Bihar News: न गैस, न बिजली... फिर भी गरम चाय-कॉफी! बिहार के सागर का कमाल, डेढ़ साल में बनाया सिपजो
बिहार के औरंगाबाद जिले के हसपुरा के इंटर छात्र और युवा उद्यमी सागर कुमार ने बिना गैस, बिजली या लकड़ी के खाना और गर्म पेय तैयार करने वाला अनोखा उपकरण बनाया है। टिफिन के आकार के इस उपकरण को ‘सिपजो’ नाम दिया गया है। इसमें रासायनिक प्रक्रिया से गर्मी पैदा होती है, जिससे करीब 10 मिनट में पानी 100 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जा सकता है।
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बिहार के औरंगाबाद जिले के हसपुरा के रहने वाले एक इंटर के छात्र ने ऐसा उपकरण तैयार किया है, जो बिना गैस, बिजली या लकड़ी के खाना और गर्म पेय तैयार करने में मदद कर सकता है। हसपुरा के श्री भास्कर नगर निवासी छात्र और युवा उद्यमी सागर कुमार ने टिफिन के आकार का यह उपकरण तैयार किया है। इसमें रासायनिक प्रक्रिया के जरिए गर्मी पैदा होती है, जिससे चाय, कॉफी, नूडल्स और दूसरे खाद्य पदार्थ गर्म किए जा सकते हैं। सागर ने अपने इस उत्पाद का नाम ‘सिपजो’ रखा है और इसका कॉमर्शियल प्रोटोटाइप भी तैयार कर लिया है।
हसपुरा के छात्र ने बनाया अनोखा उपकरण
सागर कुमार इंटर द्वितीय वर्ष के छात्र हैं और पढ़ाई के साथ नवाचार व उद्यमिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उनके बनाए इस उपकरण की खासियत यह है कि इसे चलाने के लिए गैस, बिजली या लकड़ी की जरूरत नहीं पड़ती। सागर ने शुरुआती तौर पर इसे हॉस्टल में रहने वाले छात्रों, ट्रैकिंग और यात्रा के दौरान इस्तेमाल के लिए तैयार किया था। अब इसका कॉमर्शियल प्रोटोटाइप भी उपलब्ध है।
टिफिन के आकार का है ‘सिपजो’
सागर का यह उपकरण देखने में टिफिन के आकार का है। इसमें रासायनिक प्रक्रिया के जरिए गर्मी पैदा की जाती है। सागर के अनुसार, इस तकनीक की मदद से करीब 10 मिनट में पानी को लगभग 100 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जा सकता है। इस गर्मी का इस्तेमाल ऊपर रखे भोजन या पेय को गर्म करने के लिए किया जाता है। चाय, कॉफी और नूडल्स जैसी चीजें इसमें तैयार या गर्म की जा सकती हैं।
तकनीक का पेटेंट भी मिला
सागर को अपनी इस तकनीक का पेटेंट भी मिल चुका है। उन्होंने अपने उत्पाद का नाम ‘सिपजो’ रखा है। इसका मकसद ऐसी परिस्थितियों में लोगों को गर्म भोजन और पेय उपलब्ध कराना है, जहां गैस या बिजली आसानी से उपलब्ध नहीं होती। यात्रा, हॉस्टल, कार्यस्थल, ट्रैकिंग, आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में इस उपकरण का इस्तेमाल किया जा सकता है। सागर के मुताबिक, शुरुआती प्रोटोटाइप का 100 से अधिक लोगों के बीच प्रत्यक्ष ग्राहक परीक्षण भी किया जा चुका है।
IIT पटना समेत कई संस्थानों के कार्यक्रमों में चयन
सागर के स्टार्टअप का चयन IIT पटना, AIC-नालंदा, इनक्यूबिन फाउंडेशन और MTR विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र से जुड़े स्टार्टअप एवं नवाचार कार्यक्रमों में किया गया है। इन कार्यक्रमों के जरिए उनके प्रोजेक्ट को आगे के शोध, तकनीकी मार्गदर्शन और उद्यम विकास में मदद मिल रही है। सागर का लक्ष्य ऐसी सुरक्षित तकनीक विकसित करना है, जिसके जरिए स्वयं गर्म होने वाले भोजन और पेय तैयार किए जा सकें। वह इसे यात्रियों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और आपातकालीन परिस्थितियों में उपयोगी बनाना चाहते हैं।
बचपन से कुछ अलग करने की थी सोच
सागर के पिता महेश कुमार बताते हैं कि उनका बेटा बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहा है। कम उम्र से ही सागर कुछ अलग करने और नए प्रयोग करने में रुचि रखते थे। सागर का कहना है कि नए प्रयोगों और पढ़ाई के दौरान परिवार का उन्हें पूरा सहयोग मिला। उनका मानना है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को यदि तकनीकी मार्गदर्शन, शोध की सुविधाएं और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। कम उम्र में सागर की यह पहल क्षेत्र के दूसरे युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
दो चैंबर से काम करता है उपकरण
सागर के बनाए उपकरण में दो चैंबर हैं। ऊपर वाले चैंबर में गर्म किए जाने वाले भोजन या पेय को रखा जाता है, जबकि नीचे वाले चैंबर में पानी भरा जाता है। पानी वाले चैंबर में एक रसायन डाला जाता है। रासायनिक अभिक्रिया के बाद गर्मी पैदा होती है। इसी गर्मी से ऊपर रखे भोजन या पेय का तापमान बढ़ता है। सागर के मुताबिक, इस प्रक्रिया से करीब 100 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पैदा किया जा सकता है, जो किसी खाद्य पदार्थ को उबालने के लिए पर्याप्त है। हालांकि, उन्होंने इस्तेमाल किए जाने वाले रसायन का नाम बताने से इनकार किया। उनका कहना है कि नाम सार्वजनिक करने पर इसकी डुप्लीकेसी शुरू हो सकती है।
चाय-कॉफी की जरूरत से आया आइडिया
सागर ने बताया कि पढ़ाई के दौरान उन्हें रात में जागने के लिए अक्सर चाय या कॉफी की जरूरत पड़ती थी। इसके लिए या तो चूल्हे पर चाय-कॉफी बनानी पड़ती थी या फिर थर्मस में पहले से गर्म करके रखना पड़ता था। समस्या यह थी कि थर्मस में रखी चाय या कॉफी ज्यादा समय बाद गर्म नहीं रहती थी। इसी परेशानी का समाधान खोजने के लिए सागर ने इस उपकरण पर काम शुरू किया। करीब डेढ़ साल की मेहनत के बाद यह आविष्कार सामने आया। सागर ने इसका कॉमर्शियल प्रोटोटाइप भी तैयार कर लिया है।
LPG से थोड़ा अधिक खर्च आने की संभावना
सागर के मुताबिक, यदि इस उपकरण को घरेलू या व्यावसायिक स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है तो इसकी लागत LPG की तुलना में थोड़ी अधिक हो सकती है। हालांकि, उनका लक्ष्य इसे ऐसी परिस्थितियों के लिए उपयोगी और सुविधाजनक विकल्प बनाना है, जहां गैस या बिजली उपलब्ध नहीं होती।