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Bihar: न संतान थी, न इलाज के पैसे; कीमती जमीन पर नजर गड़ाए बैठे रिश्तेदारों ने दिव्यांग को उतारा मौत के घाट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jun 2026 11:31 AM IST
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सार
गया जिले के डुमरिया प्रखंड में दिव्यांग कृष्ण भगत की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। परिजनों का आरोप है कि जमीन विवाद और संपत्ति बंटवारे को लेकर रिश्तों में तनाव बढ़ा था। इलाज के लिए जमीन बेचने और बहनों को हिस्सा देने की इच्छा विवाद की प्रमुख वजह बताई जा रही है।
अस्पताल में मृतक के परिजन
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
गया के डुमरिया प्रखंड के महूड़ी गांव में दिव्यांग कृष्ण भगत की हत्या ने न केवल एक परिवार को शोक में डुबो दिया है, बल्कि समाज के सामने रिश्तों और पारिवारिक मूल्यों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बनी यह घटना संपत्ति विवाद और पारिवारिक तनाव की एक दर्दनाक कहानी बनकर सामने आई है।
दिव्यांग जीवन और संघर्षों से भरा सफर
ग्रामीणों के अनुसार, कृष्ण भगत जन्म से दिव्यांग थे और उनकी कोई संतान भी नहीं थी। बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही थीं। रोजमर्रा के कई कामों और इलाज के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। ऐसे में परिवार ही उनका सबसे बड़ा सहारा माना जाता था।
जमीन को लेकर बढ़ा विवाद
परिजनों का कहना है कि कृष्ण भगत के हिस्से में सड़क किनारे स्थित कीमती जमीन थी। खराब होती सेहत और इलाज के खर्च को देखते हुए उन्होंने अपनी कुछ जमीन बेचने की इच्छा जताई थी। बताया जाता है कि इसी मुद्दे को लेकर परिवार के भीतर मतभेद शुरू हुए, जो समय के साथ गहराते चले गए।
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बहनों के अधिकार की चर्चा भी बनी विवाद का कारण
मृतक की बहनों मुन्नी देवी और चुन्नी देवी का आरोप है कि कृष्ण भगत चाहते थे कि पिता की संपत्ति में बेटियों को भी उनका कानूनी अधिकार मिले। उन्होंने कई बार परिवार के बीच इस विषय को उठाया था। परिजनों के अनुसार, संपत्ति के बंटवारे और बहनों के हिस्से को लेकर परिवार में लंबे समय से तनाव का माहौल बना हुआ था।
इलाज के लिए पैसे नहीं, आगे आए ग्रामीण और पुलिसकर्मी
घटना के बाद घायल कृष्ण भगत को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनके पास इलाज के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने मानवीय पहल करते हुए आर्थिक सहयोग किया। ग्रामीणों ने भी चंदा एकत्र कर मदद की। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
ये भी पढ़ें- Bihar: छह महीने पहले ब्लॉक कर दिया था नंबर, शक होने पर पूर्व प्रेमिका के भाई ने काटा युवक का कान; हालत गंभीर
गांव में चर्चा का विषय बनी घटना
कृष्ण भगत की मौत के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस व्यक्ति को अपने परिवार से सुरक्षा और सहयोग की उम्मीद थी, वही परिस्थितियों का सबसे बड़ा शिकार बन गया। यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक मूल्यों और संपत्ति के बढ़ते विवादों की गंभीर तस्वीर भी पेश करती है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई कर रही है।
दिव्यांग जीवन और संघर्षों से भरा सफर
ग्रामीणों के अनुसार, कृष्ण भगत जन्म से दिव्यांग थे और उनकी कोई संतान भी नहीं थी। बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही थीं। रोजमर्रा के कई कामों और इलाज के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। ऐसे में परिवार ही उनका सबसे बड़ा सहारा माना जाता था।
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जमीन को लेकर बढ़ा विवाद
परिजनों का कहना है कि कृष्ण भगत के हिस्से में सड़क किनारे स्थित कीमती जमीन थी। खराब होती सेहत और इलाज के खर्च को देखते हुए उन्होंने अपनी कुछ जमीन बेचने की इच्छा जताई थी। बताया जाता है कि इसी मुद्दे को लेकर परिवार के भीतर मतभेद शुरू हुए, जो समय के साथ गहराते चले गए।
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मृतक की बहनों मुन्नी देवी और चुन्नी देवी का आरोप है कि कृष्ण भगत चाहते थे कि पिता की संपत्ति में बेटियों को भी उनका कानूनी अधिकार मिले। उन्होंने कई बार परिवार के बीच इस विषय को उठाया था। परिजनों के अनुसार, संपत्ति के बंटवारे और बहनों के हिस्से को लेकर परिवार में लंबे समय से तनाव का माहौल बना हुआ था।
इलाज के लिए पैसे नहीं, आगे आए ग्रामीण और पुलिसकर्मी
घटना के बाद घायल कृष्ण भगत को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनके पास इलाज के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने मानवीय पहल करते हुए आर्थिक सहयोग किया। ग्रामीणों ने भी चंदा एकत्र कर मदद की। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
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गांव में चर्चा का विषय बनी घटना
कृष्ण भगत की मौत के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस व्यक्ति को अपने परिवार से सुरक्षा और सहयोग की उम्मीद थी, वही परिस्थितियों का सबसे बड़ा शिकार बन गया। यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक मूल्यों और संपत्ति के बढ़ते विवादों की गंभीर तस्वीर भी पेश करती है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई कर रही है।