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Bihar: सांप ने डंसा तो अस्पताल की जगह तांत्रिक के पास पहुंचे परिजन, झाड़-फूंक में गंवाया समय; महिला की मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2026 11:10 AM IST
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सार
गया जिले के फतेहपुर थाना क्षेत्र के मंझयावा गांव में अंधविश्वास की वजह से एक महिला की जान चली गई। प्रियंका कुमारी को खेत में काम करने के दौरान जहरीले सांप ने डंस लिया था, लेकिन परिजन उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय तांत्रिक के पास झाड़-फूंक कराने ले गए।
मृतिका प्रियंका कुमारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गया जिले के फतेहपुर थाना क्षेत्र के मंझयावा गांव से अंधविश्वास की एक दर्दनाक घटना सामने आई है। खेत में काम करने के दौरान सांप के डंसने से एक महिला की तबीयत बिगड़ गई, लेकिन परिजन उसे तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय तांत्रिक के पास झाड़-फूंक कराने पहुंच गए। करीब तीन घंटे तक तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक का सहारा लिया जाता रहा। जब महिला की हालत बेहद गंभीर हो गई, तब उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते में ही महिला ने दम तोड़ दिया।
खेत में काम करते समय सांप ने डंसा
मृतका की पहचान मंझयावा गांव निवासी मंजीत यादव की पत्नी प्रियंका कुमारी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार मंगलवार की देर शाम प्रियंका घर के पास खेत में काम कर रही थी। इस दौरान वह मोबाइल फोन पर बातचीत भी कर रही थी। तभी किसी जहरीले सांप ने उसके पैर में डंस लिया। हालांकि उस समय प्रियंका को इसका एहसास नहीं हुआ। उसने इसे किसी कीड़े के काटने की सामान्य घटना समझकर नजरअंदाज कर दिया और अपना काम करती रही।
घर पहुंचते ही बिगड़ने लगी तबीयत
कुछ देर बाद जब प्रियंका घर लौटी तो उसे चक्कर आने लगे और शरीर में कमजोरी महसूस होने लगी। परिजनों ने जब उसके पैर की जांच की तो वहां सांप के काटने जैसे निशान दिखाई दिए। इसके बाद परिवार के लोग घबरा गए, लेकिन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय तांत्रिक के पास ले जाने का फैसला किया गया।
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तीन घंटे तक चलता रहा झाड़-फूंक का दौर
ग्रामीणों के मुताबिक तांत्रिक करीब तीन घंटे तक झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र करता रहा। इस दौरान प्रियंका की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। समय बीतने के साथ उसकी स्थिति और गंभीर होती गई। जब हालत बेहद नाजुक हो गई तो तांत्रिक ने ही परिजनों को अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिवार के लोग उसे फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।
प्राथमिक उपचार के बाद किया गया रेफर
फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों ने महिला का प्राथमिक उपचार किया। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए उसे अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया गया। परिजन उसे लेकर मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल जा रहे थे, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई।
ये भी पढ़ें: दहेज में नहीं मिली कार तो ली जान? पूर्णिया में विवाहिता की मौत; शरीर पर मिले चोट के निशान, पति गिरफ्तार
परिवार में मचा कोहराम
प्रियंका की मौत की खबर मिलते ही पूरे परिवार में कोहराम मच गया। सूचना मिलते ही रिश्तेदार और गांव के लोग उसके घर पहुंचने लगे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम का माहौल है।
दो मासूम बच्चों के सिर से उठा मां का साया
ग्रामीणों के अनुसार प्रियंका की शादी करीब चार साल पहले हुई थी। उसके दो छोटे बच्चे हैं, जिनमें एक बेटा और एक बेटी शामिल हैं। मां की असमय मौत के बाद दोनों बच्चों के सिर से ममता का साया उठ गया है। परिवार के सामने अब बच्चों की परवरिश की बड़ी जिम्मेदारी खड़ी हो गई है। गांव के लोग भी इस घटना से दुखी हैं और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जता रहे हैं।
खेत में काम करते समय सांप ने डंसा
मृतका की पहचान मंझयावा गांव निवासी मंजीत यादव की पत्नी प्रियंका कुमारी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार मंगलवार की देर शाम प्रियंका घर के पास खेत में काम कर रही थी। इस दौरान वह मोबाइल फोन पर बातचीत भी कर रही थी। तभी किसी जहरीले सांप ने उसके पैर में डंस लिया। हालांकि उस समय प्रियंका को इसका एहसास नहीं हुआ। उसने इसे किसी कीड़े के काटने की सामान्य घटना समझकर नजरअंदाज कर दिया और अपना काम करती रही।
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घर पहुंचते ही बिगड़ने लगी तबीयत
कुछ देर बाद जब प्रियंका घर लौटी तो उसे चक्कर आने लगे और शरीर में कमजोरी महसूस होने लगी। परिजनों ने जब उसके पैर की जांच की तो वहां सांप के काटने जैसे निशान दिखाई दिए। इसके बाद परिवार के लोग घबरा गए, लेकिन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय तांत्रिक के पास ले जाने का फैसला किया गया।
तीन घंटे तक चलता रहा झाड़-फूंक का दौर
ग्रामीणों के मुताबिक तांत्रिक करीब तीन घंटे तक झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र करता रहा। इस दौरान प्रियंका की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। समय बीतने के साथ उसकी स्थिति और गंभीर होती गई। जब हालत बेहद नाजुक हो गई तो तांत्रिक ने ही परिजनों को अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिवार के लोग उसे फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।
प्राथमिक उपचार के बाद किया गया रेफर
फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों ने महिला का प्राथमिक उपचार किया। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए उसे अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया गया। परिजन उसे लेकर मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल जा रहे थे, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई।
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परिवार में मचा कोहराम
प्रियंका की मौत की खबर मिलते ही पूरे परिवार में कोहराम मच गया। सूचना मिलते ही रिश्तेदार और गांव के लोग उसके घर पहुंचने लगे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम का माहौल है।
दो मासूम बच्चों के सिर से उठा मां का साया
ग्रामीणों के अनुसार प्रियंका की शादी करीब चार साल पहले हुई थी। उसके दो छोटे बच्चे हैं, जिनमें एक बेटा और एक बेटी शामिल हैं। मां की असमय मौत के बाद दोनों बच्चों के सिर से ममता का साया उठ गया है। परिवार के सामने अब बच्चों की परवरिश की बड़ी जिम्मेदारी खड़ी हो गई है। गांव के लोग भी इस घटना से दुखी हैं और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जता रहे हैं।