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Bihar News: 30 साल की कैद खत्म; गया में ईंट भट्ठे से 62 बंधुआ मजदूर आजाद, गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 17 Mar 2026 07:59 PM IST
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सार

Bihar News: गया के फतेहपुर प्रखंड में प्रशासन ने पूर्वी बाथन गांव स्थित ईंट भट्ठा पर छापेमारी कर 62 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया। यह कार्रवाई शशांक शुभंकर के निर्देश पर की गई, जिसमें एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई जबकि मुख्य संचालक फरार है।

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बंधुआ मजदूर को मुक्त कराते पुलिस व अन्य प्रशासनिक अधिकारी
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विस्तार

बिहार के गया जिले के फतेहपुर प्रखंड में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ईंट भट्ठा से 62 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया है। इन मजदूरों में महिलाएं और मासूम बच्चे भी शामिल हैं, जो वर्षों से बंधन में जीवन जीने को मजबूर थे। मामला पूर्वी बाथन गांव स्थित RYC ईंट भट्ठा का है, जहां करीब 30 वर्षों से बंधुआ मजदूरी कराए जाने का खुलासा हुआ। 

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गुप्त सूचना के आधार पर डीएम ने बनाई टीम 
गुप्त सूचना मिलने के बाद जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर के निर्देश पर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। डीएम के निर्देश पर सहायक समाहर्ता डॉ. सूरज कुमार के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम गठित की गई, जिसमें श्रम विभाग, प्रखंड प्रशासन और पुलिस बल शामिल थे। टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी कर मौके से 62 मजदूरों और उनके परिजनों को सुरक्षित बाहर निकाला।
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संचालक फरार मुंशी गिरफ्तार
रेस्क्यू के बाद मजदूरों के चेहरे पर राहत और खुशी साफ दिखी। पीड़िता आशा मांझी ने बताया कि वे पिछले तीन दशकों से बंधुआ मजदूरी कर रहे थे और आज पहली बार आज़ादी का एहसास हुआ है। कार्रवाई के दौरान भट्ठा संचालक रामाशीष यादव मौके से फरार हो गया, जबकि मुंशी देवेंद्र यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मामले में गुरपा थाना में प्राथमिकी दर्ज कर मुख्य आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई है।

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प्रशासन ने क्या कहा?
इस कार्रवाई के बाद मीडिया से बात करते हुए जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बंधुआ मजदूरी जैसी अमानवीय प्रथा को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही मुक्त कराए गए मजदूरों के पुनर्वास और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह कार्रवाई न केवल 62 लोगों को आजादी दिलाने वाली साबित हुई, बल्कि मानवाधिकारों की रक्षा और कानून के सख्त पालन का मजबूत संदेश भी दे गई।

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