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Bihar News: अंदर 11 वकील, बाहर बेचैनी... कोर्ट की लिफ्ट में फंसे लोग; परिसर में मची अफरातफरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मधेपुरा
Published by: कोसी ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jun 2026 01:01 PM IST
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सार
मधेपुरा व्यवहार न्यायालय के नवनिर्मित भवन में बुधवार को लिफ्ट में तकनीकी खराबी के कारण 11 अधिवक्ता करीब डेढ़ घंटे तक फंसे रहे। बताया गया कि छह लोगों की क्षमता वाली लिफ्ट में 11 लोग सवार हो गए थे, जिसके कारण वह ग्राउंड फ्लोर और प्रथम तल के बीच अटक गई।
लिफ्ट में फंसे लोगों को बाहर निकालते लोग
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विस्तार
मधेपुरा व्यवहार न्यायालय के नवनिर्मित भवन में बुधवार को उस समय अफरातफरी मच गई, जब क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने के कारण लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में बंद हो गई। लिफ्ट में कुल 11 अधिवक्ता फंस गए और करीब डेढ़ घंटे तक बाहर नहीं निकल सके। घटना की सूचना मिलते ही न्यायालय प्रशासन, न्यायिक पदाधिकारी और तकनीकी कर्मी मौके पर पहुंचे। काफी प्रयासों के बाद लिफ्ट का दरवाजा खोला गया और सभी अधिवक्ताओं को सुरक्षित बाहर निकाला गया। राहत की बात यह रही कि इस दौरान किसी को कोई शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा।
क्षमता से अधिक लोग चढ़ने से बंद हुई लिफ्ट
जानकारी के अनुसार न्यायालय भवन में लगी लिफ्ट की क्षमता एक समय में केवल छह लोगों की है। बुधवार को इसमें करीब 11 लोग सवार हो गए। अधिक भार होने के कारण लिफ्ट ने अचानक काम करना बंद कर दिया और ग्राउंड फ्लोर तथा प्रथम तल के बीच अटक गई।
अधिवक्ताओं ने सुनाया अंदर फंसने का अनुभव
लिफ्ट से बाहर निकले अधिवक्ता मनोज कुमार अंबष्ठ ने बताया कि लिफ्ट ऊपर जाने के बजाय नीचे की ओर जाने लगी और अचानक बीच में रुक गई। इसके बाद वह न तो ऊपर जा रही थी और न ही नीचे। काफी देर तक सभी लोग अंदर फंसे रहे। बाद में तकनीकी सहायता की मदद से लिफ्ट को खोला गया और सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया। उन्होंने कहा कि मौके पर तत्काल तकनीशियन उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग
अधिवक्ता सुरेंद्र मोहन सिंह ने बताया कि लिफ्ट की निर्धारित क्षमता छह व्यक्तियों की है, लेकिन अधिवक्ताओं के साथ आम लोग भी उसमें सवार हो जाते हैं। इससे अक्सर ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है। उन्होंने न्यायालय प्रशासन से लिफ्ट के पास सुरक्षा गार्ड तैनात करने की मांग की, ताकि क्षमता से अधिक लोगों के प्रवेश को रोका जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले भी न्यायालय परिसर की लिफ्ट में लोगों के फंसने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में लिफ्ट के नियमित रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।
मौके पर पहुंचे प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश
घटना की गंभीरता को देखते हुए मधेपुरा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुरविंदर सिंह मल्होत्रा स्वयं मौके पर पहुंचे और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने पूरी स्थिति की निगरानी की और जल्द राहत कार्य सुनिश्चित कराया।
ये भी पढ़ें: दोस्ती बनी दुश्मनी! पटना में दोस्त ने पीठ में मारी गोली, घायल छोड़ बाइक लेकर हुआ फरार
लिफ्टमैन ने उठाए गंभीर सवाल
लिफ्टमैन सुधीर कुमार ने बताया कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद लोग जबरन अधिक संख्या में लिफ्ट में सवार हो जाते हैं। कई बार तो लोग लिफ्टमैन को भी अंदर रहने नहीं देते। उन्होंने कहा कि जब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक लिफ्ट को अस्थायी रूप से बंद कर देना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
इस घटना ने न्यायालय भवन की सुरक्षा व्यवस्था और लिफ्ट संचालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते तकनीकी सहायता नहीं मिलती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। फिलहाल सभी लोग सुरक्षित हैं, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग तेज हो गई है।
क्षमता से अधिक लोग चढ़ने से बंद हुई लिफ्ट
जानकारी के अनुसार न्यायालय भवन में लगी लिफ्ट की क्षमता एक समय में केवल छह लोगों की है। बुधवार को इसमें करीब 11 लोग सवार हो गए। अधिक भार होने के कारण लिफ्ट ने अचानक काम करना बंद कर दिया और ग्राउंड फ्लोर तथा प्रथम तल के बीच अटक गई।
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अधिवक्ताओं ने सुनाया अंदर फंसने का अनुभव
लिफ्ट से बाहर निकले अधिवक्ता मनोज कुमार अंबष्ठ ने बताया कि लिफ्ट ऊपर जाने के बजाय नीचे की ओर जाने लगी और अचानक बीच में रुक गई। इसके बाद वह न तो ऊपर जा रही थी और न ही नीचे। काफी देर तक सभी लोग अंदर फंसे रहे। बाद में तकनीकी सहायता की मदद से लिफ्ट को खोला गया और सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया। उन्होंने कहा कि मौके पर तत्काल तकनीशियन उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग
अधिवक्ता सुरेंद्र मोहन सिंह ने बताया कि लिफ्ट की निर्धारित क्षमता छह व्यक्तियों की है, लेकिन अधिवक्ताओं के साथ आम लोग भी उसमें सवार हो जाते हैं। इससे अक्सर ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है। उन्होंने न्यायालय प्रशासन से लिफ्ट के पास सुरक्षा गार्ड तैनात करने की मांग की, ताकि क्षमता से अधिक लोगों के प्रवेश को रोका जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले भी न्यायालय परिसर की लिफ्ट में लोगों के फंसने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में लिफ्ट के नियमित रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।
मौके पर पहुंचे प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश
घटना की गंभीरता को देखते हुए मधेपुरा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुरविंदर सिंह मल्होत्रा स्वयं मौके पर पहुंचे और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने पूरी स्थिति की निगरानी की और जल्द राहत कार्य सुनिश्चित कराया।
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लिफ्टमैन ने उठाए गंभीर सवाल
लिफ्टमैन सुधीर कुमार ने बताया कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद लोग जबरन अधिक संख्या में लिफ्ट में सवार हो जाते हैं। कई बार तो लोग लिफ्टमैन को भी अंदर रहने नहीं देते। उन्होंने कहा कि जब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक लिफ्ट को अस्थायी रूप से बंद कर देना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
इस घटना ने न्यायालय भवन की सुरक्षा व्यवस्था और लिफ्ट संचालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते तकनीकी सहायता नहीं मिलती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। फिलहाल सभी लोग सुरक्षित हैं, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग तेज हो गई है।