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Bihar: एक महीने पहले छुट्टी से लौटे थे जवान, फिर आई मौत की खबर; 7 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि, हजारों आंखें नम
Thu, 02 Jul 2026 05:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया जी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया जी
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2026 05:40 PM IST
सार
जहानाबाद निवासी भारतीय सेना के जवान अवधेश कुमार का दिल्ली के आरआर अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर राजकीय सम्मान के साथ गांव लाया गया, जहां हजारों लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। उनके 7 वर्षीय बेटे ने मुखाग्नि दी, जिससे पूरा गांव भावुक हो उठा।
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जवान अवधेश कुमार का पार्थिव शरीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Jehanabad News: सीमा की रक्षा में समर्पित जहानाबाद के सदर प्रखंड अंतर्गत पुनीत बिगहा गांव निवासी और भारतीय सेना के जांबाज जवान अवधेश कुमार का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पैतृक आवास पहुंचा, पूरा इलाका गहरे शोक में डूब गया। तिरंगे में लिपटे वीर सपूत के अंतिम दर्शन और पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। घर में पार्थिव शरीर पहुंचते ही परिजनों की चीत्कार से माहौल गमगीन हो गया। ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों ने नम आंखों से 'भारत माता की जय' और 'शहीद अवधेश कुमार अमर रहें' नारों के बीच अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।
संघर्षों के बीच सेना में पहुंचे अवधेश कुमार
मृतक जवान अवधेश कुमार अपने पिता स्वर्गीय प्रभु यादव के इकलौते पुत्र थे। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां की देखरेख में चाचा ने आर्थिक तंगी के बावजूद उनकी पढ़ाई-लिखाई कराई। देश सेवा का सपना लेकर वर्ष 2012 में वे भारतीय सेना में भर्ती हुए। उनकी पहली पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर के लेह में हुई थी। करीब सात वर्ष पहले वाघा बॉर्डर पर तैनाती के दौरान अत्यधिक ठंड की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। बाद में चंडीगढ़ के आरआर अस्पताल में उनकी बाईपास सर्जरी हुई, जिसके बाद स्वस्थ होकर उन्होंने दोबारा देश सेवा शुरू कर दी।
ड्यूटी पर लौटने के कुछ दिन बाद बिगड़ी तबीयत
परिजनों ने बताया कि अवधेश कुमार मई महीने में एक महीने की छुट्टी पर घर आए थे। छुट्टी पूरी होने के बाद वे वापस ड्यूटी पर लौट गए। इसी बीच 7 जून को अचानक उनकी तबीयत फिर खराब हो गई। उन्हें तत्काल दिल्ली स्थित सैन्य अस्पताल (आरआर हॉस्पिटल) में भर्ती कराया गया, जहां ऑपरेशन के दौरान हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। सैन्य अधिकारियों द्वारा सूचना मिलते ही परिवार और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
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राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
जवान का पार्थिव शरीर हवाई मार्ग से गया लाया गया, जहां सेना के जवानों ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें सलामी दी। इसके बाद पार्थिव शरीर को जहानाबाद शहर के कालीनगर स्थित आवास लाया गया। यहां हजारों लोगों ने अंतिम दर्शन किए। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी वीर जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की।
यह भी पढ़ें: तेजस्वी यादव का बिहार सीएम पर बड़ा आरोप, बोले- 'मुख्यमंत्री के कहने पर हुआ भरत तिवारी का एनकाउंटर'
7 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि, रो पड़ा पूरा गांव
कालीनगर में श्रद्धांजलि सभा के बाद पार्थिव शरीर को पैतृक गांव पुनीत बिगहा ले जाया गया। गांव में सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। इसके बाद जवान के 7 वर्षीय बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। अवधेश कुमार अपने पीछे वृद्ध मां, पत्नी, 11 वर्षीय बेटी और दो मासूम बेटों को छोड़ गए हैं। उनके निधन से परिवार का एकमात्र सहारा छिन गया।
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संघर्षों के बीच सेना में पहुंचे अवधेश कुमार
मृतक जवान अवधेश कुमार अपने पिता स्वर्गीय प्रभु यादव के इकलौते पुत्र थे। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां की देखरेख में चाचा ने आर्थिक तंगी के बावजूद उनकी पढ़ाई-लिखाई कराई। देश सेवा का सपना लेकर वर्ष 2012 में वे भारतीय सेना में भर्ती हुए। उनकी पहली पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर के लेह में हुई थी। करीब सात वर्ष पहले वाघा बॉर्डर पर तैनाती के दौरान अत्यधिक ठंड की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। बाद में चंडीगढ़ के आरआर अस्पताल में उनकी बाईपास सर्जरी हुई, जिसके बाद स्वस्थ होकर उन्होंने दोबारा देश सेवा शुरू कर दी।
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ड्यूटी पर लौटने के कुछ दिन बाद बिगड़ी तबीयत
परिजनों ने बताया कि अवधेश कुमार मई महीने में एक महीने की छुट्टी पर घर आए थे। छुट्टी पूरी होने के बाद वे वापस ड्यूटी पर लौट गए। इसी बीच 7 जून को अचानक उनकी तबीयत फिर खराब हो गई। उन्हें तत्काल दिल्ली स्थित सैन्य अस्पताल (आरआर हॉस्पिटल) में भर्ती कराया गया, जहां ऑपरेशन के दौरान हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। सैन्य अधिकारियों द्वारा सूचना मिलते ही परिवार और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
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राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
जवान का पार्थिव शरीर हवाई मार्ग से गया लाया गया, जहां सेना के जवानों ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें सलामी दी। इसके बाद पार्थिव शरीर को जहानाबाद शहर के कालीनगर स्थित आवास लाया गया। यहां हजारों लोगों ने अंतिम दर्शन किए। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी वीर जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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7 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि, रो पड़ा पूरा गांव
कालीनगर में श्रद्धांजलि सभा के बाद पार्थिव शरीर को पैतृक गांव पुनीत बिगहा ले जाया गया। गांव में सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। इसके बाद जवान के 7 वर्षीय बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। अवधेश कुमार अपने पीछे वृद्ध मां, पत्नी, 11 वर्षीय बेटी और दो मासूम बेटों को छोड़ गए हैं। उनके निधन से परिवार का एकमात्र सहारा छिन गया।