-28 पर जमकर बवाल हुआ। मौजूदा संरेखण में बदलाव की मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मुसरीघरारी चौराहा जाम कर धरना-प्रदर्शन किया। चलिए जानते हैं ग्रामीणों की क्या मांग है?
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विस्तार
समस्तीपुर जिले से होकर गुजरने वाले पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित अलाइनमेंट को लेकर गुरुवार को मुसरीघरारी में विरोध प्रदर्शन के दौरान विवाद गहरा गया। रूट में बदलाव की मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण मुसरीघरारी चौराहे पर जुटे और धरना-प्रदर्शन करते हुए सड़क जाम कर दिया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन शांतिपूर्ण चल रहा था, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया। इस दौरान बुजुर्गों, दिव्यांगों और अन्य ग्रामीणों को पुलिस-प्रशासन द्वारा धक्का देकर हटाया जाने लगा। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों का आक्रोश बढ़ गया और प्रशासन तथा प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक के बाद झड़प की स्थिति उत्पन्न हो गई। इससे कुछ देर के लिए मौके पर अफरातफरी मच गई।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रस्तावित रूट से सैकड़ों घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के अलावा करीब 50 वर्ष पुराने ऐतिहासिक केएसआर सरायरंजन कॉलेज का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे एक्सप्रेसवे निर्माण के विरोध में नहीं हैं, बल्कि ऐसे अलाइनमेंट की मांग कर रहे हैं, जिससे कम से कम आबादी और सार्वजनिक संस्थान प्रभावित हों। आंदोलनकारियों ने सरकार और संबंधित विभाग से प्रस्तावित रूट की दोबारा समीक्षा कर वैकल्पिक संरेखण तय करने की मांग की।
‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन था, धक्का देने से बिगड़ी स्थिति’
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, वे अपनी मांग को लेकर शांतिपूर्वक धरना दे रहे थे। इसी दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने सड़क खाली कराने का प्रयास किया। ग्रामीणों का आरोप है कि बुजुर्गों, दिव्यांगों और अन्य प्रदर्शनकारियों को धक्का देकर हटाया गया। इससे मौके पर तनाव बढ़ गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि प्रशासन उनसे बातचीत करता और उनकी आपत्तियां सुनता तो विवाद की नौबत नहीं आती। इसके बाद दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक हुई और स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गई। पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में बाद में स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया।
विकास जरूरी, लेकिन जनहित की अनदेखी नहीं
सरायरंजन विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी और भाजपा नेता रंजीत निर्गुणी ने कहा कि एक्सप्रेसवे क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है और ग्रामीण इसके निर्माण का विरोध नहीं कर रहे हैं। उनकी मांग केवल यह है कि अलाइनमेंट ऐसा हो, जिससे आम लोगों को कम से कम नुकसान हो।
उन्होंने कहा कि सैकड़ों परिवारों के घर और प्रतिष्ठान प्रभावित होंगे। इसके अलावा पांच दशक पुराने KSR सरायरंजन कॉलेज का बड़ा हिस्सा प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में संबंधित एजेंसियों को ग्रामीणों की आपत्तियों को गंभीरता से सुनकर तकनीकी स्तर पर वैकल्पिक रूट की संभावना देखनी चाहिए।
रंजीत निर्गुणी ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से मांग रख रहे लोगों के बीच विवाद की स्थिति पैदा होना दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रशासन को बल प्रयोग या धक्का-मुक्की की स्थिति के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कराने की मांग की।
मूल अलाइनमेंट में बदलाव को लेकर पहले भी सामने आ चुके हैं सवाल
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के अलाइनमेंट को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद और सवाल सामने आते रहे हैं। जून 2026 में समस्तीपुर जिले में प्रस्तावित संरेखण में बदलाव के आरोपों को लेकर भी चर्चा हुई थी। हालांकि, एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारियों सहित बिहार पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने स्पष्ट किया था कि समस्तीपुर में किलोमीटर 48+000 से 53+000 के बीच संरेखण में किसी तरह का बदलाव या विचलन नहीं किया गया है।
यानी एक तरफ स्थानीय लोग रूट के प्रभाव को लेकर आपत्ति जता रहे हैं, जबकि विभाग पहले ही संरेखण में बदलाव के आरोपों को खारिज कर चुका है। इसी विरोधाभास के बीच अब ग्रामीण मौजूदा रूट की दोबारा तकनीकी समीक्षा कराने की मांग कर रहे हैं।
पहले 250 किमी, बाद में 282 किमी हुआ प्रस्तावित मार्ग
परियोजना के दस्तावेजों और विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का प्रस्तावित मार्ग पहले करीब 250 किलोमीटर का था। बाद में अलाइनमेंट में बदलाव के साथ इसकी लंबाई बढ़ाकर करीब 282 किलोमीटर किए जाने की जानकारी सामने आई। यह छह लेन का एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, इसका मार्ग वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा और पूर्णिया समेत कई जिलों से जुड़ता है। परियोजना को कोसी और सीमांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
करीब 21 हजार करोड़ से अधिक की परियोजना
उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार, एक्सप्रेसवे की अनुमानित लागत करीब 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। इसे तीन चरणों में विकसित करने की योजना का उल्लेख किया गया है। पहले चरण में हाजीपुर से समस्तीपुर, दूसरे में समस्तीपुर से सहरसा और तीसरे चरण में सहरसा से पूर्णिया तक सड़क निर्माण का प्रस्ताव है। परियोजना पूरी होने के बाद पटना से पूर्णिया के बीच यात्रा समय में बड़ी कमी आने की उम्मीद है। इससे कोसी-सीमांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना जताई गई है।
ग्रामीणों की ये है मांग
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे क्षेत्र के विकास के खिलाफ नहीं हैं। उनका विरोध उन स्थानों से है, जहां प्रस्तावित रूट के कारण घर, दुकान, जमीन और ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों ने सरकार, एनएचएआई और जिला प्रशासन से प्रभावित लोगों की आपत्तियों की सुनवाई कराने तथा तकनीकी विशेषज्ञों के माध्यम से वैकल्पिक अलाइनमेंट की संभावना तलाशने की मांग की है।
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प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती
प्रदर्शन और विवाद के बाद अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर महत्वपूर्ण सड़क परियोजना को आगे बढ़ाना और दूसरी ओर प्रभावित लोगों की आपत्तियों का समाधान करना। यदि जल्द वार्ता नहीं हुई तो ग्रामीण आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी दे रहे हैं।

समस्तीपुर के मुसरीघरारी चौराहा पर प्रदर्शन करते आंदोलनकारी फोटो: Amar Ujala

समस्तीपुर के मुसरीघरारी चौराहा पर प्रदर्शन करते आंदोलनकारी फोटो: Amar Ujala