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Bihar News: युद्ध की आग के बीच बोधगया से शांति की पुकार, दलाई लामा के जन्मदिवस पर गूंजा वैश्विक संदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बोधगया
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Apr 2026 01:54 PM IST
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सार
बिहार के बोधगया में 14वें दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें 9 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में वैश्विक तनाव, विशेषकर इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच शांति, अहिंसा और करुणा के महत्व पर जोर दिया गया।
दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस पर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन आयोजित
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हां एक ओर इजरायल-ईरान तनाव के कारण वैश्विक हालात चिंताजनक बने हुए हैं, वहीं बिहार के बोधगया से शांति, अहिंसा और करुणा का संदेश दुनिया को नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है। 14वें दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस के अवसर पर यहां अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बिहार के बोधगया में 14वें दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का आयोजन एशियन बुद्धिस्ट कॉन्फ्रेंस फॉर पीस द्वारा किया गया। इस सम्मेलन में दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
राज्यपाल ने किया उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन लद्दाख के राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में, खासकर इजरायल-ईरान जैसे तनावपूर्ण हालात के बीच, भगवान बुद्ध के शांति और अहिंसा के संदेश की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। यह सम्मेलन ‘बोधिसत्व ज्ञान और करुणा’ विषय पर आधारित था। इसका मुख्य उद्देश्य 14वें दलाई लामा की शिक्षाओं के माध्यम से विश्व में शांति, सहिष्णुता और वैश्विक भाईचारे को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर दलाई लामा का 90वां जन्मदिवस भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।
9 देशों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मंगोलिया, रूस, भारत, लाओस और वियतनाम समेत कुल 9 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आज दुनिया जिस तरह के संघर्ष और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, उसमें भगवान बुद्ध के विचार ही मानवता को सही दिशा दिखा सकते हैं। सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्रों में शांति, करुणा, सह-अस्तित्व और नैतिक मूल्यों पर गहन चर्चा हुई। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि हिंसा और युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं हैं, बल्कि संवाद और समझदारी ही स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें: नई सरकार के गठन से पहले किन नेताओं को मिला VIP का दर्जा; विधान सभा समितियों में ओहदा
बुद्ध का संदेश पूरी मानवता के लिए
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश किसी एक धर्म या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए है। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया के देश बुद्ध के बताए मार्ग पर चलें, तो वर्तमान संघर्षों का समाधान संभव है। बोधगया, जो भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली है, एक बार फिर से विश्व शांति का केंद्र बनकर उभरा है। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि चाहे हालात कितने भी जटिल क्यों न हों, शांति और करुणा ही मानवता का असली मार्ग हैं।
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राज्यपाल ने किया उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन लद्दाख के राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में, खासकर इजरायल-ईरान जैसे तनावपूर्ण हालात के बीच, भगवान बुद्ध के शांति और अहिंसा के संदेश की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। यह सम्मेलन ‘बोधिसत्व ज्ञान और करुणा’ विषय पर आधारित था। इसका मुख्य उद्देश्य 14वें दलाई लामा की शिक्षाओं के माध्यम से विश्व में शांति, सहिष्णुता और वैश्विक भाईचारे को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर दलाई लामा का 90वां जन्मदिवस भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।
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9 देशों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मंगोलिया, रूस, भारत, लाओस और वियतनाम समेत कुल 9 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आज दुनिया जिस तरह के संघर्ष और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, उसमें भगवान बुद्ध के विचार ही मानवता को सही दिशा दिखा सकते हैं। सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्रों में शांति, करुणा, सह-अस्तित्व और नैतिक मूल्यों पर गहन चर्चा हुई। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि हिंसा और युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं हैं, बल्कि संवाद और समझदारी ही स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
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बुद्ध का संदेश पूरी मानवता के लिए
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश किसी एक धर्म या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए है। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया के देश बुद्ध के बताए मार्ग पर चलें, तो वर्तमान संघर्षों का समाधान संभव है। बोधगया, जो भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली है, एक बार फिर से विश्व शांति का केंद्र बनकर उभरा है। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि चाहे हालात कितने भी जटिल क्यों न हों, शांति और करुणा ही मानवता का असली मार्ग हैं।
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