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Bihar: 1917 की विरासत फिर जगेगी? समस्तीपुर चीनी मिल को चालू करने की पहल तेज; DM ने बनाई तीन सदस्यीय टीम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
Published by: दरभंगा ब्यूरो
Updated Tue, 24 Feb 2026 05:13 PM IST
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सार
समस्तीपुर में बंद पड़ी चीनी मिल को दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। जिला विकास मंच के संघर्ष के बीच जिलाधिकारी ने 23 फरवरी को तीन अधिकारियों की टीम गठित कर रिपोर्ट मांगी है।
समस्तीपुर शहर में बंद परा चीनी मिल चालू करने की मांग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
समस्तीपुर में वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिल को फिर से चालू कराने की मांग तेज हो गई है। जिला विकास मंच द्वारा चलाए जा रहे लगातार संघर्ष के बीच जिलाधिकारी ने मिल को चालू करने की दिशा में कदम उठाया है। जिलाधिकारी ने 23 फरवरी को तीन अधिकारियों की एक टीम गठित कर रिपोर्ट मांगी है। इस कदम को जिला विकास मंच ने स्वागत योग्य बताया है।
संयुक्त टीम ने किया मिल परिसर का मुआयना
मंगलवार को जिला विकास मंच और भाकपा माले की संयुक्त टीम ने बंद पड़े चीनी मिल परिसर का दौरा किया। इस टीम का नेतृत्व सुरेंद्र प्रसाद सिंह, दीनबंधु प्रसाद और रामबली सिंह कर रहे थे। टीम ने मिल के पूरे परिसर का निरीक्षण किया और मिल को दोबारा चालू करने की संभावनाओं पर चर्चा की।
मिल संचालन के लिए मौजूद हैं जरूरी सुविधाएं
मंच के सदस्य और भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि मिल को चालू करने के लिए जरूरी आधार पहले से मौजूद हैं।
1917 में हुई थी स्थापना, 1997 में हुआ बंद
समस्तीपुर चीनी मिल की स्थापना 1917 में अंग्रेज सरकार ने की थी। यह मिल उस समय बिहार की प्रमुख मिलों में शामिल थी और यहां अच्छी गुणवत्ता की चीनी बनती थी। सरकार की अनदेखी के कारण 1997 में यह मिल बंद हो गई। इसके बाद कई बार इसे चालू करने की कोशिश हुई, लेकिन सफलता नहीं मिली।
लगातार जारी है संघर्ष
जिला विकास मंच और भाकपा माले लंबे समय से इस मिल को फिर से चालू करने की मांग कर रहे हैं। दोनों संगठन हर मंच पर यह मुद्दा उठाते रहे हैं। अब जिलाधिकारी द्वारा टीम गठन के बाद लोगों को उम्मीद जगी है कि बंद पड़ी चीनी मिल एक बार फिर चालू हो सकती है।
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संयुक्त टीम ने किया मिल परिसर का मुआयना
मंगलवार को जिला विकास मंच और भाकपा माले की संयुक्त टीम ने बंद पड़े चीनी मिल परिसर का दौरा किया। इस टीम का नेतृत्व सुरेंद्र प्रसाद सिंह, दीनबंधु प्रसाद और रामबली सिंह कर रहे थे। टीम ने मिल के पूरे परिसर का निरीक्षण किया और मिल को दोबारा चालू करने की संभावनाओं पर चर्चा की।
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मिल संचालन के लिए मौजूद हैं जरूरी सुविधाएं
मंच के सदस्य और भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि मिल को चालू करने के लिए जरूरी आधार पहले से मौजूद हैं।
- भूमि – चीनी मिल के लिए कम से कम 10 एकड़ जमीन चाहिए, जबकि बंद मिल के पास 22 एकड़ से अधिक जमीन है।
- बिजली – मशीन और उपकरण चलाने के लिए बिजली जरूरी है। मिल चौक पर ही बिजली ग्रिड मौजूद है।
- रेल सुविधा – गन्ना लाने और तैयार चीनी भेजने के लिए मिल के पास रेल परिवहन की सुविधा है।
- सड़क – किसानों के खेत से गन्ना लाने और बाजार तक चीनी पहुंचाने के लिए चारों ओर सड़क सुविधा है।
- पानी – मिल के पास बूढ़ी गंडक नदी और अन्य जल स्रोत मौजूद हैं।
- गाद निकासी – मिल के पास बूढ़ी गंडक नदी है, जहां गाद की निकासी की जा सकती है।
- कच्चा माल – आसपास के वारिसनगर, कल्याणपुर, पूसा, ताजपुर, मोरबा-सरायरंजन और उजियारपुर प्रखंड गन्ना उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र रहे हैं।
- श्रमिक – आसपास के इलाकों में पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध हैं।
1917 में हुई थी स्थापना, 1997 में हुआ बंद
समस्तीपुर चीनी मिल की स्थापना 1917 में अंग्रेज सरकार ने की थी। यह मिल उस समय बिहार की प्रमुख मिलों में शामिल थी और यहां अच्छी गुणवत्ता की चीनी बनती थी। सरकार की अनदेखी के कारण 1997 में यह मिल बंद हो गई। इसके बाद कई बार इसे चालू करने की कोशिश हुई, लेकिन सफलता नहीं मिली।
लगातार जारी है संघर्ष
जिला विकास मंच और भाकपा माले लंबे समय से इस मिल को फिर से चालू करने की मांग कर रहे हैं। दोनों संगठन हर मंच पर यह मुद्दा उठाते रहे हैं। अब जिलाधिकारी द्वारा टीम गठन के बाद लोगों को उम्मीद जगी है कि बंद पड़ी चीनी मिल एक बार फिर चालू हो सकती है।