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Bihar News: जंगल में नक्सलियों की ‘नशे की फैक्ट्री’ ध्वस्त! 15 एकड़ अफीम की फसल रौंदी गई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Feb 2026 05:06 PM IST
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सार
औरंगाबाद जिले के नक्सल प्रभावित मदनपुर थाना क्षेत्र के बादम के जंगली-पहाड़ी इलाके में 15 एकड़ में फैली अवैध अफीम की खेती का खुलासा हुआ। खुफिया सूचना पर वन विभाग, उत्पाद विभाग और बिहार पुलिस की संयुक्त टीम ने सर्च अभियान चलाकर पूरी फसल नष्ट कर दी।
अफीम की खेती व नष्ट करने में लगी संयुक्त टीम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार में एक तरफ सरकार नक्सलवाद के खत्म होने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर नक्सली अब अवैध तरीके से अफीम की खेती कर कमाई कर रहे हैं। औरंगाबाद जिले के अति नक्सल प्रभावित मदनपुर थाना क्षेत्र में भारी पैमाने पर अफीम की खेती का खुलासा हुआ है। वन विभाग, उत्पाद विभाग और बिहार पुलिस की संयुक्त टीम ने मंगलवार को कार्रवाई करते हुए 15 एकड़ में लगी अफीम की फसल को नष्ट कर दिया।
खुफिया सूचना पर की गई कार्रवाई
जिला वन पदाधिकारी (डीएफओ) रूचि सिंह ने बताया कि गुप्त सूचना मिली थी कि मदनपुर क्षेत्र के बादम के जंगली और पहाड़ी इलाके में घने जंगल के बीच अफीम की खेती हो रही है। सूचना के बाद वन विभाग, उत्पाद विभाग और बिहार पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई। टीम दुर्गम रास्तों से होकर जंगल के अंदर पहुंची और सघन अभियान चलाया। इलाके की पूरी तलाशी ली गई। इसी दौरान 15 एकड़ में फैली अफीम की फसल मिली। टीम ने मौके पर ही फसल को रौंदकर नष्ट कर दिया।
गरीब ग्रामीणों को लालच देकर कराई जाती है खेती
पुलिस के अनुसार बिहार में मादक पदार्थों की खेती पर पूरी तरह प्रतिबंध है। लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियान से नक्सलियों की आय कम हुई है और उन्हें लेवी नहीं मिल रही है। ऐसे में नक्सली अधिक पैसे कमाने के लिए दुर्गम जंगल और पहाड़ी इलाकों में गरीब ग्रामीणों को लालच और दबाव देकर अफीम की खेती कराते हैं। इस अवैध खेती से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल वे अपनी गतिविधियां बढ़ाने में करते हैं। पुलिस को जब भी ऐसी सूचना मिलती है, तुरंत सर्च अभियान चलाकर फसल नष्ट की जाती है। पहले भी नक्सल प्रभावित इलाकों में अफीम और गांजा की खेती नष्ट की गई है।
बिहार में नशीले पदार्थों की खेती पर पूरी तरह रोक
अधिकारियों ने बताया कि बिहार में गांजा, भांग और अफीम की खेती पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद अवैध खेती करना कानूनन अपराध है। इससे इलाके की सामाजिक और आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होती है। ऐसे अवैध कारोबार से जुड़कर युवा गलत रास्ते पर जा सकते हैं। प्रशासन की यह कार्रवाई नक्सलियों की कमर तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
ये भी पढ़ें: अंधविश्वास को लेकर जमकर हुई तलवारबाजी, पांच घायल; तीन की हालत गंभीर
आगे भी जारी रहेगा अभियान
डीएफओ रूचि सिंह ने कहा कि मादक पदार्थों की अवैध खेती के खिलाफ संयुक्त अभियान आगे भी लगातार चलता रहेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और अगर कहीं ऐसी खेती हो रही हो तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें। सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी। किसी भी हालत में नाम उजागर नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अवैध खेती में शामिल पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
पहले भी नष्ट की जा चुकी है अवैध खेती
इससे पहले भी देव और मदनपुर के नक्सल प्रभावित जंगलों में अफीम और गांजा की खेती नष्ट की गई है। बिहार पुलिस, उत्पाद विभाग और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई से अवैध कारोबार करने वालों को बड़ा नुकसान हुआ है। खासकर नक्सलियों की कमाई का एक बड़ा जरिया बंद हुआ है।
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खुफिया सूचना पर की गई कार्रवाई
जिला वन पदाधिकारी (डीएफओ) रूचि सिंह ने बताया कि गुप्त सूचना मिली थी कि मदनपुर क्षेत्र के बादम के जंगली और पहाड़ी इलाके में घने जंगल के बीच अफीम की खेती हो रही है। सूचना के बाद वन विभाग, उत्पाद विभाग और बिहार पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई। टीम दुर्गम रास्तों से होकर जंगल के अंदर पहुंची और सघन अभियान चलाया। इलाके की पूरी तलाशी ली गई। इसी दौरान 15 एकड़ में फैली अफीम की फसल मिली। टीम ने मौके पर ही फसल को रौंदकर नष्ट कर दिया।
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गरीब ग्रामीणों को लालच देकर कराई जाती है खेती
पुलिस के अनुसार बिहार में मादक पदार्थों की खेती पर पूरी तरह प्रतिबंध है। लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियान से नक्सलियों की आय कम हुई है और उन्हें लेवी नहीं मिल रही है। ऐसे में नक्सली अधिक पैसे कमाने के लिए दुर्गम जंगल और पहाड़ी इलाकों में गरीब ग्रामीणों को लालच और दबाव देकर अफीम की खेती कराते हैं। इस अवैध खेती से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल वे अपनी गतिविधियां बढ़ाने में करते हैं। पुलिस को जब भी ऐसी सूचना मिलती है, तुरंत सर्च अभियान चलाकर फसल नष्ट की जाती है। पहले भी नक्सल प्रभावित इलाकों में अफीम और गांजा की खेती नष्ट की गई है।
बिहार में नशीले पदार्थों की खेती पर पूरी तरह रोक
अधिकारियों ने बताया कि बिहार में गांजा, भांग और अफीम की खेती पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद अवैध खेती करना कानूनन अपराध है। इससे इलाके की सामाजिक और आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होती है। ऐसे अवैध कारोबार से जुड़कर युवा गलत रास्ते पर जा सकते हैं। प्रशासन की यह कार्रवाई नक्सलियों की कमर तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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आगे भी जारी रहेगा अभियान
डीएफओ रूचि सिंह ने कहा कि मादक पदार्थों की अवैध खेती के खिलाफ संयुक्त अभियान आगे भी लगातार चलता रहेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और अगर कहीं ऐसी खेती हो रही हो तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें। सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी। किसी भी हालत में नाम उजागर नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अवैध खेती में शामिल पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
पहले भी नष्ट की जा चुकी है अवैध खेती
इससे पहले भी देव और मदनपुर के नक्सल प्रभावित जंगलों में अफीम और गांजा की खेती नष्ट की गई है। बिहार पुलिस, उत्पाद विभाग और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई से अवैध कारोबार करने वालों को बड़ा नुकसान हुआ है। खासकर नक्सलियों की कमाई का एक बड़ा जरिया बंद हुआ है।