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कुंआरी मां बनी दुल्हन: गोद में नौ माह की बेटी के साथ कोर्ट में हुई शादी; प्रेम प्रसंग से विवाह तक की कहानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 18 Mar 2026 10:24 PM IST
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सार
Aurangabad News: औरंगाबाद में प्रेम प्रसंग से शुरू मामला शादी तक पहुंचा। नाबालिग को भगाने के आरोप में जेल में बंद युवक को कोर्ट से जमानत मिली। इसके बाद कोर्ट परिसर में शादी हुई, जहां नौ माह की बेटी इस विवाह की गवाह बनी।
शादी के वक्त मां की गोद में मासूम बच्ची
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
औरंगाबाद में एक प्रेम प्रसंग ने समय के साथ कई मोड़ लेते हुए अंततः विवाह का रूप ले लिया। जानकारी के अनुसार, साल भर पहले एक लड़का अपनी नाबालिग प्रेमिका को लेकर दिल्ली चला गया था। इस मामले में परिजनों ने टंडवा थाना में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने आठ दिन के भीतर दोनों को दिल्ली से बरामद कर लिया। इसके बाद लड़के को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जबकि नाबालिग लड़की को कानूनी प्रक्रिया पूरी कर परिजनों को सौंप दिया गया।
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गर्भावस्था और जीवन का महत्वपूर्ण निर्णय
बरामदगी के बाद घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया, जब लड़की को अपने गर्भवती होने की जानकारी मिली। इस स्थिति में उसने बच्चे को जन्म देने का निर्णय लिया। समय के साथ उसने एक बेटी को जन्म दिया और इस दौरान वह बालिग भी हो गई। दूसरी ओर, प्रेमी नाबालिग को भगाने समेत अन्य आरोपों में जेल में बंद था।
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कानूनी प्रक्रिया और जमानत की पहल
बेटी को जन्म देने के बाद लड़की ने अपने बच्चे को पिता का नाम दिलाने के उद्देश्य से प्रेमी को जमानत दिलाने की पहल की। उसने कोर्ट में गुहार लगाई कि उसे विवाह करने का अवसर दिया जाए। मामले की सुनवाई करते हुए स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाया और शर्तों के साथ जमानत देने की बात कही। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से शादी के लिए इकरारनामा प्रस्तुत करते हैं, तो जमानत दी जा सकती है।
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समझौता और कोर्ट में विवाह
कोर्ट के निर्देश के अनुसार दोनों पक्षों ने पंचायती समझौता कर इकरारनामा तैयार किया और इसे अदालत में प्रस्तुत किया। इसके बाद लड़के को जमानत मिल गई। करीब आठ महीने जेल में रहने के बाद उसकी रिहाई हुई और बुधवार को औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित हनुमान मंदिर में दोनों की शादी संपन्न हुई। इस दौरान नौ माह की मासूम बेटी अपनी मां की गोद में मौजूद रही और वह इस विवाह की मूक गवाह बनी।
शर्तों के साथ नई शुरुआत
मामले में पैरवी कर रहे अधिवक्ता नरेंद्र सिंह ने बताया कि जमानत के लिए कोर्ट ने कुछ शर्तें निर्धारित की थीं। इनमें दोनों पक्षों द्वारा सहमति पत्र देना और शादी के बाद अलग रहकर जीवन शुरू करना शामिल था। इकरारनामा में यह भी उल्लेख किया गया कि दोनों परिवार उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करेंगे और भविष्य में परिस्थितियों के अनुसार परिवार में समायोजन किया जाएगा।
आगे की निगरानी और जिम्मेदारी
कोर्ट ने जमानत देते हुए यह भी शर्त रखी कि लड़का हर माह कोर्ट में हाजिरी लगाएगा और यह सुनिश्चित करेगा कि वह लड़की को पत्नी का सम्मान देते हुए रख रहा है तथा बेटी की देखभाल सही तरीके से हो रही है। विवाह के बाद दूल्हा-दुल्हन अपनी नौ माह की बेटी के साथ नए जीवन की शुरुआत के लिए रवाना हो गए।