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Bihar Temple Stampede: शीतला मंदिर पहुंचे धार्मिक न्यास बोर्ड अध्यक्ष, मानी चूक; सुधार के दिए निर्देश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,नालंदा
Published by: Ashutosh Pratap Singh
Updated Wed, 01 Apr 2026 01:48 PM IST
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सार
नालंदा के मघड़ा शीतला माता मंदिर में हुए हादसे के बाद बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन ने मौके का दौरा कर प्रबंधन में चूक स्वीकार की। उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि बढ़ती भीड़ को देखते हुए बेहतर प्रबंधन जरूरी है।
बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नालंदा जिले के प्रसिद्ध मघड़ा शीतला माता मंदिर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद बुधवार को बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटना की समीक्षा करते हुए साफ तौर पर स्वीकार किया कि प्रबंधन स्तर पर कहीं न कहीं चूक हुई है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
दिवंगत आत्माओं को दी श्रद्धांजलि
मंदिर पहुंचने के बाद प्रो. रणवीर नंदन ने सबसे पहले हादसे में जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के प्राण मां शीतला के दरबार में गए हैं, माता उन्हें मोक्ष प्रदान करें। उन्होंने आध्यात्मिक भाव से कहा कि सनातन धर्म प्रतिशोध में नहीं, बल्कि क्षमा में विश्वास करता है। उन्होंने प्रार्थना करते हुए कहा कि जिन लोगों की लापरवाही से यह घटना हुई, माता उन्हें क्षमा करें और सद्बुद्धि प्रदान करें।
बढ़ती भीड़ और प्रबंधन क्षमता पर उठाए सवाल
मघड़ा मंदिर के मौजूदा प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए अध्यक्ष ने कहा कि आयोजकों को अपनी प्रबंधन क्षमता दिखानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि देश और राज्य में बदले हुए धार्मिक माहौल के कारण मंदिरों में श्रद्धालुओं, खासकर युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा किए गए मंदिरों के जीर्णोद्धार कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब युवा पिकनिक मनाने के बजाय मंदिरों में दर्शन करने पहुंच रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब भीड़ बढ़ रही है, तो प्रबंधन को पहले से योजना बनानी चाहिए कि 200, 500 या 1000 लोगों की भीड़ को कैसे नियंत्रित किया जाए।
ये भी पढ़ें: नई सरकार के गठन से पहले किन नेताओं को मिला VIP का दर्जा; विधान सभा समितियों में ओहदा
पंजीकरण न होने के बावजूद जिम्मेदारी हमारी
मीडिया से बातचीत में प्रो. रणवीर नंदन ने कहा कि मघड़ा शीतला मंदिर फिलहाल धार्मिक न्यास बोर्ड के तहत पंजीकृत नहीं है, लेकिन कानून के अनुसार बिहार के सभी मठों और मंदिरों की सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी बोर्ड की ही होती है।
भविष्य में सुधार के लिए ठोस कदम
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस हादसे के बाद अब मंदिर के संचालन और प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए ठोस निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस घटना में हुई चूक को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन अब स्थानीय लोगों और धार्मिक न्यास बोर्ड के सहयोग से ऐसा प्रबंध किया जाएगा, जिससे भविष्य में किसी भी श्रद्धालु को अपनी जान न गंवानी पड़े।
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दिवंगत आत्माओं को दी श्रद्धांजलि
मंदिर पहुंचने के बाद प्रो. रणवीर नंदन ने सबसे पहले हादसे में जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के प्राण मां शीतला के दरबार में गए हैं, माता उन्हें मोक्ष प्रदान करें। उन्होंने आध्यात्मिक भाव से कहा कि सनातन धर्म प्रतिशोध में नहीं, बल्कि क्षमा में विश्वास करता है। उन्होंने प्रार्थना करते हुए कहा कि जिन लोगों की लापरवाही से यह घटना हुई, माता उन्हें क्षमा करें और सद्बुद्धि प्रदान करें।
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बढ़ती भीड़ और प्रबंधन क्षमता पर उठाए सवाल
मघड़ा मंदिर के मौजूदा प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए अध्यक्ष ने कहा कि आयोजकों को अपनी प्रबंधन क्षमता दिखानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि देश और राज्य में बदले हुए धार्मिक माहौल के कारण मंदिरों में श्रद्धालुओं, खासकर युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा किए गए मंदिरों के जीर्णोद्धार कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब युवा पिकनिक मनाने के बजाय मंदिरों में दर्शन करने पहुंच रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब भीड़ बढ़ रही है, तो प्रबंधन को पहले से योजना बनानी चाहिए कि 200, 500 या 1000 लोगों की भीड़ को कैसे नियंत्रित किया जाए।
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पंजीकरण न होने के बावजूद जिम्मेदारी हमारी
मीडिया से बातचीत में प्रो. रणवीर नंदन ने कहा कि मघड़ा शीतला मंदिर फिलहाल धार्मिक न्यास बोर्ड के तहत पंजीकृत नहीं है, लेकिन कानून के अनुसार बिहार के सभी मठों और मंदिरों की सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी बोर्ड की ही होती है।
भविष्य में सुधार के लिए ठोस कदम
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस हादसे के बाद अब मंदिर के संचालन और प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए ठोस निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस घटना में हुई चूक को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन अब स्थानीय लोगों और धार्मिक न्यास बोर्ड के सहयोग से ऐसा प्रबंध किया जाएगा, जिससे भविष्य में किसी भी श्रद्धालु को अपनी जान न गंवानी पड़े।
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